You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
महलों के मालिकों को ख़रीदार क्यों नहीं मिल रहे हैं?
- Author, एंड्रिया सेवरनी नेरी और एडेल हम्बर्ट
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
84 साल के रोलैंड थेनोट फ्रांस के ज्वालामुखीय क्षेत्र औवेर्गेन में बने मांटक्लैवेल के मालिक हैं. यह घर 19वीं शताब्दी का है.
सात एकड़ के पार्क के बीच 700 वर्गमीटर में बना यह घर देखने में कैसल (महल) लगता है. मगर थेनोट कहते हैं, "यह असल में कैसल नहीं है."
"इसमें दो टावर हैं, चार इमारतें हैं और एक बड़ा बग़ीचा है. इसलिए मुझे लगता है कि वास्तुकला के नज़रिये से यह कैसल जैसा दिखता है."
मांटक्लैवेल का नाम स्पेनिश फूल क्लैवेल पर रखा गया है. थेनोट की नज़रों से देखें तो यहां के शाही महलों में भी वह बात नहीं जो उनके घर में है.
वह कहते हैं, "इसमें एक आत्मा है." थेनोट के पिता स्क्रैप का कारोबार करते थे. क्लेरमांट-फेरंड में उनकी फ़ैक्ट्री थी.
दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के 30 वर्षों में जब फ्रांस का तेज़ी से आर्थिक विकास हुआ, तब उनके पिता ने यह घर ख़रीदा था. यह उनका दूसरा घर था.
पूरे परिवार का घर
पिछले क़रीब 60 साल से यह घर इसी परिवार के पास है. थेनोट कहते हैं, "मेरे पिता पूरे परिवार के लिए बड़ा घर ख़रीदना चाहते थे. एक समय यहां 12 लोग रहते थे."
थेनोट मई 1968 से यहां रह रहे हैं. वे कहते हैं, "मैं जलाने के लिए लकड़ियां लाता था. पेड़ों की कटाई-छंटाई में पिता की मदद करता था."
"हम अपनी हाउसकीपर को मैडम इरमा कहते थे. लकड़ी के फ़र्श पर घुटने के बल बैठकर उसके वैक्स करने की तस्वीर अब भी मेरे पास है."
"वह हमें फ़र्श ख़राब करने से रोकती रहती थी." मांटक्लैवेल का समृद्ध इतिहास है. 60 के दशक में फ्रेंच सिनेमा में चले 'न्यू वेव' आंदोलन में इसकी भूमिका रही है.
मशहूर फ्रांसीसी फ़िल्म डायरेक्टर फ्रांस्वा ट्रफॉट ने "दि वाइल्ड बॉय" के सेट के लिए इस कैसल को चुना था. थेनोट तब ट्रफॉट के सहायक थे.
बुढ़ापे की मुश्किल
70 के दशक में थेनोट ने इसके बेसमेंट में डिस्कोथेक खोला. उनकी बहन ने अस्तबल को एक छोटे रेस्त्रां में बदल दिया, जहां उनके दोस्त डिनर के लिए आते थे.
कुछ साल पहले बहन की मौत के बाद थेनोट अकेले रह गए. वह तंदुरुस्त हैं, रिटायर हो चुके हैं और उनके पास इस कैसल की देखरेख के लिए पैसे भी हैं.
हर रोज़ वह घर को गर्म रखने के लिए आग जलाते हैं. वह अपने मुर्गे सरकोज़ी और उसके चूजों को दाना डालते हैं. वह लॉन की घास काटते हैं और पेड़ों की छंटाई करते हैं.
इस घर से बहुत प्यार होने के बाद भी थेनोट इसे बेचना चाहते हैं. वह नहीं चाहते कि उनकी मौत के बाद उनका कैसल खंडहर में बदल जाए.
"हमने इस पर बड़ी मेहनत की है. मेरे लिए यह सोचना भी मुश्किल है कि मांटक्लैवेल को छोड़ दिया जाए और यह उसी हालत में पहुंच जाए जब मेरे पिता ने इसे ख़रीदा था."
यादें जुड़ी हैं...
थेनोट के बच्चे नहीं हैं. परिवार का कोई सदस्य इस कैसल को संभालने के लिए तैयार नहीं है.
"मेरे निराश होने की सबसे बड़ी वजह ये है कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य इस कैसल को रखना नहीं चाहता."
"दूसरी वजह यह है कि मैं बूढ़ा हो गया हूं और इसकी देखरेख के सारे काम नहीं कर सकता."
"तीसरी वजह यह है कि अब मैं रिटायरमेंट पेंशन पर गुज़ारा कर रहा हूं. देखरेख के बिना यह खंडहर में बदल जाए यह मुझसे देखा नहीं जाएगा."
पारिवारिक संपत्ति बेचने का फ़ैसला बहुत भावनात्मक होता है.
ड्यूक यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर स्कॉट ह्यूटेल कहते हैं, "हमारी यादें अक्सर कुछ जगहों से जुड़ जाती हैं."
"वे जगहें पुरानी यादों और अनुभवों को समेट कर रखती हैं."
ज़िंदगी के कुछ और साल
घर से जुड़ाव होने के कारण ही थेनोट इसे बेचने का फ़ैसला कई साल तक टालते रहे. यह घर बेचना अब भी उनके लिए मुश्किल है.
वह कैसल बेचना चाहते हैं, लेकिन यहां से जाना नहीं चाहते. वह यहीं की बाहरी इमारत में रहना चाहते हैं.
इस तरह वह यहां ज़िंदगी के कुछ और साल शांतिपूर्वक गुज़ार सकते हैं. ह्यूटेल को लगता है कि यह रणनीति थेनोट की तकलीफ़ को कम कर सकती है.
"बुढ़ापे के दिनों में घर बदलने में सबसे बड़ी चुनौती यह आती है कि रोजमर्रा के जीवन से मिलने वाले संकेत बाधित हो जाते हैं."
"उन संकेतों के बिना रोज़-रोज़ की चुनौतियों से निपटना मुश्किल हो सकता है. पिछले अनुभवों को याद रखना भी कठिन होता है."
ख़रीदार नहीं हैं...
थेनोट को वे सभी पेड़ याद हैं जिनको उन्होंने अपने पिता के साथ लगाया था- लेबनान देवदार, बलूत, डगलस सनोबर, गिंको बाईलोबा (आयुर्वेदिक पौधा) और स्प्रूस.
उनके घर में 400 वर्गमीटर में सब्ज़ियों की क्यारियां भी हैं.
थेनोट अपने घर को 8,50,000 यूरो (9,64,000 डॉलर) में बेचना चाहते हैं, हालांकि उन्हें लगता है कि इसकी क़ीमत ज़्यादा है.
दो साल पहले इस घर की क़ीमत एक करोड़ 10 लाख यूरो (1.25 करोड़ डॉलर) लगाई गई थी, लेकिन वह इसे पैसे के लिए नहीं बेच रहे.
गोंज़ैग ली नेल पेरिस में एक रियल इस्टेट एजेंसी के मालिक हैं. वह पूरे फ्रांस में पुराने महल और जागीर बेचने में माहिर हैं.
फ़ायदेमंद निवेश
ली नेल ने 2018 में करीब 50 कैसल बेचे हैं. थेनोट के एजेंट पियरे चांगेर्नियर ने इस साल इस तरह की 12 संपत्तियां बेची हैं.
ली नेर के मुताबिक़ थेनोट जैसे विक्रेता दूसरे कैसल मालिकों से अलग हैं. "कोई कैसल किसी एक परिवार के पास 15 साल से ज़्यादा नहीं रहता."
"लोग अब किसी घर से उस तरह का जुड़ाव महसूस नहीं करते."
"मेरे ग्राहक उसी तरह कैसल ख़रीदते और बेचते रहते हैं, जैसे नये-नये अनुभव के लिए वे दूसरे काम करते रहते हैं."
ली नेल कैसल को फ़ायदेमंद निवेश नहीं मानते. लोग इस तरह के घरों और उसकी क़ीमत को कम करके आंकते हैं.
"मैं नहीं समझता कि आप कैसल को एक फ़ायदेमंद होलिडे कॉटेज में बदल सकते हैं. अधिक से अधिक आप इसके ख़र्चे निकाल सकते हैं."
आज़ादी चाहते हैं...
मांटक्लैवेल के 22 कमरों को गर्म रखने की सालाना लागत 12 हज़ार यूरो (13,660 डॉलर) है. इसमें क़रीब 4,000 लीटर हीटिंग ऑयल का ख़र्च शामिल है.
अगर थेनोट घर की मरम्मत कराएं तो उस पर 4 लाख यूरो का ख़र्च आ सकता है. यह बड़े ख़र्च का काम है.
उनको लगता है कि इससे घर बेचना और मुश्किल हो रहा है, क्योंकि पारिवारिक जीवन और रियल इस्टेट में निवेश को लेकर नई पीढ़ी की सोच अलग है.
"वे अपनी आज़ादी चाहते हैं. वे संपत्ति में पैसे लगाने की बजाय अपने परिवार के साथ स्कीइंग के लिए जाना पसंद करते हैं."
थेनोट को यह भी लगता है कि उनका इंतज़ार जितना लंबा होगा, घर को बेचना उनके लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण होगा.
रियल एस्टेट टूरिस्ट
घर बेचने की कोशिश में थनोट को कुछ हतोत्साहित करने वाले अनुभव भी हुए.
एक दिन उनके पास एक दंपति आए. उन्होंने बहाना बनाया कि वे कनाडा में रहने वाले अपने कुछ रिश्तेदारों के लिए जगह तलाश रहे हैं.
थनोट को जल्द ही समझ में आ गया कि वे सिर्फ़ अपने ख़ाली समय में पुराने महलों में घूमने वाले लोग थे. वह उनको "रियल एस्टेट टूरिस्ट" कहते हैं.
वह बताते हैं, "वे बस इधर-उधर देख रहे थे. दीवारों पर लगी पेंटिंग्स को निहार रहे थे. उन्होंने क़ीमत का कोई प्रस्ताव भी नहीं रखा."
कैसल का भविष्य क्या है...
हाल में थेनोट को एक अच्छा प्रस्ताव मिला है. एक युवा डॉक्टर दंपति ने यह घर ख़रीदने की इच्छा जताई है. वे दोनों पहले से औवेर्गेन-रोन-आल्प्स इलाक़े में रहते हैं.
"मेरा सपना है कि यहां बच्चे खेलें. जिन घरों में बच्चे रहते हैं, वे घर साफ-सुथरे और व्यवस्थित नहीं होते. मैं चिमनी के पास मडी बूट पहने बच्चों को देखना चाहता हूं."
"मैं इसे अच्छे और स्मार्ट लोगों को बेचना चाहता हूं जो यहां फिर से जान डाल सकें."
"मैं चाहता हूं कि जब मैं यहां से जाऊं तो यह देखकर जाऊं कि जिन लोगों ने इसे ख़रीदा है वे इसे प्यार करते हैं."
(बीबीसी कैपिटल पर इस लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)