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क्या विदेश जाने पर तनख़्वाह बढ़ जाती है?
- Author, केट मेबेरी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
विदेश में नौकरी के लिए कई लोग कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं. भारत में कबूतरबाज़ी इसी ललक के कारण शुरू हुई थी.
किसी भी तरह विदेश चले जाने के चक्कर में लोग धोख़ा भी खाते हैं, फिर भी इसका लोभ नहीं छोड़ते.
नया सर्वे कहता है कि विदेश में नौकरी करने पर आमदनी बढ़ जाती है. लेकिन दूसरे कारकों की भूमिका भी कम नहीं होती.
वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान आयरलैंड की अर्थव्यवस्था चरमराई तो लोगों के सामने कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया. उसी दौरान सॉर्चा कोले आयरलैंड से मध्य-पूर्व चली गईं.
कोले टीचर हैं. नई जगह काम करना चुनौतियों से भरा था, जिसे उन्होंने स्वीकार किया.
विदेश में ज़्यादा पैसा कमाया जा सकता है?
विदेश में काम करके कोले आज अपने उन आर्थिक लक्ष्यों को हासिल कर रही हैं, जो उन्होंने तय किए थे. आयरलैंड में रहने पर यह मुमकिन नहीं था.
32 साल की कोले दुबई में रहती हैं.
वह कहती हैं, "मंदी के दिनों में मैं आयरलैंड में थी. मेरे परिवार के सदस्यों और मित्रों की नौकरी चली गई थी. वे अपने कर्ज नहीं चुका पा रहे थे. पैसे की किल्लत ने उनको मानसिक और शारीरिक रूप से निचोड़ दिया था."
मध्य-पूर्व आने का फ़ैसला कोले के लिए जीवन बदलने वाला फ़ैसला साबित हुआ.
उनके दोस्त पैसे के मोहताज हो रहे थे और खुद कोले भी ब्रिटेन में ऐसे ही दौर से गुजरी थीं.
आमदनी का आधे से ज्यादा हिस्सा किराये पर खर्च हो जाता था. बचत बहुत कम थी. अब वो सारी दिक्कतें खत्म हो चुकी हैं.
विदेश में उनकी पहली नौकरी 2011 में क़तर में थी. तब से उन्होंने एक लाख 86 हजार डॉलर से ज्यादा की बचत की है और दो संपत्तियां खरीदी हैं.
इनमें से एक उनके अपने शहर में 4 बेडरूम का घर है. वह यात्रा के खर्च को भी मैनेज कर रही हैं.
विदेश में कितनी बढ़ती है तनख़्वाह?
एंड्रयू टालबोट 18 साल से मान्यता प्राप्त फाइनेंशियल प्लानर हैं और फिलहाल सिंगापुर में काम करते हैं.
वह कहते हैं, "विदेश में एक साल काम करके आप जितना कमाते हैं, उतना अपने देश में 3 साल में कमाते हैं."
एचएसबीसी (HSBC) के नये सर्वे के मुताबिक विदेश जाने पर एक औसत कामकाजी व्यक्ति की तनख्वाह सालाना 21 हज़ार डॉलर बढ़ी.
इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले करीब 45 फीसदी लोगों ने कहा कि अपने देश में वे जो काम कर रहे थे, उसी काम के लिए विदेश में उन्हें ज्यादा पैसे मिलते हैं. करीब 28 फीसदी लोगों ने कहा कि उनको प्रमोशन मिला.
एचएसबीसी एक्स्पैट के प्रमुख जॉन गॉडार्ड कहते हैं, "यह ज़िंदगी बदल देने वाला है."
गॉडार्ड चैनल आइलैंड्स में रहते हैं और एशिया, मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में काम करते हैं.
अतिरिक्त आमदनी लोगों को भविष्य के लिए तैयार रहने में मदद करती है.
सर्वे में शामिल करीब एक तिहाई लोगों ने कहा कि वे बुढापे के लिए पैसे बचा पा रहे हैं. दूसरी तिहाई के लोगों ने कहा कि वे कुछ संपत्ति जोड़ रहे हैं."
इस सर्वे में 18 साल से ऊपर के उन लोगों को शामिल किया गया था, जो अपना देश छोड़कर विदेश में काम कर रहे हैं.
सर्वे में 22,000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. इनमें से ज्यादातर एंट्री लेवल से ऊपर एक्ज़ीक्यूटिव लेवल पर काम करते थे.
सबसे ज़्यादा सैलरी कहां मिलती है?
जिन 163 देशों और भौगोलिक भू-भागों का सर्वे किया गया, उनमें सबसे ज्यादा औसत सैलरी स्विट्जरलैंड में मिलती है.
यहां औसत सालाना तनख्वाह 2,02,865 अमरीकी डॉलर है. अमरीका 1,85,119 डॉलर के साथ दूसरे और हांगकांग 1,78,706 डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर है.
विदेश में सिर्फ़ ऊंची सैलरी वाले प्रोफेशनल ही काम नहीं करते. वहां युवा कर्मचारी भी हैं, जो अनुभव और नये कौशल हासिल करने के लिए विदेश गए हैं.
य्वोने मैकनल्टी ग्लोबल मोबिलिटी एक्सपर्ट हैं. वे सिंगापुर में रहती हैं.
वह बताती हैं कि विदेश में मिलने वाले सैलरी पैकेज़ से घर किराया, स्कूल फीस और कार के भत्ते गायब हो रहे हैं.
2017 के केपीएमजी (KPMG) सर्वे से पता चला केवल 27 फीसदी लोगों को लगता है ऊंची तनख्वाह वाली विदेशी नौकरियां बढ़ेंगी.
29 फीसदी लोग मानते हैं कि विदेशी नौकरियों में कमी आएगी और कंपनियों को दूसरे उपाय तलाशने होंगे.
इनमें लंबे बिजनेस ट्रिप, शॉर्ट-टर्म असाइनमेंट और स्थानीय लोगों को नौकरी का विकल्प शामिल होगा.
कॉरपोरेट रि-लोकेशन प्रोवाइडर कार्टस के 2018 के सर्वे में पता चला कि कंपनियां लंबे समय के लिए अपने कर्मचारियों को विदेश में रखने से बच रही हैं, क्योंकि यह बहुत खर्चीला है.
य्वोने मैकनल्टी कहती हैं कि अपनी कंपनी के लिए विदेश में काम करके जल्दी अमीर बन जाने का विचार पुराना पड़ चुका है.
यह भी कहा जाता है कि अपने देश के मुक़ाबले विदेश में आयकर की दरें कम हैं. दुबई में तो कोई टैक्स ही नहीं लगता.
सिंगापुर में टैक्स की सबसे ऊंची दर 22 फीसदी है और हांगकांग में 17 फीसदी. इसके मुक़ाबले ब्रिटेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों में 45 फीसदी टैक्स लगता है.
लेकिन यह सिक्के का केवल एक पहलू है.
कौन है सबसे महंगा शहर?
जिन देशों में ज्यादा सैलरी मिलती है, उनमें से कई देश सबसे ज्यादा महंगे भी हैं.
मर्सर के 2018 के कॉस्ट ऑफ़ लिविंग सर्वे के मुताबिक हांगकांग प्रवासियों के लिए दुनिया का सबसे महंगा शहर है. ज्यूरिख तीसरे नंबर पर है.
जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ते हैं. विदेश में मोटी तनख्वाह पर काम करने वाले उस पैसे को नाइटआउट या महंगी छुट्टियों पर खर्च करने को तैयार रहते हैं.
टालबोट के मुताबिक आप अकेले हों या परिवार के साथ रहते हों, आपकी सैलरी कम हो या ज्यादा, मुख्य बात यह है कि आप अपने लिए कैसी जीवनशैली चुनते हैं.
लोगों को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि जब विदेश में उनका कार्यकाल खत्म हो जाएगा तब वे क्या करेंगे. क्या वे अपना कर्ज लौटाएंगे, बैंक में कुछ पैसे रखेंगे या दूसरी संपत्ति खरीदेंगे.
अपना लक्ष्य तय कीजिए और उस पर टिके रहिए. आपके पास एक योजना अवश्य होनी चाहिए.
क्या है बचत करने का तरीका?
48 साल की मे टैटोय 20 साल पहले सिंगापुर आई थीं. मनीला में वे जिस इवेंट कंपनी में काम करती थीं, उसने प्रस्ताव रखा था कि अगर वे सिंगापुर चली जाती हैं तो उनकी सैलरी छह गुणा कर दी जाएगी.
फिलीपींस की टैटोय ने सिंगापुर में काम करते हुए दो घर खरीदे. एक अपने लिए और एक अपने मां-बाप के लिए.
टैटोय ही उनका भी खर्च उठाती हैं. वे कई म्युचुअल फंड्स में भी निवेश करती हैं. उन्होंने किसी अनहोनी के लिए भी बचत की है.
सिंगापुर में रहने का खर्च लगातार बढ़ता रहा, फिर भी टैटोय की सीधी-सादी जीवनशैली ने उनको बचत करने में मदद की.
"मैं सस्ते में रहती हूं, लेकिन खुश रहती हूं. मैं शहर में कहीं जाने के लिए ज्यादातर बस ही पकड़ती हूं और समय पर अपने क्रेडिट कार्ड का बिल भरती हूं. मुझे लगता है कि मैंने दुख और कर्ज से अपने लिए आजादी खरीद ली है."
अब्दुल रहीम मियां की तनख्वाह टैटोय की तरह बहुत बढ़िया नहीं है. वह ब्रिटिश नागरिक हैं और प्रशिक्षित फ़िजियोथेरेपिस्ट हैं.
रहीम कुछ साल पहले एक फुटबॉल क्लब में काम करने मलेशिया आए थे. उनका परिवार यहीं था. वीज़ा की समस्या के कारण उनको वह नौकरी छोड़नी पड़ी. अभी वह एक जिम में मैनेजर हैं.
वह कहते हैं, "ब्रिटेन में सिनेमा में पार्ट-टाइम जॉब करते हुए मैं यहां के पार्ट-टाइम से ज्यादा कमा लेता था." लेकिन कुआलालम्पुर में रहने का खर्च कम है, इसलिए रहीम कुछ बचत कर लेते हैं.
वह विदेश में नौकरी को अमीर बनने का रास्ता समझने वालों को सचेत करते हैं, "इसके भले और बुरे दोनों पहलुओं को अच्छी तरह से जांच लें."
दुबई में कोले अपने ब्लॉग के जरिये दूसरी शिक्षकों को विदेश में नौकरी पाने में मदद करती हैं. वे इंटरनेशनल स्कूलों के बारे में सलाह और सूचनाएं देती हैं. साथ ही जिन शहरों में वे स्कूल हैं, वहां के जीवन के बारे में भी बताती हैं.
कोले मानती हैं कि विदेश में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी के लालच में आ जाना आसान है, लेकिन अगर ज्यादा पैसे और सुविधाएं मिले तो भी अनुशासन जरूरी है.
सात साल तक विदेश में रहने के बाद वह आर्थिक रूप से खुद को सुरक्षित समझती हैं और अब भविष्य की योजनाएं बना रही हैं.
"मैंने विदेश में शिक्षक की नौकरी करने की एक सीमा तय की है. मेरे मां-बाप बूढ़े हो रहे हैं. मेरे दोस्त वहां शादी कर रहे हैं, उनके बच्चे हो रहे हैं. मैं ऐसी महिला बनकर नहीं रहना चाहती, जो साल में बस दो बार अपने घर जाए."
(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)
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