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दुनिया की सबसे बड़ी इमारत के भीतर की दुनिया
- Author, स्टीफन डाउलिंग
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
अमरीकी कंपनी बोइंग के 747 को दुनिया का पहला जंबो जेट कहा जाता है. ये पहला विमान था, जो एक साथ 400 या इससे ज़्यादा लोगों को लेकर उड़ान भर सकता था.
1960 के दशक में जब बोइंग ने इस विमान को बनाने का फ़ैसला किया, तो इसके लिए विशाल कारखाने की भी ज़रूरत पड़ी. ऐसी फैक्ट्री जहां एक साथ कई जंबो जेट बनाए जा सकें.
और इस तरह से नींव पड़ी दुनिया की सबसे बड़ी इमारत की.
पर, सोचिए कि वो इमारत कितनी बड़ी होगी. ज़रा अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाइए.
तब तक हम आप को बोइंग 747 विमान बनाने का क़िस्सा सुनाते हैं. कंपनी ने ये जंबो जेट बनाने पर 1967 में काम शुरू किया था. उस वक़्त कंपनी के प्रमुख थे बिल एलेन.
बिल को महसूस हुआ कि इतना विशाल विमान बनाने के लिए बड़ी सी जगह भी चाहिए. बिली ने इसके लिए अमरीका के कारोबारी शहर सिएटल के क़रीब एक जंगली ठिकाने को चुना. ये जगह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाए गए एक एयरपोर्ट के क़रीब थी.
गिनेस बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में शामिल
बोइंग 747 प्रोजेक्ट के मास्टरमाइंड इंजीनियर जो सटर के मुताबिक़, उस जगह तक पहुंचने के लिए एक छोटी सी सड़क भर थी. रेलवे लाइन तो थी ही नहीं. इलाक़े में जंगली सुअरों का राज था.
जब इस कारखाने को बनाने का काम शुरू हुआ तो जंबो जेट के ढांचे को बनाने पर काम पहले ही शुरू हो गया था. यानी बोइंग को विमान तो बनाना ही था, इसे बनाने का कारखाना भी साथ-साथ ही बनाना था.
आज एवरेट स्थित बोइंग की ये फैक्ट्री गिनेस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के लिहाज़ से दुनिया की सबसे बड़ी इमारत है. ये फैक्ट्री 47.2 करोड़ घन फुट इलाक़े में फैली है.
अभी फैक्ट्री के भीतर लोगों को घुमाने का काम करने वाले डेविड रीस कहते हैं कि हम ने इस फैक्ट्री की इमारत को दुनिया की कुछ बहुत बड़ी कही जाने वाली इमारतों के बरक्स मापा तो हैरान रह गए.
डेविड रीस कहते हैं, 'हमारे पास तुलना के लिए फ्रांस का वर्साइल पैलेस, वेटिकन शहर और डिज़्नीलैंड जैसे ठिकाने हैं. इस मे इंग्लैंड के मशहूर वेंबले स्टेडियम जैसे 13 स्टेडियम समा सकते हैं.'
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तीन पालियों में 30 हज़ार लोग काम करते हैं
एवरेट की इस विशाल फैक्ट्री में आज भी जंबो जेट बनाए जाते हैं. हालांकि उनकी तादाद बहुत कम हो गई है. बल्कि आज तो इस कारखाने में छोटे 767, 777 और 787 मॉडल के विमान बनाए जाते हैं.
लेकिन, इतने बड़े विमान बनाने के लिए भी बहुत ज़्यादा जगह की ज़रूरत होती है. एवरेट स्थित बोइंग की फैक्ट्री की प्रमुख इमारत 97.8 एकड़ में फैल हुई है. ये लंदन के मशहूर ट्रैफ्लगर स्क्वॉयर से 30 गुना से भी ज़्यादा बड़ी जगह है.
इस कारखाने की हर पाली में कम से कम 10 हज़ार लोग काम करते हैं. दिन भर में यहां तीन शिफ्ट में काम होता है. तीनों पालियों को मिला लें, तो यहां ऑस्ट्रेलिया के छोटे से शहर एलिस स्प्रिंग्स के बराबर आबादी होती है.
एवरेट स्थित बोइंग की फैक्ट्री की विशालता का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां अंदर ही एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए 1300 साइकिलें रखी गई हैं.
कारखाने का अपना फायर स्टेशन है. यहां काम करने वालों के लिए कई कैफे और रेस्टोरेट हैं. साथ ही एक अस्पताल भी है. कारखाने में अनगिनत क्रेनें लगी हुई हैं, जो भारी कल-पुर्ज़े और सामान उठाकर सही जगह रखने और पहुंचाने का काम करती है.
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अगर आप यहां घूमना चाहते हैं तो
अगर आप को बोइंग की इस फैक्ट्री में घूमना है, तो आप को यहां कई शर्तों का पालन करना होगा. जैसे कि यहां घूमने के लिए ख़ास जूते पहनने होंगे. महिला हो या पुरुष किसी को भी अपने जूते पहनने की इजाज़त नहीं है.
आप को यहां आने पर ख़ास ऐनक दी जाएगी. भले ही आप चश्मा लगाते हों, पर, आपको ये ऐनक ही पहननी होगी.
मज़े की बात ये है कि इतने बड़े कारखाने में एक भी एयर कंडीशनर नहीं लगा है. गर्मियों के दिन में जब यहां बहुत गर्मी पड़ने लगती है, तो फैक्ट्री के विशाल दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, ताकि ठंडी हवा आ सके.
वहीं, सर्दियों में यहां जलने वाले दस लाख से ज़्यादा बल्ब गर्माहट पहुंचाते हैं. सर्दी में यहां पर केवल एक स्वेटर या हल्का जैकेट पहनकर काम चल जाता है.
जब आस-पास के जंगलों में आग लग जाती है, तो फैक्ट्री के अंदर भी धुआं भर जाता है, तब भी इसके दरवाज़े खोलने पड़ते हैं, ताकि अंदर दम न घुटे.
कारखाने के बारे में अफ़वाह फैल गई थी कि ये इतनी ऊंची है कि बादलों को छूती है. हालांकि डेविड रीस इसे कोरी गप बताते हैं.
रीस कहते हैं कि फैक्ट्री का माहौल वक़्त के साथ बदलता रहता है. पहली पाली में इंसान ज़्यादा काम करते दिखेंगे, तो दूसरी पाली में क्रेनों का काम ज़्यादा होता है.
जब यहां कोई विमान तैयार हो जाता है, तो उसे यहां से पास के हवाई अड्डे तक ड्राइव कर के ले जाया जाता है. विशाल विमान को सड़क पर चलता देख कर लोग घबराएं न, इसलिए नए विमानों को रात में ही हवाई अड्डे ले जाया जाता है.
तो, दुनिया की इस सबसे बड़ी इमारत में कई चौंकाने वाली बातें भी हैं.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)
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