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सचिन के आगे इंग्लैंड ने घुटने टेके | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेन्नई टेस्ट: भारत ने इंग्लैंड को छह विकेट से हराया भारत: 241 & 387/4 इंग्लैंड: 316 & 311/9 (पारी घोषित) भारत ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ चेन्नई में पहला टेस्ट छह विकेट से जीत लिया है. भारत के सामने जीत के लिए 387 रनों का लक्ष्य था. मैच के आख़िरी दिन सचिन और युवराज की बेहतरीन साझेदारी की बदौलत भारत ने ये लक्ष्य चार विकेट गंवाकर हासिल कर लिया. सचिन तेंदुलकर ने शानदार नाबाद शतक जड़ा तो युवराज सिंह ने नाबाद 85 रन बनाए. वीरेंदर सहवाग को मैन ऑफ़ द मैच चुना गया. दूसरी पारी में 83 रनों की उनकी आतिशी पारी ने ही भारत की जीत का आधार रखा था. टेस्ट मैच के पाँचवे दिन टूट चुकी पिच पर भारत ने एक विकेट पर 131 के स्कोर से आगे खेलना शुरु किया.जहाँ गौतम गंभीर बेहद सहजता के साथ पारी आगे बढ़ा रहे थे, वहीं ख़राब फ़ॉर्म से जूझ रहे राहुल द्रविड़ में विश्वास की कमी साफ़ झलक रही थी. टीम के स्कोर में दस रन ही और जुड़े थे कि द्रविड़ चार रन बनाकर पैवेलियन लौट गए. फ़्लिंटॉफ़ की बाहर जाती गेंद पर उन्होंने बल्ला लगाया और विकेट के पीछे लपके गए. इसके बाद गंभीर का साथ देने आए सचिन तेंदुलकर. दोनों के बीच 42 रनों की साझीदारी हुई. इस बीच गौतम गंभीर अपना अर्धशतक पूरा कर चुके थे और पूरे लय में थे.
लेकिन जेम्स एंडरसन की एक गेंद पर गंभीर को कॉलिंगवुड ने कैच किया. उन्होंने सात चौकों की सहायता से 66 रन बनाए. वीवीएस लक्ष्मण लंच के ठीक बाद 26 के निजी स्कोर पर स्वान का शिकार हो गए. फिर सचिन और युवराज ने आकर मोर्चा संभा. उस समय भारत को एक अच्छी साझेदारी की ज़रूरत थी. युवराज और सचिन दोनों ने सूझबूझ से खेला, आपस में बेहतरीन तालमेल दिखाया और भारत को जीत दिलाकर ही दम लिया. आख़िरी ओवर में सचिन 99 पर खेल रहे थे और सब लोगों की साँसे थमी हुई थी कि क्या वे अपना शतक पूरा कर पाएँगे. सबकी उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सचिन ने नौ चौकों की मदद से 196 गेंदों में बेहतरीन शतक जमाया तो युवराज ने 131 गेंदों में आठ चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 85 रन बनाए. मुंबई हमले के बाद हुए इस टेस्ट मैच के बाद बोलते हुए भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मैच देखने आने के लिए चेन्नई के लोगों का धन्यवाद किया. मैच के बाद हुए आयोजन में सुरक्षाकर्मियों के योगदान को सराहा गया और उन्हें एक विशेष ट्रॉफ़ी दी गई. सहवाग ने जगाई थी उम्मीद
चौथे दिन इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी स्ट्रॉस और कॉलिंगवुड के शतकों की बदौलत नौ विकेट पर 311 के स्कोर पर घोषित कर दी थी.इस तरह इंग्लैंड ने भारत के सामने जीत के लिए 387 रनों के विशाल लक्ष्य रखा था. इस लक्ष्य की ओर बढ़ने में चौथे दिन वीरेंदर सहवाग ने अहम भूमिका निभाई और जीत की आस जगा दी.सहवाग ने केवल 32 गेंदों में आठ चौकों और दो छक्कों की मदद से अपना अर्धशतक पूरा कर लिया था. वे 83 रन बनाकर आउट हुए थे. फिर आख़िरी दिन गंभीर, सचिन और युवराज ने अच्छी बल्लेबाज़ी कर मैच भारत के नाम कर दिया. इंग्लैड ने पहली पारी में 316 रन बनाए थे लेकिन भारत ने पहली पारी में ख़राब प्रदर्शन किया था और उसकी पूरी टीम केवल 241 रन बना पाई थी. पहली पारी के आधार पर इंग्लैंड 75 रनों से आगे था और दूसरी पारी के 311 मिलाकर उसे 386 रनों की बढ़त मिल गई थी. लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों ने इस चुनौती का बख़ूबी सामना किया और एक समय मुश्किल लग रही जीत को आसान बना दिया. |
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