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हम ऑफ़िस से ज़रूरी छुट्टियां क्यों नहीं ले पाते हैं?
- Author, माया यांग
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
साल 2014 में सोशल मीडिया मैनेजमेंट कंपनी बफ़र के टॉप मैनेजमेंट ने कुछ अजीब महसूस किया.
कंपनी ने 2012 में असीमित छुट्टियों की नीति लागू की थी, लेकिन कर्मचारी शायद ही कोई छुट्टी ले रहे थे.
बफ़र के कर्मचारी दुनिया भर में फैले हुए हैं, मुख्य रूप से अमरीका और यूरोप में. उनको छुट्टी लेने के लिए प्रेरित करने की ख़ातिर कंपनी ने एक नई नीति बनाई.
हर कर्मचारी के लिए एक हज़ार डॉलर का सालाना छुट्टी बोनस और पार्टनर या परिवार के हर सदस्य के लिए 500 डॉलर का अतिरिक्त बोनस शुरू किया गया.
ये योजना बहुत सफल रही. वास्तव में ये इतनी कामयाब रही कि कंपनी को बहुत अधिक पैसे ख़र्च करने पड़े. बफ़र ने जून 2016 में इसे बंद कर दिया.
उसी साल बफ़र ने दूसरी नीति बनाई. असीमित छुट्टियों के बदले इसने कर्मचारियों को साल में कम से कम 15 छुट्टियां लेने के लिए प्रोत्साहित करने का फ़ैसला किया.
कम से कम 15 दिन की छुट्टी
ऑनलाइन प्लानर का इस्तेमाल करके कर्मचारी अपनी छुट्टी के लिए आवेदन कर सकते हैं और एचआर के लोग एक सामूहिक कैलेंडर के ज़रिए देखते हैं कि लोग कितने दिनों की छुट्टियां ले रहे हैं.
बफ़र की न्यूनतम अवकाश नीति तकनीकी कंपनियों में आम नहीं है.
स्टार्ट-अप्स और आईटी कंपनियों में असीमित छुट्टियों की नीति चलती हैं, लेकिन ये छुट्टियां कुछ भी हों, असीमित नहीं होतीं.
कर्मचारी अक्सर काम, मैनेजर और कंपनी संस्कृति के बोझ तले दबे रहते हैं और उचित मात्रा में छुट्टी नहीं ले पाते.
क्या कम से कम एक निश्चित संख्या में छुट्टियां लेने के लिए उन पर ज़ोर देना उनको बर्नआउट से बचाने का बेहतर तरीक़ा हो सकता है?
कितना काम करना सही?
अमरीका एकमात्र ऐसा विकसित देश है जहां कर्मचारियों को वेतन के साथ छुट्टियों पर भेजने के बारे में कोई संघीय क़ानून नहीं है.
क़रीब 77 फ़ीसदी अमरीकी नियोक्ता कर्मचारियों को भुगतान के साथ छुट्टियों पर भेजने की पेशकश करते हैं, लेकिन इसके बदले दी जाने वाली राशि अलग-अलग होती है.
कुल मिलाकर अमरीकी कर्मचारी कई अन्य विकसित देशों के मुक़ाबले कम छुट्टियां लेते हैं.
2014 में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने पाया कि अमरीकी श्रमिक साल में लगभग 1,789 घंटे काम करते हैं. अमरीका इस मामले में 16वें स्थान पर है.
मेक्सिको 2,228 घंटे के साथ पहले स्थान पर और जर्मनी 1,366 घंटे के साथ आख़िरी स्थान पर हैं.
अमरीका के उलट, यूरोपीय संघ के हर सदस्य देश के लिए अनिवार्य है कि वे कर्मचारियों को वेतन के साथ सालाना कम से कम चार हफ़्ते की छुट्टी का क़ानून बनाएं.
ऑस्ट्रिया इस मामले में सबसे आगे है. उसने अपने यहां 35 दिनों की सवैतनिक छुट्टी का क़ानून बनाया है.
इसी तरह, न्यूज़ीलैंड में नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को कम से कम 4 हफ़्ते वेतन के साथ छुट्टी देना ज़रूरी है. इनमें सार्वजनिक अवकाश या बीमारी के लिए छुट्टी शामिल नहीं हैं.
भ्रम से बचना ज़रूरी
बफ़र में, न्यूनतम अवकाश नीति को लागू करने के पीछे एक भ्रम था. कर्मचारियों की समझ में नहीं आ रहा था कि वे कितनी छुट्टियां ले सकते हैं. इसकी वजह शायद यह थी कि इसका कोई सामान्य पैमाना नहीं था.
बफ़र की जनसंपर्क प्रमुख हेली ग्रिफ़िस कहती हैं, "लोगों को पता नहीं होता कि अन्य लोग कितनी छुट्टियां ले रहे हैं."
"हम नहीं चाहते कि लोग बर्नआउट के शिकार हो जाएं. हम चाहते हैं कि कर्मचारियों की जीवनशैली संतुलित रहे."
इस भ्रम से बचाव का प्रयास उन सभी कंपनियों ने किया है जिन्होंने असीमित अवकाश छोड़कर न्यूनतम अवकाश की नीति अपनाई है.
सैन फ्रांसिस्को की रिमोट एनालिटिक्स एंड फोरकास्ट कंपनी बेयरमेट्रिक्स के सीईओ जोश पिगफ़ोर्ड ने असीमित अवकाश की नीति ख़त्म कर दी क्योंकि लोग उसकी सीमाएं नहीं जानते थे.
पिगफ़ोर्ड कहते हैं, "हक़ीक़त यह है कि उसकी सीमाएं हैं, जैसे आप पूरे साल छुट्टी नहीं ले सकते."
पिगफ़ोर्ड ने यह भी देखा कि लोग छुट्टी नहीं लेते या छुट्टी लेने वाले अन्य लोगों के प्रति कुछ दुश्मनी पाल लेते हैं.
अब उन्होंने हर कर्मचारी के लिए साल में कम से कम चार हफ़्ते की छुट्टी लेनी ज़रूरी कर दी है, जिसमें कम से कम एक छुट्टी एक हफ़्ते या उससे लंबी होगी.
बेयरमेट्रिक्स एक सार्वजनिक स्प्रेडशीट के ज़रिये छुट्टी को ट्रैक करता है, जिससे पता चलता रहता है कि कौन-सा कर्मचारी ज़रूरी छुट्टियां ले रहा है.
फ़्लोरिडा की जॉब-सर्च कंपनी ऑथेंटिक जॉब्स में कर्मचारियों को चिंता रहती थी कि बहुत ज्यादा छुट्टियां लेने से उनके सहकर्मियों को समस्या होने लगेगी.
कंपनी के संस्थापक और पूर्व सीईओ कैमरन मोल कहते हैं, "आप हमेशा संदेह करते हैं. क्या मुझे यह छुट्टी लेनी चाहिए क्योंकि मेरे सहकर्मी ने इतनी छुट्टियां नहीं ली हैं."
जब इस कंपनी ने न्यूनतम छुट्टियां तय कर दीं तो नई नीति का असर तुरंत ही दिखने लगा.
मोल का कहना है कि कर्मचारियों को "तुरंत ज़हनी सुकून" मिला और वे छुट्टी के समय के बारे में अलग तरह से सोचने लगे.
मैनेजर का कौशल
जितनी मर्ज़ी उतनी छुट्टियां लो वाले मॉडल के समर्थकों का कहना है कि यह मॉडल स्टाफ़ का भरोसा बढ़ाता है और काम और ज़िंदगी के बीच संतुलन को महत्व देता है.
सैन फ्रांसिस्को की कंपनी इक्विविटी के एचआर मैनेजर जेन बर्टन ने 2018 के एक लेख में लिखा था, "वेतन के साथ असीमित छुट्टियों की पेशकश करने वाले नियोक्ता निश्चित तौर पर अपने कर्मचारियों को कहते हैं कि विश्वास उनके संगठन की बुनियाद में है."
लेकिन सभी कंपनियां असीमित छुट्टियों की नीति लागू करके सफल नहीं हो सकतीं.
पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में पीएचडी कर रही जियाई बाओ का कहना है कि असीमित छुट्टियां वहीं कारगर होती हैं जहां टीम में बेहतर सामंजस्य होता है और कंपनियां इसकी संस्कृति और सिस्टम तैयार करती हैं.
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में संगठनात्मक मनोविज्ञान के प्रोफ़ेसर सर कैरी कूपर का कहना है कि छुट्टी लेने में कर्मचारी झिझक महसूस न करें, ऐसी संस्कृति विकसित करना मैनेजमेंट पर निर्भर करता है.
कई बॉस में अपने कर्मचारियों के बर्नआउट का पता लगाने का सामाजिक और अनुभव कौशल नहीं होता. वे महत्वाकांक्षी कर्मचारियों को छुट्टी लेने की अहमियत याद दिलाने में नाकाम रहते हैं.
कूपर कहते हैं, "ऐसा क्यों नहीं हो पाता? दुर्भाग्य से, अमरीका, ब्रिटेन और कई अन्य विकसित देशों में, मैनेजर तकनीकी कौशल के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं, मानवीय कौशल के आधार पर नहीं."
"हमारे पास लाइन प्रबंधक नहीं हैं, नीचे से ऊपर तक ऐसे बॉस नहीं हैं जिनके पास भावनात्मक बुद्धिमानी (EQ) हो."
न्यूयॉर्क में रहने वाली सलाहकार मेलिस गुरोल ने फ़रवरी 2017 में नई कंपनी में काम शुरू किया तो पहले साल सिर्फ़ एक दिन की छुट्टी ली, क्योंकि वहां छुट्टियां कितने दिन की हैं यह तय नहीं था.
29 साल की गुरोल कहती हैं, "मुझ पर ख़ुद को साबित करने का दबाव था और इसी मानसिकता में मैंने कई छुट्टियां नहीं लीं."
ऑथेंटिंक जॉब्स के संस्थापक कैमरन मोल इस तरह के माहौल से बचने की कोशिश करते हैं.
वह पूछते हैं, "यदि मैं एक कंपनी चला रहा हूं और कोई कहता है कि उसे केवल पाँच दिन की छुट्टी चाहिए और अगर उसे केवल पाँच दिन की छुट्टी मिलती है तो कंपनी में क्या माहौल होगा?"
विकल्प तैयार करना
न्यूनतम अवकाश की नीति सिर्फ़ कर्मचारियों पर जताए गए भरोसे पर नहीं चलती. यह मॉडल सभी कंपनियों के लिए मुमकिन नहीं है.
जिन कंपनियों में दसियों हज़ार कर्मचारी हों वहां सभी कर्मचारियों की निजी और सामूहिक छुट्टियों पर नज़र रखना, उनका शेड्यूल बनाना और उनको इसकी याद दिलाना बहुत मुश्किल काम होगा.
मोल के मुताबिक़ बदलाव पूरी तरह नामुमकिन नहीं है. "मेरे लिए यह व्यक्तियों का सशक्तिकरण है और हम अवकाश नीति के ज़रिये जितना मुमकिन हो उतना योगदान दे सकते हैं."
"इसीलिए हम उनको यह तय करने का हक़ देते हैं कि वे अपने समय के साथ क्या करना चाहते हैं और क्या नहीं करना चाहते."
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