बोर होना एक अच्छी बात क्यों है?

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- Author, डेविड रॉबसन
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
भले ही अब तक आपको कोई दिमाग़ी बीमारी न हुई हो, मगर रोज़मर्रा का तनाव इस क़दर है कि ये आप से आपकी सुकून और ख़ुशी छीन सकता है.
ऐसे तमाम प्रयोग हुए हैं, जो ये कहते हैं कि आप कुछ क़दम उठा कर ऐसी मुश्किल से निकल सकते हैं. इसे वैज्ञानिक भाषा में 'पॉज़िटिव साइकोलॉजी' कहते हैं. पिछले 20 साल से इस पर रिसर्च हो रही है. मनोवैज्ञानिक ऐसे तमाम आसान नुस्खे बताते हैं जो आप का मूड बेहतर कर सकते हैं.
बड़ा सवाल ये है कि हम अपनी मसरूफ़ ज़िंदगी में से इतना वक़्त कैसे निकालें कि ख़ुद को ख़ुश करने वाले ये नुस्खे आज़मा सकें?
सैंडी मैन ब्रिटेन की सेंट्रल लंकाशर यूनिवर्सिटी में लेक्चरर हैं. वो इस मुश्किल का एक हल सुझाती हैं.
मनोचिकित्सक के तौर पर अपने तजुर्बे के आधार पर सैंडी कुछ तरीक़े बताती हैं, जो आप के काम आ सकते हैं.
खुद को खुश रखने के लिए दें ये जवाब
अपनी क़िताब 'टेन मिनट्स टू हैपीनेस' में सैंडी ने इस नुस्खे को रोज़मर्रा की क़िताब के तौर पर पेश किया है. उन्होंने इस पर अमल को छह भागों में बांटा है. यानी रोज़ छह सवालों के जवाब आप को लिखने होंगे.

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1. कौन सा अनुभव, भले ही वो बहुत आम सा क्यों न हो, आप को लुत्फ़ देता है?
2. आप ने अपने काम के लिए कौन सी तारीफ़ और क्या फीडबैक पाया है?
3. वो कौन से ऐसे लम्हे थे, जिन्हें आप विशुद्ध रूप से अच्छी क़िस्मत मानते हैं?
4. आपकी नज़र में आप की कौन सी उपलब्धियां रही हैं, भले ही वो कितनी भी छोटी क्यों न रही हों?
5. ऐसी कौन सी बात थी जिससे आप ने एहसानमंद महसूस किया हो?
6. आपने नेकी का इज़हार किस तरह से किया?
सैंडी के तैयार किए गए इस कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा वैज्ञानिक रिसर्च पर आधारित है. इससे ये संकेत मिलता है कि रोज़मर्रा की भागदौड़ से थोड़ा सा वक़्त निकाल कर अपने दिन का हिसाब-किताब इस तरह से लगाएं, तो आप तनाव से ख़ुशी की दिशा में क़दम बढ़ा सकते हैं.


नकारात्मकता से दूर हटें
जब हम कमज़ोर या बुरा महसूस कर रहे होते हैं, तो अच्छे अनुभवों की अनदेखी हो जाती है. लेकिन, इन सवालों के जवाब तलाश कर के हम अपना ध्यान नेगेटिव बातों से हटा सकते हैं.

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सैंडी आगाह करती हैं कि आप को इन सवालों के जवाब लिखते ही बेहतर नहीं महसूस होने लगेगा. लेकिन, इन्हें दोबारा से पढ़ेंगे, तो आप को आगे चल कर मुश्किल दौर का सामना करने में सहूलत होगी.
किसी बुरी घटना के बाद आप का मूड ख़राब होगा, तो आप इन अच्छी यादों पर दोबारा नज़र डाल कर ये महसूस करेंगे कि ज़िंदगी इतनी भी बुरी नहीं.
इस नुस्खे का छठा सवाल नेकी या मेहरबानी के हालिया रिसर्च पर आधारित है. बहुत से तजुर्बों से साबित हुआ है कि किसी की मदद करना या नेकी का कोई काम करना आपकी बेहतरी में मददगार तो होता ही है, आप के मूड को भी बेहतर करता है.
थोड़े पैसों से किसी अजनबी की मदद कर के आप ज़्यादा ख़ुशी हासिल कर सकते हैं. इसी पैसे को अपने ऊपर ख़र्च कर के आप उतने ख़ुश नहीं होंगे. ये रिसर्च कम से कम 130 देशों में सही साबित हो चुकी है.
जब आप मुश्किल वक़्त में ऐसे किसी काम को याद करेंगे, तो मूड बेहतर होगा. आप फिर से कुछ अच्छा, किसी का भला करने के लिए ख़ुद को प्रेरित महसूस करेंगे.
काम की समीक्षा करने का फायदा
दिन भर के काम की 10 मिनट में समीक्षा करने से कोई जादू तो नहीं होगा. मगर, सैंडी कहती हैं कि अगर किसी को ये शक है कि वो डिप्रेशन में जा सकता है, तो उसे अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए. लेकिन, जो लोग आम तौर पर हारा हुआ महसूस करते हैं. तनाव में रहते हैं. जिन में डिप्रेशन के लक्षण नहीं दिखते, उन्हें ये नुस्खा काफ़ी मदद कर सकता है.

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सैंडी ने एक और नुस्खा सुझाया है. जो लोग अक्सर बोर होने की शिकायत करते रहते हैं. ये नुस्खा उनके लिए है. सैंडी कहती हैं कि बोर होने के भी फ़ायदे हैं. अगर आप ख़ाली हैं, तो आप का ज़हन स्वच्छंद विचरण करता है. इस दौरान कई क्रिएटिव आइडिया भी आप के दिमाग़ को सूझ सकते हैं. तो, अगर जीवन में नीरसता के कुछ पल हैं, तो, उनका बुरा न मानिए. उस दौरान दिमाग़ को खुला छोड़ दीजिए, न कि मोबाइल या कंप्यूटर पर वक़्त बर्बाद करें. कुछ बोरिंग काम जैसे, तारे गिनना या फिर फ़ोनबुक से नंबर रटना भी आप के ज़हन को धार दे सकते हैं. दिन में ख़्वाब देखना भी ज़हन की बेहतरी के लिए अच्छा माना जाता है.
सैंडी सलाह देती हैं कि, 'अगर आप किसी मुश्किल का हल नहीं खोज पा रहे हैं, तो थोड़ा वक़्त किसी बोरिंग काम में लगाएं. इसी दौरान हो सकता है कि आप को अपनी मुश्किल का हल भी मिल जाए. आज के दौर में ये बात और भी मुफ़ीद हो सकती है, क्योंकि हम बहुत सारा समय सोशल मीडिया पर गुज़ारते हैं.'
वक़्त के साथ-साथ आप की सहनशीलता बढ़ती जाती है. पहले के मुक़ाबले आप तुरंत नहीं खीझते. आप शांत रह कर अपनी चुनौती पर फिर से गौर करते हैं.
सैंडी कहती हैं कि, 'जीवन में नीरसता का सामना करने के लिए आप को ढेर सारी बोरियत की ज़रूरत पड़ती है.'
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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