एक फ़ीसदी अमीरों के बारे में हम क्या नहीं जानते

    • Author, बॉबी डफ़ी
    • पदनाम, प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज लंदन

अमरीका के मध्यावधि चुनाव नतीजों में वही स्पष्ट विभाजन देखने को मिला जो दुनिया भर के हालिया राजनीतिक नतीजों में दिखा है.

अमरीकी कांग्रेस की प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अब अलग-अलग पार्टियों का नियंत्रण है.

शुरुआती विश्लेषण दिखाते हैं कि ग्रामीण, उपनगरीय और शहरी क्षेत्रों में नस्ल और आर्थिक स्थिति में अंतर के कारण करीबी मुक़ाबले हो रहे हैं.

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीका में चल रही सार्वजनिक बहस में हस्तक्षेप करते हुए बताया है कि बढ़ती ग़ैरबराबरी से लोकतंत्र और विकास पर ख़तरे के बारे में वे क्या महसूस करते हैं और यह किस तरह समाज को बांट रहा है.

मेरी राय में उन्हें चिंतित होने का अधिकार है. शीर्ष पर बैठे कुछ लोगों की दौलत निश्चित रूप से बढ़ी है और ऐसा सिर्फ़ अमरीका में नहीं है.

जब से राष्ट्रीय आंकड़ों के आधार पर भरोसेमंद तरीके से संपत्ति आंकने की शुरुआत हुई है, तब से 2017 में पहली बार ऐसा हुआ कि दुनिया की एक फ़ीसदी अमीर आबादी के पास बाकी 99 फ़ीसदी लोगों की समूची दौलत से भी ज्यादा दौलत हो गई.

लोगों के मुताबिक: दौलत

सर्वे शोधकर्ताओं ने जब लोगों से यह अनुमान लगाने को कहा कि उनके अपने देश के सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोगों के पास कितनी दौलत है तो कुछ इस तरह के आंकड़े सामने आए. ये आंकड़े एक रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इप्सॉस की 'पेरिल्स ऑफ़ परसेप्शन' स्टडी में दिए गए हैं.

ब्रिटेन और फ्रांस के लोग अनुमान लगाने में सबसे फिसड्डी रहे. दोनों ही देशों में सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 23-23 प्रतिशत हिस्सा है.

लेकिन, ब्रिटेन के लोगों को लगता है कि उनके देश के सबसे अमीर एक फ़ीसदी लोग 59 फ़ीसदी दौलत के मालिक हैं. फ्रांस के लोगों ने अमीरों के पास 56 फ़ीसदी दौलत होने का अनुमान लगाया.

कुछ देशों के लोगों ने संपत्ति के केंद्रीकरण को कम करके भी आंका. रूस में लोगों ने अनुमान लगाया कि उनके देश के एक फ़ीसदी अमीरों के पास 53 फ़ीसदी दौलत है.

रूस के लोगों का अनुमान ब्रिटेन और फ्रांस के लोगों के अनुमान के लगभग बराबर था, जबकि रूस में ग़ैरबराबरी की स्थिति कहीं ज्यादा ख़राब है.

रूस में एक फ़ीसदी अमीरों के पास देश की 70 फ़ीसदी दौलत है, जो ब्रिटेन और फ्रांस के अमीरों के स्तर से तीन गुना है.

अमरीका भी इस सर्वे में शामिल उन अमीर देशों में से एक है, जहां अमीरों और ग़रीबों की दौलत में बहुत ग़ैरबराबरी है.

अमरीका में एक फ़ीसदी अमीरों के पास देश की कुल संपत्ति का 37 फ़ीसदी हिस्सा है. लेकिन, अनुमान के मामले में अमरीकी लोग ब्रिटेन और फ्रांस के लोगों की तरह ही कम आशावादी निकले. उन्होंने 57 फ़ीसदी का अनुमान लगाया.

हम हक़ीक़त से इतने दूर क्यों हैं?

इसका जवाब तथ्यों की जानकारी न होने के बजाय हमारी भावनात्मक प्रतिक्रिया में निहित है.

ओबामा की तरह हम भी जानते हैं कि असमानता एक बढ़ती हुई समस्या है.

गरीबी की सच्ची कहानियों के साथ-साथ हम बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई कहानियां भी सुनते रहते हैं. इससे हमारे अनुमान अतिरंजित हो सकते हैं.

हम इस बारे में समझते हों या नहीं, मगर हम आंशिक रूप से एक संदेश देते हैं कि यह एक बड़ा और चिंताजनक मुद्दा है.

ग़ैरबराबरी की समस्या हमारे ज़ेहन में बड़ी लगने लगती है, इसलिए हम आंकड़ों को बढ़ा देते हैं. सामाजिक मनोवैज्ञानिक इसे 'इमोशनल इन्यूमेरेसी' कहता है.

इमोशनल इन्यूमेरेसी का मतलब है कि जब हम लोगों से किसी मुद्दे के छोटा या बड़ा होने के बारे में अनुमान लगाने को कहते हैं तो वे उसके कारण और परिणाम दोनों तरफ सोचते हैं.

हम सिर्फ़ उन चीजों के बारे में चिंतित नहीं होते जिनको हम गंभीर मुद्दा समझते हैं, हम उन मुद्दों को बड़ा भी बना देते हैं.

इमोशनल इन्यूमेरेसी का एक निष्कर्ष यह निकलता है कि हक़ीकत के बारे में हमारी ग़लत धारणा चूंकि आंशिक रूप से भावनात्मक है, इसलिए दूसरों के तथ्यों को ग़लत बताकर हम जिस मिथक को तोड़ना समझते हैं, उससे कोई मदद नहीं मिलती. कारण यह है कि हमने समस्या को ठीक से समझा ही नहीं है.

हमारी ग़लतफहमी अक्सर अज्ञानता से नहीं, बल्कि जिस नज़रिये और मान्यताओं से हम दुनिया को देखते हैं उससे तय होती है.

अमीरों के पास हो कितनी दौलत?

सर्वे में हमने लोगों से यह भी पूछा कि एक फ़ीसदी अमीर लोगों के पास क्या होना चाहिए. इससे कुछ आकर्षक पैटर्न सामने आए.

पहला, सभी लोग संपत्ति का एकदम बराबर-बराबर बंटवारा नहीं चाहते. इसरायल में औसतन लोगों का कहना है कि एक फ़ीसदी अमीरों के पास 14 फ़ीसदी संपत्ति होनी चाहिए. चीन में यह आंकड़ा 32 फ़ीसदी का है.

सभी देशों के कुछ लोग यह ज़रूर चाहते हैं कि संपत्ति का वितरण बराबर-बराबर हो. इस मामले में ब्रिटेन सबसे आगे है. ब्रिटेन के 19 फ़ीसदी लोग कहते हैं कि एक फ़ीसदी अमीर लोगों के पास सिर्फ़ एक फ़ीसदी दौलत ही होनी चाहिए.

इसके बाद रूस का नंबर है, जहां 18 फ़ीसदी लोग कहते हैं कि अमीरों के पास केवल एक फ़ीसदी दौलत ही होनी चाहिए.

दूसरा, यदि हम असमानता के सहज स्वीकार्य स्तर और इसके वास्तविक स्तर को सामने रखें तो लोग चौंक जाते हैं. कई देशों में लोग ग़ैरबराबरी की मौजूदा स्थिति से बहुत ही सहज महसूस करते हैं.

उदाहरण के लिए, फ्रांस के लोगों का कहना है कि एक फ़ीसदी अमीरों के पास 27 फ़ीसदी दौलत होनी चाहिए, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि उनके पास 23 फ़ीसदी संपत्ति ही है.

सीधे-सादे शब्दों में यह अर्थ निकाला जा सकता है कि फ्रांस के लोग चाहते हैं कि उनके देश के अमीरों के पास थोड़ा और पैसा होना चाहिए. बेशक यह व्याख्या पूरी तरह से गलत है.

सर्वे के मूल सवाल को हम जानते हैं कि लोग हक़ीकत को कैसे देख रहे हैं.

फ्रांस के औसतन लोग समझते हैं कि उनके देश के एक फ़ीसदी अमीरों के पास देश की संपत्ति का 56 फ़ीसदी हिस्सा है. तो वे वास्तव में यह कह रहे हैं कि अमीरों की अमीरी मौजूदा स्तर से आधी होनी चाहिए.

यह वित्त और संपत्ति के बारे में हमारी ग़लतफ़हमियों को समझने के फ़ायदे की ओर इशारा कर रहा है. हमें लोगों से 'क्या होना चाहिए' पूछने से पहले यह जानने की जरूरत है कि लोग वर्तमान स्थिति के बारे में क्या समझते हैं.

दूसरे शब्दों में, यदि हम हक़ीकत के बारे में उनकी समझ की ग़लतियों को नहीं जानेंगे तो इस बारे में बहुत ग़लत निष्कर्ष निकाल सकते हैं.

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(इसके लेखक बॉब डफ़ी हैं जो किंग्स कॉलेज लंदन में डायरेक्टर और पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर हैं.)

(यह लेख बीबीसी कैपिटल की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी कैपिटल के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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