तार-तार लोक लेखा
लोक लेखा समिति की रिपोर्ट पर सरकार और विपक्ष के बीच हो रही तीखी नोक-झोंक ने संसदीय मूल्यों को एक बार फिर तार-तार करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है.
यह पहला मौक़ा नहीं है जब लोक लेखा समिति ने सरकार को आड़े हाथों लिया हो, लेकिन इससे पहले कभी भी मतदान करा कर पूरी रिपोर्ट को ख़ारिज कर नया अध्यक्ष चुनने की न तो कोई कोशिश हुई है और न इसकी कभी नौबत आई है.
बूटा सिंह जब लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे तो उन्होंने भी ताबूत घोटाले में सरकार के ख़िलाफ़ इतनी ही डैमेजिंग रिपोर्ट पेश की थी. समिति के बहुत से सदस्य उस रिपोर्ट के मसौदे से सहमत नहीं थे.
उन्होंने अपनी असहमति ज़रूर दर्ज कराई थी लेकिन अध्यक्ष को पद से हटाने की मुहिम की नौबत नहीं आई थी. मज़े की बात यह है कि जब टू जी घोटाले की संसदीय समिति से जाँच कराने की माँग उठी थी तो सरकार की तरफ़ से कहा गया था कि इस घोटाले की जाँच लोक लेखा समिति द्वारा होनी चाहिए. यहाँ तक कि प्रधानमंत्री तक इस समिति के सामने पेश होने के लिए तैयार थे.
लोक लेखा समिति के तथाकथित मत विभाजन की तरफ़ ध्यान दिया जाए तो विचारधारा के स्तर पर हमेशा एक दूसरे का विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी एक ही मंच पर हैं जबकि उत्तर प्रदेश मे एक दूसरे की धुर विरोधी समझे जाने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस मुद्दे पर काँग्रेस के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं.
यह दोनों पार्टियाँ राज्य स्तर पर काँग्रेस को अपना विरोधी मानती हैं लेकिन केंद्र में उनके सहयोगी दलों की तरह काम कर रही हैं.समाजवादी पार्टी जिसके 22 सांसद हैं अपने आपको नौ सांसदों वाली एनसीपी से कम बेहतर राजनीतिक स्थिति में पा रही है और इसी लिए कांग्रेस से क़रीबी राजनीतिक समझ बनाने के लिए बेताब है.
इसको राजनीतिक अवसरवादिता नहीं तो और क्या कहेंगे कि उन्होंने पीएसी में सरकार के ख़िलाफ़ सबसे मुखर आवाज़ अपने सांसद रेवतीरमण सिंह से कहा कि वह मुरली मनोहर जोशी के ख़िलाफ़ यूपीए की लड़ाई में उनका साथ दें. बहुजन समाज पार्टी के राजनीतिक क़दम हमेशा इस बात पर निर्भर करते हैं कि उनकी नेता मायावती को केंद्र से क्या दरकार है.
सरकार और विपक्ष की लड़ाई मे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को सरकार को मुसीबत से उबारने के कई मौके और मिलेंगे और ज़ाहिर है कहने वाले तो कहेंगे कि हर राजनैतिक समर्थन की कोई न कोई क़ीमत तो होती है.




