1920 की 'लेडी गागा' की अनूठी ज़िंदगी की कहानी

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- Author, फ़ियोना मैक्डोनल्ड
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
लेडी गागा अमरीका की मशहूर गायिका हैं. वो गाने के साथ-साथ अपने अजीबो-ग़रीब पहनावे और लुक के लिए भी दुनिया भर में मशहूर हैं. लेडी गागा अक्सर ऐसे लिबास या रंग-रूप में सामने आती हैं, जो लोगों को चौंकाता है. जिसे कई बार ऊटपटांग कहा जाता है.
आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि उन्नीसवीं सदी में यूरोप में एक ऐसी महिला थी, जो आज की लेडी गागा जैसे रहन-शहर के लिए मशहूर या यूं कहें कि बदनाम थी.
लेडी गागा इतालवी मूल की अमरीकी गायिका हैं और उन्नीसवीं सदी की लेडी गागा यानी लुईसा कसाटी भी इटली की रहने वाली थीं.
वो अपनी सनक भरी आदतों के लिए मशहूर थीं. उनका पूरा नाम लुईसा मारकेसा कसाटी स्टाम्पा डि सोनसिनो था. पूरे यूरोप में लुईसा कसाटी के क़िस्से मशहूर थे. अजीबो-ग़रीब पोशाक पहनना, दुनिया से अलहदा शौक़ पालना, लुईसा कसाटी की पहचान थी.
लुईसा कसाटी, इटली के मिलान शहर में पैदा हुई थीं. उनके पिता इटली के राजा के दरबारी थे. जिसकी वजह से उनके पास बेशुमार दौलत थी. एक दौर में लुईसा कसाटी, इटली की सबसे अमीर महिला के तौर पर मशहूर थीं.

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अनोखा अंदाज़
लुईसा कसाटी की महफ़िलें, अक्सर ढेर सारी सुर्खियां बटोरती थीं. वो अपने साथ चीते लेकर चलती थीं तो कभी गले में सांपों का हार डालकर पार्टियों में पहुंच जाती थीं. रात के वक़्त वो अक्सर सिर्फ़ एक फ़र का कोट डालकर टहलने निकल जाती थीं.
कई बार, लुईसा ने ऐसे अजीबो-ग़रीब कपड़े पहने कि देखने वालों के ही नहीं, अपने भी होश उड़ गए. दरअसल एक बार लुईसा कसाटी ने बिजली के बल्ब वाला लिबास पहना था. ये वाक़िया पेरिस की एक बेहद एक्सक्लूज़िव पार्टी का था.
इस लिबास को पहनकर जब लुईसा अंदर घुसने की कोशिश कर रही थीं, तो वो दरवाज़े से टकरा गई. बिजली के तारों वाली उनकी पोशाक से ख़ुद उन्हें ऐसा झटका लगा कि वो बेहोश हो गईं. उनके कुछ बाल भी जल गए.
वो कला की बहुत बड़ी शैदाई और संरक्षक थीं. मशहूर कलाकार पाब्लो पिकासो ने लुईसा को अपनी कई पेंटिंग का किरदार बनाया. अपने दौर के कई और कलाकारों के लिए भी लुईसा कसाटी ने काम किया था.

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वो सांप-चीते, कुत्ते जैसे जानवर पालती थीं. लुईसा की हर पोशाक ज़माने से जुदा हुआ करती थी. कई बार वो पार्टियों में अपने आदमकद बुत के साथ बैठती थीं. पार्टी के दौरान बत्तियां बुझाने पर मेहमानों को समझ में ही नहीं आता था कि किस कुर्सी पर बुत है और किस पर असल लुईसा कसाटी विराजमान हैं.
लुईसा पर हॉलीवुड में कई फ़िल्में भी बनी थीं. अमरीकी पत्रिका द न्यूयॉर्कर में उनके बारे में छपा था कि वो बहुत लंबी महिला थीं. उनका सिर तलवार की तरह था, चेहरा जंगली जानवर जैसा था और आंखें चमकीली थीं. वो अपनी पुतलियों पर भी लेप लगाया करती थीं. पलकों को हद से ज़्यादा काला रखती थीं. उनका चेहरा हमेशा मेकअप से पुता रहता था. वो पाउडर से अपना चेहरा झक सफ़ेद कर लिया करती थीं.
उस दौर के कुछ लोग उन्हें वैम्पायर या जन्नत की चिड़िया से लेकर देवी, सनकी और चुड़ैल तक बहुत कुछ कहा करते थे.

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ख़ुद को आर्ट मानती थीं
हाल ही में ब्रिटिश लेखिका जूडिथ मैक्रेल ने लुईसा कसाटी की ज़िंदगी पर क़िताब लिखी है, इसका नाम है-द अनफिनिश्ड पलाज़ो. जिसमें लुईसा की ज़िंदगी के कई पहलुओं पर रौशनी डाली गई है.
जूडिथ ने लिखा है कि अजीबो-ग़रीब लिबास की वजह से सनकी कही जाने वाली लुईसा कसाटी को केंद्र में रखकर बहुत से कलाकारों ने पेंटिंग्स बनाई थीं. इनमें फिलिपो टोमासो, गिनोवान्नी बोल्डिनी जैसे मशहूर पेंटर शामिल थे. इन पेंटिंग्स के चर्चे भी ख़ूब हुए थे.
जूडिथ कहती हैं कि लुईसा कसाटी सिर्फ़ चर्चा के केंद्र में रहना चाहती थीं. वो किसी कला का हिस्सा नहीं, बल्कि ख़ुद को ही आर्ट मानती थीं. इसीलिए वो अपने पहनावे और शौक़ में इतने तरह के तजुर्बे किया करती थीं. शोहरत उनके लिए ऑक्सिजन जैसी थी. वो हमेशा लोगों से घिरी रहना चाहती थीं. वो कला को संरक्षण देने वाली महिला के तौर पर नाम कमाना चाहती थीं.

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जूडिथ लिखती है कि वो आत्माओं से बात करने का दावा किया करती थीं. वो अपने बारे में तमाम तरह की अफ़वाहें फैलने का भी लुत्फ़ लिया करती थीं. जैसे कि वेनिस शहर में रात के वक़्त लुईसा नंगी ही सैर के लिए निकल जाती थीं. ज़्यादा ठंड होने पर वो एक फर का कोट डाल लिया करती थीं.
ग़रीबी में कटे आखिरी दिन
लेकिन आख़िरी दौर में लुईसा कसाटी की शाहख़र्ची उन पर भारी पड़ी. तीस के दशक की महामंदी में वो बेहद ग़रीब हो गई थीं. लुईसा कसाटी के आख़िरी दिन लंदन में एक कमरे के फ्लैट में गुज़रे. 1957 में उनकी मौत 76 साल की उम्र में हुई थी.
लुईसा कसाटी पर हॉलीवुड में कई फ़िल्में बनीं. जिसमें उसका किरदार विवियन ले और इनग्रिड बर्गमैन ने निभाया था. बहुत से फ़ैशन डिज़ाइनर जैसे जॉन गैलियानो, अलेक्ज़ेंडर मैक्क्वीन और ड्राइस वान नोटेन ने लुईसा कसाटी के पहनावे से प्रेरणा ली.

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जूडिथ मैक्करेल कहती हैं कि ऐसे सनकी लोग ये सोचते हैं कि वो एक अलग ज़िंदगी जी रहे हैं. लेकिन वो अपनी सनक भरी आदतों के साथ बर्बादी की तरफ़ बढ़ रहे होते हैं. और दुनिया को ऐसे लोगों में बहुत दिलचस्पी होती है. यही वजह है कि मरने के साठ साल बाद भी लुईसा कसाटी यूरोप के बहुत से लोगों की याद में ज़िंदा हैं.
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