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अनजान भीड़ के सामने कैसे बोलें
- Author, बीबीसी वर्कलाइफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
स्टैंड-अप कॉमेडियन को कई बार मुश्किल दर्शकों का सामना करना पड़ता है.
यदि आपको कभी किसी भीड़ के सामने बोलना पड़ा हो तो आपने शायद कोई ग़लत बात कहने या श्रोताओं के आपकी बात नहीं समझने का डर महसूस किया होगा.
स्टैंड-अप कॉमेडियन लेन मूर से हमने पूछा कि श्रोताओं की सबसे बुरी प्रतिक्रिया के लिए क्या तैयारी की जा सकती है.
मूर इस बात को अन्य लोगों से ज़्यादा अच्छी तरह जानती हैं कि ऐसे दर्शकों के बीच जाने के क्या मायने होते हैं, जहां इस बात की बहुत अधिक संभावना हो कि वे आपकी बातों को पसंद न करते हों.
मूर का कहना है कि उनको मज़ेदार होने की अपनी क्षमता पर यकीन है, मगर उनको यह देखना होता है कि क्या अन्य लोग भी उनके विचार को सही और मज़ेदार मानते हैं.
लेन मूर के सबक
लेन मूर लेखिका, संगीतकार और कॉमेडियन हैं. उनका कहना है कि उनके 99 फीसदी शोज़ में वह श्रोताओं के सामने कुछ कहती हैं और वे वाह-वाह करते हैं.
लेकिन एक फ़ीसदी समय ऐसा भी होता है जब दर्शकों को उनकी चीज़ें अच्छी नहीं लगतीं.
हार मान लेना बहुत आसान है, लेकिन वही डटी रहती हैं.
उनको ऐसी स्थितियों का भी सामना करना पड़ा है जब लोग उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रहे हों या उनको दूसरी चीज़ें ज़्यादा मज़ेदार लगती हों.
उन स्थितियों में मूर कोशिश करती हैं कि जितनी ज़ल्दी हो सके वह मंच से हट जाएं.
मूर ने वाशिंगटन में एक शो किया था. वह एक विशाल थिएटर था- बहुत बड़ा, बहुत सुंदर. लेकिन मंच पर पहुंचते ही मूर को ख़ुद पर शक होने लगा.
वह कहती हैं, "आप दर्शकों को स्कैन करते हैं यह देखने के लिए क्या वहां कोई सचमुच आपको देखकर उत्साहित है."
भीड़ से डर लगता है!
चूंकि थिएटर बहुत बड़ा था और मंच बहुत ऊंचा था, इसलिए मूर दर्शकों की प्रतिक्रिया नहीं सुन पा रही थीं.
वह नर्वस होने लगीं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वह हवा में बातें कर रही हों और लोगों को उसमें मज़ा नहीं आ रहा हो.
मन में डर समा जाने के बावजूद वह चुटकुले सुनाती रहीं.
एक समय ऐसा भी आया जब उनको लगने लगा कि वह सिर्फ़ बोले जा रही हैं. उनको पता नहीं चल पा रहा था कि उनकी कॉमेडी काम कर रही है या नहीं.
कुछ थिएटरों में ठहाकों को आप तक पहुंचने में थोड़ा वक़्त लगता है. वाशिंगटन में भी यही हो रहा था क्योंकि वह हॉल बहुत बड़ा था.
कुछ देर बाद दर्शकों के ठहाके मूर तक पहुंचने लगे. आख़िर में उनको रोशनी के पार श्रोताओं के चेहरे भी दिखने लगे.
यह वाकया मूर के ज़हन में रह गया क्योंकि इसमें एक बार उनको लगने लगा था कि वह नाकाम हो रही हैं, लोग उनसे ख़ुश नहीं हैं और उनको अजीब या सनकी समझ रहे हैं.
फिर उनको हक़ीक़त का अहसास हुआ. दर्शक उनके लतीफों को पसंद कर रहे थे और वे हंस-हंसकर निढाल हो रहे थे.
वे और ज़्यादा की मांग कर रहे थे. मूर ऑन-द-स्पॉट नये चुटकुले बनाकर उनके सामने पेश करने लगीं.
उनके लिए यह सबसे शानदार अहसास था. वह कहती हैं, "वे मुझे स्वीकार कर रहे थे, वे मुझे समझ रहे थे, वे मुझे देख रहे थे."
ख़ुद को जाहिर करें
लेन मूर ने इस तरह के कई शोज़ किए जहां ऐसी ही स्थिति थी जिसमें लगता था कि काम नहीं बन रहा है.
इस अनुभव ने उनको सिखाया कि किसी भी स्थिति में शुरुआती कदम विश्वास के साथ उठाने चाहिए, ख़ासकर वहां जहां यह डर हो कि आपके विचारों को लोग अजीब समझ लें या उनको पसंद न करें तो क्या होगा?
आप अपने विचारों का एक हिस्सा लोगों के सामने पेश करें और देखें कि उनकी प्रतिक्रिया कैसी होती है. अगर वे थोड़ा बहुत सकारात्मक दिखते हैं तो उनके सामने कुछ और पेश करें.
मूर कहती हैं, "मुझे हमेशा कुछ लोग ऐसे मिले जो मेरी बातों को समझते हैं और उनको पसंद करते हैं."
"मुझे लगता है कि लोग उस व्यक्ति को सचमुच सम्मान देते हैं जिसका किसी चीज़ पर जुनून की हद तक भरोसा होता है और जो इसे जाहिर भी करते हैं."
ऐसे लोग अपने विचारों को जाहिर करते हैं क्योंकि ज़्यादातर समय कुछ न कुछ लोग ऐसे ज़रूर होते हैं जो समझते हैं कि यह बेमिसाल सोच है.
कुछ लोग यह भी कहते हैं कि ऐसा अब तक किसी और के ख़याल में क्यों नहीं आया?
मूर कहती हैं, "मुझे लगता है कि इसमें बहुत डर होता है क्योंकि आपको यह भी लग सकता है कि अगर यह इतना ही शानदार है तो कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी ने पहले भी यह किया हो?"
"हो सकता है कि वह आप ही हों जिसे यह करने की ज़रूरत पड़ी हो."
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