कोरोना वायरस: 5 देश जिनकी अर्थव्यवस्था सबसे पहले पटरी पर आ सकती है

कोरोना वायरस

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    • Author, लिंडसे गैलोवे
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

भारत में कोरोनावायरस के मामले

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

वे सोशल डिस्टेंसिंग लागू कर रहे हैं और बाज़ार को स्थिर करने के लिए वित्तीय दखल दे रहे हैं.

आर्थिक स्थिरता के लिए स्वास्थ्य संकट का तत्काल प्रबंधन ज़रूरी है, लेकिन विशेषज्ञों ने इस बात का भी आकलन शुरू कर दिया है कि वायरस को काबू में करने के बाद रिकवरी कैसे होगी और कौन से देश इसमें आगे होंगे.

इसे अच्छी तरह समझने के लिए हमने 2019 का ग्लोबल रेजिलिएंस इंडेक्स देखा. इस सूचकांक को बीमा कंपनी एफ़एम ग्लोबल ने बनाया है.

इसमें राजनीतिक स्थिरता, कॉरपोरेट गवर्नेंस, सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स और पारदर्शिता के आधार पर 130 देशों में कारोबारी माहौल के लचीलेपन को आंका गया है.

हमने वायरस रोकने के शुरुआती प्रयासों को इस रैंकिंग के साथ मिलाकर देखा. फिर उन देशों की पहचान की जो संकट में टिके रहेंगे और जिनके वापसी करने की संभावना अधिक है.

हमने वहां के लोगों और विशेषज्ञों से भी बात की और समझा कि अभी वे किस तरह समन्वय बना रहे हैं और निकट भविष्य में वे क्या देखते हैं.

कोरोना वायरस, डेनमार्क

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डेनमार्क

डेनमार्क सप्लाई चेन ट्रैकिंग और न्यूनतम भ्रष्टाचार की वजह से सूचकांक में दूसरे स्थान पर है. इसने सोशल डिस्टेंसिंग को शुरुआती चरण में ही लागू कर दिया था.

डेनमार्क ने 11 मार्च को स्कूल और ग़ैर-ज़रूरी व्यवसाय बंद किए और 14 मार्च को विदेशियों के लिए अपनी सीमा बंद कर दी थी. तब वहां संक्रमण के गिनती के मामले थे.

डेनमार्क के क़दम प्रभावी रहे. सामान्य फ्लू पिछले साल से 70 फ़ीसदी कम हो गया है.

कोपेनहेगन के पिसअप टूअर्स के मैनेजिंग पार्टनर रैस्मस आरूप क्रिस्टियन्सेन को पहले शंका होती थी. लेकिन अब उनको लगता है कि "सरकार सही काम कर रही है."

इन दिनों डेनमार्क के सोशल मीडिया और पारंपरिक मीडिया में सैमफंडसिंड शब्द की चर्चा है, जिसका मोटे तौर पर अनुवाद है "सिविक सेंस" और "सिविक ड्यूटी".

कोरोना वायरस, डेनमार्क

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ज़्यादातर लोग सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए निजी हितों को पीछे रखना नैतिक ज़िम्मेदारी मानते हैं. "कोई नहीं चाहता कि उसे वरिष्ठ नागरिकों की ज़िंदगी ख़तरे में डालने का ज़िम्मेदार कहा जाए."

इसका यह मतलब नहीं कि चुनौतियां नहीं हैं. आरूप क्रिस्टियन्सेन के परिवहन व्यवसाय में पैसा घट गया है.

वह सरकार के वित्तीय पैकेज की तारीफ़ करते हैं, जिसकी घोषणा 14 मार्च को की गई थी. इसमें कर्मचारियों की तनख्वाह का कुछ हिस्सा कवर किया गया है.

लेकिन उसके नियम अब भी पूरी तरह निर्धारित नहीं किए गए हैं. इससे अनिश्चितता बढ़ी है और नौकरियां जा रही हैं.

फिर भी, दिहाड़ी मज़दूरों की मज़दूरी का 90 फ़ीसदी हिस्सा चुकाने और नौकरीपेशा लोगों की 75 फ़ीसदी तनख्वाह देने जैसे उपाय दूसरे देशों के लिए मॉडल हैं.

ये उपाय सस्ते नहीं हैं. इनकी लागत जीडीपी के 13 फ़ीसदी के बराबर है.

डेनमार्क के लोग मानते हैं कि यह वैश्विक संकट है और उनके देश का आर्थिक भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि बाक़ी दुनिया किस तरह खुले व्यापार को जारी रखती है.

आरूप क्रिस्टियन्सेन कहते हैं, "डेनमार्क कुछ गंभीर नतीजों से बचकर उसका फ़ायदा उठाने में क़ामयाब हो सकता है."

"डेनमार्क का विकसित दवा उद्योग फ़ायदे में हो सकता है, लेकिन अगर दूसरे देशों में संकट की क़ीमत पर ऐसा हो तो इसमें गर्व करने जैसी कोई बात नहीं है."

कोरोना वायरस, सिंगापुर

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सिंगापुर

मज़बूत अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा, न्यूनतम राजनीतिक जोखिम और कम भ्रष्टाचार के कारण सिंगापुर रैंकिंग में ऊपर है. रेजिलिएंस रैंकिंग में इसका स्थान 21वां है.

वायरस रोकने के लिए भी सिंगापुर ने तेज़ी से काम किया और महामारी के ग्राफ को ऊपर नहीं जाने दिया.

डेटा एनालिसिस प्लेटफॉर्म कोनिग्ले के लिए काम करने वाली कॉन्स्टेंस टैन कहती हैं, "हमें सरकार पर भरोसा है. वह वायरस की रोकथाम के हर क़दम पर पारदर्शी है. सरकार अगर कुछ लागू करती है तो हम उसे मानते हैं."

चैनल न्यूज़ एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ जो लोग नियम तोड़ते हैं उनके पासपोर्ट और वर्क पास ले लिए गए हैं.

टैन कहती हैं, "हम मिलकर काम करते हैं और हमें सामाजिक उपद्रव या आर्थिक अस्थिरता के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. लोग सड़कों पर मर नहीं रहे."

एक छोटे देश के रूप में सिंगापुर की वापसी बाक़ी दुनिया के कोविड-19 से उबरने पर टिकी होगी. फिर भी यहां के लोगों को अपने भविष्य की ताक़त पर यक़ीन है.

सिंगापुर के मूल निवासी जस्टिन फोंग कहते हैं, "दूसरी जगहों के लोगों की तरह मैं भी सोचता हूं कि हम अधिक जीवट बनकर निकलेंगे."

"एक बात तो तय है कि इस संकट ने सबको तकनीक अपनाने को विवश किया है, जो सिंगापुर के लोगों के लिए अच्छी बात है."

कोनिग्ले समेत कई व्यवसायों ने वर्क फ्रॉम होम जैसी नीतियां अपनाने में देर नहीं की. सरकार ने वायरस का पता लगाने के लिए ट्रेस टुगेदर ऐप जारी किया है, जिसे कई लोगों ने डाउनलोड किया है.

कोरोना वायरस, न्यू यॉर्क सिटी

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संयुक्त राज्य अमरीका

अमरीका के बड़े भूभाग के आधार पर सूचकांक में उसे पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में बांटा गया है. वे 9वें, 11वें और 22वें नंबर पर हैं.

कुल मिलाकर अमरीका की रैंकिंग बेहतर है क्योंकि व्यवसायों में जोखिम कम है और सप्लाई चेन मज़बूत है.

न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों में वायरस को काबू में करना चुनौतीपूर्ण है. आधे से अधिक प्रांतों में शटडाउन की वजह से बेरोज़गारी दर पहले ही ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई है. रेस्तरां और रिटेल सेक्टर में काम करने वालों पर सबसे ज़्यादा मार पड़ी है.

लेकिन अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए अमरीकी सरकार ने प्रोत्साहन उपायों की घोषणा करने में देर नहीं की. सोशल डिस्टेंसिंग को भी लागू किया गया, जिसके अच्छे नतीजे दिखने लगे हैं.

गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली जैसे वित्तीय संस्थान V-शेप रिकवरी की भविष्यवाणी कर रहे हैं.

सलाहकार फ़र्म मैकिन्से का नज़रिया भी आशावादी है. उसके अनुमान सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और 2 ट्रिलियन डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज के सफल कार्यान्वयन पर निर्भर हैं.

अमरीका दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए अहम है. वैश्विक जीडीपी का चौथाई हिस्सा अमरीका का है. वैश्विक अर्थव्यवस्था कैसे वापसी करती है, यह बहुत हद तक अमरीका पर निर्भर करेगा.

नोट्रे-डेम यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एरिक सिम्स कहते हैं, "अमरीकी अर्थव्यवस्था बड़े झटकों और संभावित दीर्घकालिक बदलावों से उबरने में सक्षम है. श्रम बाज़ार की पाबंदियां हल्की हैं."

"अमरीकी फ़ेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड दूसरे केंद्रीय बैंकों (जैसे ECB और बैंक ऑफ़ जापान) की तुलना में मौद्रिक समायोजन करने की बेहतर स्थिति में हैं."

अमरीकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने वायरस से कम प्रभावित हिस्सों में सामान्य आर्थिक गतिविधियां जारी रखने का प्रस्ताव रखा है.

एकैडमिक थिंक टैंक अमरीकन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक रिसर्च के फ़ेलो पीटर सी अर्ले कहते हैं, "मुझे लगता है कि उन उपायों का लंबे समय तक असर रहेगा. हम चाहते हैं कि पैसे, सामान, सेवाएं, श्रम और विचारों का मुक्त प्रवाह हो. न सिर्फ़ अपने देश में बल्कि पूरी दुनिया में."

अमरीका में केंद्रीकृत स्वास्थ्य सेवा न होने की आलोचना भी हो रही है. भविष्य में इसका ध्यान रखना होगा.

रटगर्स स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट एंड लेबर रिलेशन्स के अर्थशास्त्री और श्रम इतिहासकार माइकल मेरिल को लगता है कि वायरस संकट ख़त्म होने के बाद दुनिया और ताक़तवर होकर उभरेगी.

"अमरीका में भी ऐसा ही होगा. लेकिन यह सब हमारे सबक सीखने पर निर्भर करेगा."

"यदि हम पहले की तरह पेशेवर और परस्पर जुड़े हए समाज में लौटना चाहते हैं तो हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य के नये रूपों में निवेश करना होगा. हमें सामाजिक सुरक्षा और संस्थागत मज़बूती के स्थायी रूपों का निर्माण करना होगा."

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रवांडा

कॉरपोरेट गवर्नेंस में हालिया सुधारों की वजह से रवांडा ने हाल के वर्षों में सूचकांक में लंबी छलांग लगाई है.

35 स्थान उछलकर यह 77वें पायदान पर पहुंच गया है. अफ्रीकी देशों में यह चौथे नंबर पर है.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रवांडा ने 2019 में पड़ोसी देश कांगो से फैले इबोला वायरस पर सफलतापूर्वक नियंत्रण किया था. उसे पता है कि ऐसे संकट से कैसे निकला जाता है.

केंद्रीकृत स्वास्थ्य सेवा, दवाइयों की सप्लाई करने वाले ड्रोन्स और सीमा पर थर्मामीटर जांच शुरू करके रवांडा अपने पड़ोसी देशों के मुक़ाबले इस संकट से उबरने की बेहतर स्थिति में दिख रहा है.

कोरोना वायरस, रवांडा

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मूल रूप से कीनिया की गार्नेट अचिंग किगाली में रहती हैं. वह बाओबाब कंसल्टिंग की डिजिटल कंटेंट क्यूरेटर हैं और अफ्रीकन लीडरशिप यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं.

अचिंग कहती हैं, "मुझ जैसे कई विदेशी छात्र इसी देश में हैं क्योंकि हमें पूरा भरोसा है कि रवांडा की सरकार इस संकट से हमारे अपने देशों की सरकारों से बेहतर तरीक़े से निपटेगी."

"विदेशी अफ्रीकी छात्रों को सिर्फ़ इस बात की चिंता है कि हमारे घरों में हमारे परिवार के लोग उतने सुरक्षित नहीं हैं जितने सुरक्षित हम यहां पर हैं."

रवांडा उप-सहारा अफ्रीका का पहला देश है जिसने संपूर्ण लॉकडाउन किया. वह सबसे कमज़ोर तबकों को घर-घर मुफ्त खाना दे रहा है.

रवांडा अंतरराष्ट्रीय समारोहों और प्रदर्शनियों के लिए लोकप्रिय जगह है. वायरस की वजह से पर्यटन क्षेत्र को तगड़े नुक़सान की आशंका है.

लेकिन अचिंग को उम्मीद है कि रवांडा में वायरस से बहुत कम लोगों की जान जाएगी और यह देश जल्दी उबर जाएगा.

कोरोना वायरस, न्यूजीलैंड

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न्यूज़ीलैंड

मोस्ट रेजिलिएंट इंडेक्स में न्यूज़ीलैंड 12वें नंबर पर है. कॉरपोरेट गवर्नेंस और सप्लाई चेन में इसे अच्छे नंबर मिले हैं.

वायरस को रोकने के लिए इसने तेज़ी से क़दम उठाए. न्यूज़ीलैंड ने 19 मार्च को सीमा बंद कर दी थी और 25 मार्च को ग़ैर-ज़रूरी कारोबार को लॉकडाउन कर दिया था.

ऑकलैंड में रहने वाले अर्थशास्त्री शमुबील ईक़ूब का कहना है कि द्वीप राष्ट्र होने के कारण न्यूज़ीलैंड के लिए सीमा पर नियंत्रण आसान है. इसलिए वहां इसके प्रभाव कारगर लगते हैं.

"अन्य देशों की तुलना में न्यूज़ीलैंड के क़दम बोल्ड और निर्णायक रहे जिनके असर दिखे."

महामारी विज्ञान के विशेषज्ञों को लगता है कि अगर आने वाले हफ्तों में भी उपाय जारी रहे तो न्यूज़ीलैंड उन गिने-चुने देशों में से एक होगा जो "सामान्य" रहेंगे.

पर्यटन और निर्यात न्यूज़ीलैंड की अर्थव्यवस्था के अहम हिस्से हैं इसलिए निकट भविष्य में इसे भी कुछ संघर्ष करना होगा, लेकिन ज़रूरी नहीं कि यह बुरी बात हो.

डुनेडिन में रहने वाले रॉन बुल ओटैगो पोलिटेक्निक के पाठ्यक्रम विकास निदेशक हैं. वह कहते हैं, "वायरस से बचे रहेंगे तो हमारे पास पुनर्संगठित होने का समय होगा."

"हम कैंपिंग और पर्यटन के पर्यावरण पर प्रभाव के बारे में बातें करना शुरू कर चुके हैं. इससे हमें सोचने का मौक़ा मिला है कि टूरिस्ट डॉलर के बदले हम क्या दे रहे हैं."

कुल मिलाकर, न्यूज़ीलैंड स्थायी रिकवरी के लिए तैयार है. सरकार पर क़र्ज़ का बोझ कम है और यह ब्याज़ दरों को न्यूनतम स्तर पर रखने में सक्षम है.

ईक़ूब कहते हैं, "महामारी के असर को कम करने और रिकवरी की रफ़्तार बढ़ाने में हमारे सामने अड़चनें कम हैं."

"सबसे महत्वपूर्ण यह है कि न्यूज़ीलैंड एक उच्च-भरोसे वाला देश बना हुआ है. यह सदियों के सबसे बड़े स्वास्थ्य और आर्थिक संकट से उबरने में नींव का मज़बूत पत्थर साबित होगा."

बुल भी मानते हैं कि उनके देश के मज़बूत होकर निकलने की संभावना है. "हम एक बड़े परिवार की तरह हैं. हम सबको बैठकर तय करना होगा कि हम क्या चाहते हैं."

"हमें कुछ फ़ैसले करने होंगे जो हमें मज़बूत और अच्छा बनाए."कोविड-19 वैश्विक महामारी ने अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है. दुनिया भर के देश वायरस संक्रमण से जूझ रहे हैं.

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