मिलिए ऐसे शेफ़ से जो इंसान नहीं रोबोट है

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- Author, डेविड हैम्लिंग
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
आपके सामने एक बड़े से किचन की तस्वीर शब्दों से गढ़ते हैं. यहां बर्गर बनाने का काम चल रहा है.
एक कोने में शांति से टमाटर, पनीर, चिकन और प्याज़ के एक बराबर स्लाइस काटे जा रहे हैं. दूसरे कोने में कटे हुए मांस की टिक्कियों को भूना जा रहा है. वहीं, एक और कोने में बर्गर के लिए ब्रेड को गोलाकार काटा जा रहा है. फिर इन सभी सामानों को सलीक़े से एक के ऊपर एक परत जमाकर रखा जा रहा है.
इस तैयार बर्गर के ऊपर ग्राहक की मांग के मुताबिक़, मसाले छिड़कर कर फिर इसे कड़क या हल्का सेंका जा रहा है.
पूरे काम के दौरान, चूं तक की आवाज़ नहीं आ रही है. शेफ़ साहब न चीख रहे हैं, न पुकार लगा रहे हैं. और, बिल्कुल ग्राहक की डिमांड के हिसाब से तैयार बर्गर उसकी मेज तक पहुंच रहा है.
ये हैं इक्कीसवीं सदी के शेफ़, जो हो-हल्ला नहीं करते. सामान नहीं पटकते. और एक घंटे में एक दो या चार नहीं, 120 बर्गर बनाते हैं.
इन शेफ़ का नाम है, क्रिएटर.
क्रिएटर कोई इंसान नहीं, एक रोबोट है. और ये रोबोट ख़ुद थर्मल सेंसर से चलने वाली मशीन से नियंत्रित होता है. ताकि, मांस की टिकिया बिल्कुल सटीक तरीक़े से पके, न जले, न कच्ची रह जाए.

मशीन से तैयार बर्गर
इस शेफ़ में 350 सेंसर लगे हैं और ये 20 कंप्यूटरों की मदद से चलता है. इस आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस मशीन में इतना डेटा भरा गया है कि वो बर्गर को हर ग्राहक की पसंद के हिसाब से तैयार करता है.
न चीज़ ज़्यादा होता है, न प्याज़ जलता है. कितना सॉस और कितना जैम पड़ेगा, इसके आंकड़ों की भी इस में भरमार है. किसी को मेक्सिकन बर्गर चाहिए, तो वो भी मिलेगा और कोई वड़ा पाव वाला चाहे, तो वो भी क्रिएटर साहब तैयार कर देंगे.
और मशीन से तैयार इस बर्गर की क़ीमत भी आम बर्गर जैसी ही है. केवल 6 डॉलर.
क्रिएटर तैयार करने वाले कंप्यूटर इंजीनियर एलेक्स वर्डाकोस्टास कहते हैं, "रोबोट की मदद से हम काम को और बेहतर ढंग से कर पाते हैं. तेज़ी से और सटीक अंदाज़ में निपटा पाते हैं. हम मशीन के सीखने की क्षमता का इस्तेमाल कर के बिल्कुल ग्राहक की डिमांड वाली चीज़ें तैयार कर सकते हैं."
क्रिएटर का बनाया बर्गर खाने वाले इसे ताज़ा, स्वादिष्ट और एकदम सही पका हुआ कहते हैं. इससे बर्गर बनवाने का फ़ायदा है बड़ी तेज़ी से ढेर सारे बर्गर एक साथ तैयार हो सकते हैं.
यानी फास्ट फूड अब और भी फास्ट हो गया है. ये मशीन पांच मिनट में एक बर्गर तैयार कर देती है और एक साथ कई बर्गर तैयार करती है. यानी हर तीस सेकेंड में एक बर्गर बनता है.

शेफ़ रोबोट
अमरीका के बोस्टन शहर में भी स्पाइस नाम के रोबोट की मदद से कटोरा भर खाना दिया जाता है. इसमें अनाज होते हैं, जिन्हें सब्ज़ियों के साथ पकाकर परोसा जाता है. एक कटोरा खाना केवल तीन मिनट में तैयार हो जाता है. ये राजमा-चावल, कढ़ी-चावल या दाल-चावल परोसने जैसा ही है.
शेफ़ रोबोट की मदद से लागत कम हो जाती है. तेज़ी से ज़्यादा लोगों का पेट भरा जा सकता है.
चीन में तो पुरानी और गुम होती जा रही रेसिपी भी रोबोट की मदद से बनाई जा रही हैं. चीन के कारोबारी ली झिमनिंग परंपरागत हुनानी खाना, रोबोट की मदद से बनाते हैं. इनमें ताज़ा चीज़ें इस्तेमाल होती हैं.
मसाले और नमक-तेल बिल्कुल नाप-तोल कर पड़ता है. और बड़ी तेज़ी से परंपरागत डिश तैयार कर दी जाती है. न आंच ज़्यादा होने का डर, न खाना कच्चा रह जाने की फिक्र. ली के किचन में 3 रोबोट और उनके दो इंसानी सहायक हैं.

ज़ुमे पिज़्ज़ा
रोबोट की मदद से चलने वाले रेस्टोरेंट में एक नयापन तो है ही, इससे मालिकों की लागत भी कम हो जाती है.
कैलिफ़ोर्निया का ज़ुमे पिज़्ज़ा, तो अपनी वैन में ही रोबोट की मदद से ताज़ा से ताज़ा पिज़्ज़ा तैयार कर के लोगों के घर-घर तक पहुंचाता है.
ज़ुमे के वैन किचन में कई तरह के रोबोट काम करते हैं. कोई आटा गूंधता है, तो कोई बेस तैयार करता है. किसी का काम मसाले और सॉस लगाने का है, तो कोई सब्ज़ियां और मीट लगाता है. और ग्राहक की डिमांड के हिसाब से एकदम सही आंच पर पके हुए पिज़्ज़ा घर-घर पहुंचाए जाते हैं. ग्राहकों की पसंद के आधार पर ये रोबोट ये भी बता देते हैं कि किसी दिन पिज़्ज़ा बनाने के लिए कितने सामान की ज़रूरत होगी. वो गाड़ी को सही रूट पर भी चला लेते हैं.
अपने वैन रोबोट की कामयाबी के बाद ज़ुमे अब इसका लाइसेंस बांटने की तैयारी में है. ज़ुमे की प्रतिद्वंदी लिटिल सीज़र कंपनी ने भी पिज़्ज़ा बनाने वाले रोबोट का पेटेंट कराया है.

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इंसानी नौकरियों पर ख़तरा
फास्ट फूड कंपनियों के रोबोट इस्तेमाल करने से लोगों की नौकरियों पर ख़तरा मंडरा रहा है. फास्ट फूड इंडस्ट्री में काम करने वाले स्टीव न्यूटन कहते हैं, "ऑटोमेशन से खाना तैयार करने में भी आसानी होगी और रेस्टोरेंट की सर्विस भी बेहतर होगी. कामयाब कारोबारी, मशीन लगाकर लोगों की छंटनी नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें ग्राहकों को बेहतर सेवा देने में इस्तेमाल करेंगे."
आप रोबोट की मदद से चलने वाले रेस्टोरेंट में जाकर टचस्क्रीन पर ऑर्डर देंगे और रोबो शेफ का बनाया हुआ खाना कुछ ही मिनटों में आप की मेज़ पर होगा.
इससे, अमरीका के फास्टफूड उद्योग में क्रांति आ सकती है. इस वक़्त अमरीका मे 38 लाख से ज़्यादा लोग फास्ट फूड इंडस्ट्री में नौकरी करते हैं. लेकिन, दिक़्क़त ये है कि वो बार-बार खाना पकाने का बोरिंग काम करते हैं. रोबोट उनकी ये ज़िम्मेदारी ले लेगा, तो ये लोग ग्राहकों से बात कर के उन्हें बेहतर सेवाएं दे सकेंगे.
लेकिन, सब लोग इस तर्क से इत्तेफ़ाक नहीं रखते. तकनीक के कारोबारी रिसर्ड स्केलेट पूछते हैं कि रोबोट कौन से रोज़गार पैदा कर रहे हैं?
रिचर्ड कहते हैं कि तकनीक का इस्तेमाल इंसानों की मदद के लिए होना चाहिए. उनकी जगह छीनने के लिए नहीं.
हालांकि ज़ुमे जैसी कंपनियों का दावा यही है कि वो ग्राहकों को बेहतर सेवाएं दे रही हैं. उनके पिज़्ज़ा को लोग ख़ूब पसंद कर रहे हैं.
एलेक्स भी मानते हैं कि रोबोट अगर किचन संभाल रहे हैं, तो कंपनियों को चाहिए कि वो अपने कामगारों को ग्राहकों को ख़ुश करने में लगाएं, न कि नौकरी से चलता कर दें.
रसोई में घुसे रोबोट शेफ़
ब्रिटिश कंपनी मोले रोबोटिक्स तो एक क़दम और भी आगे निकल गई है. उसने ऐसे रोबोट बनाने शुरू किए हैं, जो घरों में खाना बना सकेगा. इन रोबोट के अंदर इंसान के काम करने के तरीक़ों से जुड़े आंकड़े फीड किए जाते हैं. फिर वो अपने आप काम करते हैं.
हो सकता है कि जल्द ही, रोबोट नए व्यंजन के नुस्खे भी बताने लगें. अमरीका के मशहूर मैसाचुसेटस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ऐसे ही रोबोट का टेस्ट चल रहा है, जो पिज़्ज़ा में तरह-तरह के प्रयोग से नए स्वाद विकसित कर सके.
रसोई, इंसानी समाज की पहली प्रयोगशाला रही है, जिस में स्वाद के नित नए प्रयोग होते हैं. अब देखना ये होगा कि रोबोट इसमे क्या कमाल दिखाते हैं. वो एक जैसे स्वाद वाला खाना, बार-बार बनाकर हमें बोर करेंगे, या फिर कुछ नए व्यंजन बनाकर हमें चौंकाएंगे.
अगर, रोबोट शेफ होशियार साबित हुए, तो आने वाले वक़्त में आप सिर्फ़ शौक़ के लिए खाना बनाने किचन में जाया करेंगे.
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