शेयर बाज़ार में भारी उछाल क्या आज भी जारी रहेगा?

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एग्ज़िट पोल्स में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को बढ़त हासिल होने के बाद सोमवार की सुबह को शेयर बाज़ार ज़बरदस्त उछाल के साथ खुला और बढ़त यह अब भी बनी हुई है.
सेंसेक्स क़रीब दो हज़ार अंकों की बढ़त के साथ खुला है. वहीं निफ्टी प्री ओपनिंग में करीब एक हज़ार अंकों की बढ़त के साथ खुला.
शेयर बाज़ार में ये तेज़ी एग्ज़िट पोल्स के सामने आने के बाद देखी जा रही है. ऐसे अनुमान लगाए जा रहे हैं कि सत्ता में कोई परिवर्तन ना आने पर बाज़ार में तेज़ी या स्थिरता बरक़रार रहेगी.
लोकसभा चुनाव 2024 के एग्ज़िट पोल्स में नरेंद्र मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने का अनुमान लगाया गया है.
हालांकि विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ने इन एग्ज़िट पोल्स को ज़मीनी हक़ीक़त से दूर बताया है और 295 सीटें जीतने की उम्मीद जताई है.
क्या है बाज़ार का अनुमान?

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इन्वेस्टर परिमल अडे ने मार्केट खुलने के बाद सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर पोस्ट किया.
उन्होंने अनुमान लगाते हुए लिखा कि मई 2029 में निफ़्टी 50 हज़ार और सेंसेक्स डेढ़ लाख के पार होगा. उन्होंने इसकी वजह भी बताई है.
उन्होंने लिखा है, "ऐसा नीति निर्माण में घरेलू खपत और डेमोग्राफ़िक डिविडेंड की वजह से है."
वहीं मार्केट एनालिस्ट सुनील शाह ने सोमवार को शुरुआती ट्रेड में सेंसेक्स के दो हज़ार पॉइंट्स से खुलने पर समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत की है.
उन्होंने कहा कि मार्केट गैप उछाल के साथ खुला जिसका पहले से अनुमान लगाया गया था.
सुनील शाह ने पीटीआई से कहा, "मार्केट गैप अप (जब शेयर बाज़ार बीते दिन की तुलना में अधिक दाम पर खुलता है) के साथ खुला, इसका पहले से अनुमान था. क्योंकि शनिवार को सात चरणों के बाद लोकसभा चुनाव का मतदान ख़त्म हो गया और एग्ज़िट पोल्स की घोषणा की गई. इसमें साफ़तौर पर ये संकेत थे कि वर्तमान व्यवस्था सत्ता में वापसी कर रही है."
"बाज़ार की नज़र हमेशा नीतियों के जारी रहने की ओर ही रहती है. तो उसने महसूस किया कि इसमें कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है. वर्तमान सरकार की उच्च विकास दर हासिल करने और इन्वेस्टर और बिज़नेस फ़्रेंडली जैसी नीतियां जारी रहेंगी. इन्फ़्रास्ट्रक्चर और दूसरे उद्योगों पर ख़र्च करना भी जारी रहेगा. बाज़ार ने एग्ज़िट पोल्स के अनुमानों को पसंद किया है. इस वजह से हमने देखा कि मार्केट 2,000 पॉइंट से अधिक पर खुला."
वहीं सोशल मीडिया पर लोग मार्केट के इस तरह से खुलने पर भी अलग-अलग तरह से प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ लोग दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के रविवार को दिए गए बयान को भी शेयर कर रहे हैं.
अंतरिम ज़मानत ख़त्म होने के बाद रविवार को केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने कहा कि 'एक थ्योरी ये चल रही है कि इन्होंने इतनी ज़्यादा सीटें इसलिए दिखाईं क्योंकि इनके लोगों ने शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर रखा है. और कल जब शेयर मार्केट खुले तो ये बंपर होगा और अपने शेयर बेचकर ख़ुद निकल लें.'
अंतरराष्ट्रीय मीडिया का क्या है कहना?

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अमेरिकी मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग ने एग्ज़िट पोल्स से जुड़ी ख़बर को प्रकाशित करते हुए शीर्षक दिया है- 'मोदी भारत में चुनावों में भारी जीत के लिए तैयार, एग्ज़िट पोल्स से पता चलता है.'
ख़बर में लिखा गया है, "कई एग्ज़िट पोल्स दिखाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी लगातार तीसरी बार भारत के चुनाव में निर्णायक बहुमत हासिल करने के लिए तैयार है."
ब्लूमबर्ग की ख़बर में आगे लिखा है, "एग्ज़िट पोल्स के आधार पर मोदी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का दावा किया है और कहा है कि ख़ासकर ग़रीबों समेत मतदाताओं को सत्तारूढ़ पार्टी के ट्रैक रिकॉर्ड ने प्रभावित किया है."
इसमें बताया गया है कि ये परिणाम भारत के वित्तीय बाज़ार को प्रोत्साहित कर सकते हैं जो कि बीते सप्ताह में अधिक उतार-चढ़ाव भरा रहा है.
ब्लूमबर्ग से जियोजिट फ़ाइनैंशियल सर्विसेज़ के मुख्य निवेशक रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने अनुमान लगाया है कि सोमवार को बाज़ार में उछाल आएगा.
उन्होंने कहा कि एग्ज़िट पोल्स उन चुनावी आशंकाओं को ख़ारिज कर देगा जो मई से बढ़ रही थीं.
अख़बार लिखता है, "मार्च में पूरे हुए बीते वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 8 फ़ीसदी से अधिक की दर से बढ़ रही थी जो कि पूरी दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. केंद्रीय बैंक ने इस साल 7 फ़ीसदी की विकास दर का अनुमान लगाया है. एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बीते सप्ताह भारत की संभावित क्रेडिट रेटिंग में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था."
एलारा सिक्योरिटीज़ इंडिया लिमिटेड में अर्थशास्त्री गरिमा कपूर कहती हैं, "अगर परिणाम एग्ज़िट पोल्स के अनुसार आए तो ये मार्केट के लिए बेहद सकारात्मक रहना चाहिए क्योंकि इससे ये संकेत जाएगा कि वर्तमान नीतियां जारी रहेंगी और व्यापक आर्थिक स्थिरता, सुधार, बुनियादी ढांचे के निर्माण पर लगातार ध्यान बना रहेगा."
ब्रिटेन के बिज़नेश अख़बार फ़ाइनैंशियल टाइम्स से एम्के ग्लोबल फ़ाइनैंशियल सर्विसेज़ की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि राजनीतिक निरंतरता बाज़ार के लिए अच्छा है.
वो कहती हैं, "अंतिम परिणाम एग्ज़िट पोल्स से अलग हो सकता है लेकिन राजनीतिक स्थिरता मौजूदा हालात के लिए अच्छी होगी और मध्यम अवधि में आर्थिक स्थिरता लाएगा."
जब विदेशी निवेशकों ने छोड़ा बाज़ार

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ऐसा नहीं है कि बाज़ार में तेज़ी से हर तरह के निवेशक वहां पहुंच रहे हैं. ब्रिटेन की साप्ताहिक पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने बीते सप्ताह एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया था कि अप्रैल में विदेशी निवेशकों ने एक अरब डॉलर के भारतीय शेयरों को बेच दिया था.
वहीं मई में विदेशी निवेशकों ने 4.2 अरब डॉलर के शेयर को बेच दिया था. हालांकि ये तक़रीबन 900 अरब डॉलर के उन भारतीय शयरों का एक छोटा सा हिस्सा है जो विदेशी निवेशकों के पास है.
हालांकि इसने ये संकेत दिया कि भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशियों की हिस्सेदारी सिर्फ़ 18 फ़ीसदी बची है और ये कई सालों में सबसे कम है.
पत्रिका में प्रकाशित लेख में बताया गया था कि विदेशी निवेशकों के निकलने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था उफान पर है, वो बेहतर रिटर्न का वादा करती है और उसका क़र्ज़ कम हुआ है, इसका मतलब है कि वो कम जोखिम के साथ अधिक मुनाफ़ा दे रही है.
इस लेख में आगे है, "भारत विदेशी निवेशक के साथ किस तरह से व्यवहार करता है उसका सीधा जवाब यह है कि भारत में विदेशी पूंजी का सीधा निवेश नहीं होता रहा है क्योंकि यहां पर पूंजीगत लाभ और लाभांश पर टैक्स हैं. हालांकि अगर ये कंपनियां भारत में रजिस्टर्ड होती हैं तो इन्हें टैक्स में छूट दी जा सकती है या न्यूनतम टैक्स के दायरे में शामिल किया जा सकता है."
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