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क्या भविष्य में बच्चे के चार मां-बाप होंगे?
- Author, विट्टोरिया ट्रैवर्सो और जेक रॉबिन्स
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
अमरीका के फिलाडेल्फिया में रहने वाले चार्ली बॉर्ने ने चार साल पहले बच्चे के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया था.
उस समय उनकी उम्र 43 साल थी. वह नर्स का काम करते थे और अपने समलैंगिक पति लिन गुड हेलर के साथ रहते थे.
चार्ली ने पहले बच्चा गोद लेने की सोची. फिर उनके एक सहकर्मी ने प्लेटोनिक पैरेंटिंग के बारे में बताया तो उन्होंने मोडैमिली में अपना प्रोफाइल बनाया.
मोडैमिली एक वेबसाइट है जो परिवार शुरू करने के इच्छुक लोगों को साथ आने में मदद करती है.
सितंबर 2014 में मोडैमिली की एक और सदस्य निशा नायक ने उनसे संपर्क किया. वह मनोवैज्ञानिक हैं. तब वह 40 साल की थीं.
चार्ली कहते हैं, "एक दिन मुझे निशा का ईमेल आया. मैंने देखा कि वह भी फिलाडेल्फिया में रहती हैं. हमें शुरुआत करने में कोई दिक्कत नहीं हुई."
अगले कुछ महीनों तक चार्ली और निशा माता-पिता बनने की अपनी पारस्परिक इच्छा को समझने के लिए कॉफ़ी और पिज़्ज़ा पर मिलते रहते रहे.
नवंबर 2015 में निशा इन-विट्रो-फ़र्टिलाइजेशन (IVF) के सहारे गर्भवती हुईं. उनकी गर्भ में जुड़वां बच्चे थे.
चार्ली और निशा अब दो साल के बच्चों- इला और वॉन के को-पैरेंट्स हैं. दोनों को इस रिश्ते पर गर्व है.
साझा परवरिश
वे हफ्ते के तीन-तीन दिन अपने बच्चों की परवरिश करते हैं. सातवें दिन सब साथ में वक़्त बिताते हैं. चार्ली के पति लिन भी बच्चों की परवरिश में मदद करते हैं.
निशा कहती हैं, "जब मैं को-पैरेंट की तलाश कर रही थी तब मैं किसी की आर्थिक सहायता पाकर खुश होती, लेकिन ऐसा न भी होता तो मुझे फर्क नहीं पड़ता."
"अगर वह बच्चे की देखरेख न भी करते तो मुझे परेशानी नहीं थी. लेकिन मेरे बच्चों को दूसरे पैरेंट्स भी मिले हैं जो उनको प्यार करते हैं."
लिन ने रिटायरमेंट ले ली है. जब चार्ली और निशा काम पर जाते हैं तब बच्चे उनकी देखरेख में होते हैं. वह उनको पार्क ले जाते हैं और कंधे पर भी घुमाते हैं.
प्लेटोनिक पैरेंटिंग
प्लेटोनिक पैरेंटिंग, जिसे को-पैरेंटिंग भी कहा जाता है, उस रिश्ते को परिभाषित करता है जिसमें दो लोग एक-दूसरे के प्रति रोमांटिक हुए बिना बच्चे पैदा करने का फ़ैसला करते हैं.
प्लेटोनिक पैरेंट्स बनने की वजह अलग-अलग हो सकती है. कभी-कभी समलैंगिक (LGBT) जोड़े जो पारंपरिक विषमलैंगिक शादी की जगह साथ रहकर परिवार बसाने का फ़ैसला करते हैं, उनको बच्चे की चाहत होती है, जैसे चार्ली और निशा के मामले में है. इनको "क्विअ" कहा जाता है.
निशा कहती हैं, "एक चुनौती यह होती है कि आप दूसरे व्यक्ति को नहीं जानते. आपको उसका अतीत पता नहीं होता. ऐसे में आप विश्वास के सहारे बड़ा कदम उठाते हैं."
कुछ अन्य मामलों में सह-अभिभावक की व्यवस्था लंबे समय के दोस्तों के बीच दिखती है जो साथ में बच्चे पालना चाहते हैं. कनाडा की नताशा बख्त और लिंडा कॉलिन्स ऐसी ही दो दोस्त हैं.
बच्चे का हित
बख्त और कॉलिन्स के साथ-साथ उनके दोस्तों ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. कॉलिन्स को बख्त के बेटे की पैरेंट के रूप में मान्यता दिलाकर उन्होंने ओंटारियो फैमिली लॉ में एक कानूनी मिसाल कायम की.
कनाडा के कानून सिर्फ़ दांपत्य रिश्ते में बंधे जोड़ों को माता-पिता के रूप में मान्यता देते थे. लेकिन बख्त और कॉलिन्स ने जूरी को इस बात के लिए मना लिया कि कॉलिन्स को बच्चे की अभिभावक के रूप में मान्यता देना "बच्चे के सर्वोत्तम हित" के वैधानिक सिद्धांत के मुताबिक होगा.
प्लेटोनिक पैरेंटिंग की नई परिपाटी की आलोचना भी हो रही है. आलोचकों का मानना है कि अलग-अलग रहने वाले माता-पिता के बीच आना-जाना बच्चे के लिए तनावपूर्ण होता है.
चार्ली और निशा के घर एक-दूसरे से 20 मिनट की दूरी पर हैं. वे दोनों बच्चे के साथ बराबर-बराबर समय बिताते हैं. तलाकशुदा जोड़ों में ऐसा नहीं हो पाता.
वे बच्चे के आने-जाने या बच्चे को प्रभावित करने वाले दूसरे नाज़ुक मसलों को आपस में एक फैमिली थेरेपिस्ट की मदद से सुलझाते हैं.
रैचेल होप ने "फैमिली बाय च्वॉइसः प्लेटोनिक पार्टनर्ड पैरेंटिंग" नामक किताब लिखी है. उन्होंने अपने पहले बच्चे को एक को-पैरेंट के साथ पाला, जो एक ही बिल्डिंग के दूसरे घर में रहते थे.
होप को लगता है कि करीब रहते हुए स्वतंत्र रहना सबसे अच्छा है.
दूसरी तरफ, आलोचकों को चिंता है कि बच्चे मां-बाप के बीच रोमांटिक प्यार के साक्षी बनने से चूक सकते हैं.
होप का कहना है कि यह चिंता जायज़ नहीं है क्योंकि बच्चे अपने मां-बाप के रोमांटिक पार्टनर और आसपास के दूसरे रोमांटिक जोड़ों को देखकर इस बारे में जान सकते हैं.
परिवार का विकास
प्लेटोनिक पैरेंटिंग के आधिकारिक आंकड़े अभी तक उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन पिछले एक दशक में भावी प्लेटोनिक माता-पिता के ऑनलाइन समुदायों में भागीदारी लगातार बढ़ी है.
इवान फ़ैटोविक ने 2011 में मोडैमिली की शुरुआत की थी. उनके कई दोस्त और सहकर्मी बच्चे की परवरिश करना चाहते थे लेकिन उनके पास कोई पार्टनर नहीं था जिसके साथ वे इसकी शुरुआत कर सकें.
फिलहाल मोडैमिली के दुनिया भर में 25 हजार सक्रिय सदस्य हैं. फ़ैटोविक का अनुमान है कि उनके प्लेटफॉर्म की मदद से बने जोड़ों ने करीब 100 बच्चे पैदा किए.
वह बताते हैं कि "फ़ैमिली बाय डिजाइन" और "कोपैरेंट्स डॉट कॉम" जैसी को-पैरेंटिंग साइट्स पर करीब 10 लाख लोग रजिस्टर्ड हैं.
अमरीका और अन्य जगहों पर इन रिश्तों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए कानून भी बन रहे हैं.
2013 में कैलिफोर्निया के गवर्नर जेरी ब्राउन ने एक कानून पर दस्तखत किए जो दो से ज्यादा लोगों को किसी बच्चे के अभिभावक के रूप में कानूनी मान्यता देता है.
अमरीका के कुछ अन्य राज्य भी कानून बनाकर या अदालती फ़ैसलों के आधार पर यह विकल्प दे रहे हैं.
ओंटारियो में बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता अधिकतम 4 लोगों के बच्चे के को-पैरेंट्स होने का कानूनी समझौता कर सकते हैं.
ब्रिटेन का कानून सिर्फ दो लोगों को पैरेंट्स के रूप में मान्यता देता है, लेकिन कोर्ट के एक हाल के फ़ैसले में अलग-अलग घरों में रहने वाले दो लोगों को बच्चे के प्लेटोनिक पैरेंट्स बनने की मंजूरी दी गई है.
ब्रिटेन के विवाह कानून के मुताबिक बच्चे का अभिभावक बनने के अधिकार पाने के लिए साथ रहने की पूर्व-शर्त नहीं है.
अगला बड़ा बदलाव
को-पैरेंटिंग की लेखक होप कहती हैं कि प्लेटोनिक पैरेंटिग में लोगों की रुचि बढ़ने के बाद अगला बड़ा बदलाव भाषा में होने वाला है.
"इस तरह के परिवारों के लिए हमारे पास शब्दकोश की कमी है. लोग पति सुनते हैं और उसे बच्चे का पिता समझ लेते हैं, जबकि हो सकता है कि ऐसा न हो."
यह समस्या चार्ली और निशा के सामने भी आई थी. उन्होंने चार्ली के लिए "डैडी" और उनके पति लिन के लिए "पापा" तय किया.
लिन कहते हैं, "मुझे कभी बच्चे की ऐसी ज़रूरत महसूस नहीं हुई थी. लेकिन उन्होंने मेरी प्राथकिताएं बदल दी हैं. उनके साथ वक़्त बिताकर मुझे संतोष होता है."
होप को लगता है कि ये नये रिश्ते घरों की बनावट और मुहल्ले के ढांचे को भी बदल देंगे.
"अभी हमारे घर और मुहल्ले न्यूक्लियर फ़ैमिली के लिए डिजाइन किए गए हैं. आगे हमें नये सामुदायिक जगहों की जरूरत पड़ सकती है, जहां प्लेटोनिक पैरेंट्स आस-पास रह सकें और अपने बच्चे को मिल-जुलकर पाल-पोस सकें."
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)