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स्वर्ण पदक के ज़रिए पिता की तलाश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना हर एथलीट की सबसे बड़ी तमन्ना होती है. लेकिन यह कहानी ऐसे एथलीट की है जिसकी तमन्ना पूरी करने का माध्यम बना ओलंपिक का स्वर्ण पदक. 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली चीन की निशानेबाज़ गुओ वेन जुन 14 वर्ष की थी जब उनके पिता ने उन्हें निशाना साधना सिखाया. जन्म के कुछ ही समय बाद गुओ के माता-पिता अलग हो गए थे. पिता ने पाल-पोसकर बड़ा किया. अप्रैल 1999 में अचानक गुओ के पिता घर छोड़कर चले गए. उस वक़्त गुओ किसी दूसरे प्रांत में जारी एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई थीं. लौटने पर उसे अपने कोच हुआँग यान हुआ के नाम अपने पिता का एक पत्र मिला. लंबा इंतज़ार पत्र में बस इतना लिखा था, “मैं बहुत दूर जा रहा हूँ. मैं चाहता हूँ कि तुम गुओ को अपनी बेटी की तरह रखो और उसे महारत हासिल करने में मदद करो.” उस दिन के बाद गुओ ने अपने पिता को नहीं देखा है. 10 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद भी पिता से नहीं मिल पाने का ग़म गुओ को बेहद खल रहा है. इस बीच, कई बार उन्होंने निशानेबाज़ी छोड़ने के बारे में भी सोचा. कोच हुआँग बार-बार गुओ को उनके लक्ष्य की याद दिलाकर वापस शूटिंग रेंज में लाते रहे. 2005 के सिटी गेम्स में जब गुओ को नौवाँ स्थान मिला तब वे एक बार फिर बहुत निराश हो गईं थीं. उन्होंने खेल के कपड़ों की एक दुकान में नौकरी कर ली. कोच के बहुत समझाने-बुझाने पर उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और 2006 के दोहा एशियाई खेलों में एक स्वर्ण और एक रजत पदक जीता. लेकिन पिता की याद उन्हें अब भी सता रही थी. धैर्य टूटा पिछले साल उन्होंने एक बार फिर पेशेवर खेलों से मुँह मोड़ लिया, लेकिन कोच हुआँग ने धैर्य नहीं खोया.
उन्होंने गुओ से कहा, “अगर तुमने अब शूटिंग छोड़ी तो तुम्हारे पिता बहुत निराश होंगे. गुमशुदा की तलाश में तुम्हारा पदक काम आएगा.” और लापता पिता से मिलने की उम्मीद गुओ को ओलंपिक के पदक मंच तक ले आई. जब गुओ ने स्वर्ण पदक जीता उसके बाद चीन के लाखों इंटरनेट प्रेमी उनके पिता की तलाश में जुट गए. दो दिनों के भीतर ही एक ऑनलाइन सर्चसाइट खुल गई. दस हज़ार लोग दिन-रात इंटरनेट पर बैठे गुओ की तमन्ना पूरी करने की कोशिशों में जुट गए. उम्मीद की किरण कुछ ही दिनों बाद एक लोकप्रिय पोर्टल के चेटरूम में एक संदेश आया. संदेश भेजने वाले ने खुद को गुओ का पिता बताया. संदेश में लिखा था, “मेरी बेटी, पिता की ओर से बधाई. तुम हमेशा ही अपने पिता की शान हो, लेकिन तुम्हारे पिता को तुमसे मिलने में शर्म आ रही है. क्या तुम अपने पिता को समझ पाओगी.” एक मिनट बाद उसी संदेश से पता चला कि संदेश देने वाला व्यक्ति गुआँगगँग के गुआँगज़ू शहर में था. लोगों ने पूछना शुरू किया. “आप कौन हैं? अगर आप गुओ के पिता हैं तो पूरे देश की जनता आपके परिवार को बधाई देना चाहती है. हिम्मत जुटाइए और अपनी बेटी के पास आ जाइए.” अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संदेश देने वाला व्यक्ति वास्तव में गुओ का पिता था या नहीं. तलाश जारी है और पिता से मिलने को आतुर बेटी की उम्मीदें टंगी हैं उस स्वर्ण पदक पर जो गुमशुदा की तलाश का नोटिस बन गया है. |
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