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अमरीका में एकेडेमी खोलेंगे अज़हरुद्दीन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए अब नई कोशिशें की जा रही हैं. अब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन भी अमरीका में क्रिकेट एकेडेमी खोलने जा रहे हैं. एकेडेमी में क्रिकेट के महारथी नए खिलाड़ियों और बच्चों को क्रिकेट के गुर सिखाएँगे. क्रिकेट जगत के कई जाने-माने सितारे और महारथी खिलाड़ी अब अमरीका में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए बढ़-चढ़ कर मदद कर रहे हैं. कई भारतीय और पाकिस्तानी मूल के जाने-माने पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी भी इसमें काफ़ी दिलचस्पी ले रहे हैं. चाहे वे अज़हरुद्दीन हों या वसीम अकरम, प्रवीन आमरे हों या श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद. सभी का मक़सद है कि अमरीका में क्रिकेट के खेल का प्रचार-प्रसार किया जाए और यह सभी मानते हैं कि अमरीका में क्रिकेट को काफ़ी बढ़ावा मिल सकता है. कई भारतीय और पाकिस्तानी मूल के क्रिकेट स्टार अब अमरीका में ऐसे कोचिंग कैंप लगा रहे हैं जो ख़ासकर दक्षिण एशियाई मूल के उभरते हुए खिलाड़ियों को सही दिशा प्रदान करेंगे. इससे भी अहम मक़सद है कि अमरीका में जन्मे दक्षिण एशियाई बच्चों में क्रिकेट के प्रति रूचि पैदा करना. शीर्ष खिलाड़ियों के कैंप कई भारतीय क्रिकेट सितारों ने जैसे अज़हरुद्दीन, जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद, प्रवीन आमरे और रॉबिन सिंह ने अमरीका का दौरा इसी उद्देश्य से किया. इनमें से कुछ खिलाड़ियों ने तो कैंप चालू भी कर दिया है. भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके मोहम्मद अज़हरुद्दीन भी इसी दिशा में काम कर रहे हैं. वह भी जल्द ही इसी प्रकार के कैंप का आयोजन करने जा रहे हैं. इस सिलसिले में अज़हरुद्दीन ने भी अमरीका का चक्कर लगाया और यहाँ पर क्रिकेट के कैंप के आयोजकों के साथ बातचीत भी की. अपनी क्रिकेट एकेडेमी के बारे में अज़हरुद्दीन ने बताया, "मेरी यही योजना है कि अच्छी एकेडेमी शुरू करूँ, अच्छे से अच्छे खिलाड़ी पैदा करूँ और अगर मैं यहाँ अमरीका में क्रिकेट के लिए कुछ कर सका तो मेरी ख़ुशकिस्मती होगी कि मैं क्रिकेट को कुछ वापस दे रहा हूँ." स्थानीय क्रिकेट प्रेमियों के सहयोग से अज़हर, श्रीनाथ और प्रवीन आमरे जैसे महारथी खिलाड़ी अमरीका में क्रिकेट कोचिंग कैंप लगा कर ख़ासकर नई पीढ़ी के दक्षिण एशियाई मूल के बच्चों में इस खेल के प्रति रूचि बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं. अमरीका में रहने वाले दक्षिण एशियाई मूल के खिलाड़ियों को अज़हरुद्दीन यह भी राय देते हैं कि वह बेसबॉल, बास्केटबॉल और फ़ुटबॉल जैसे खेलों में क़िस्मत आज़माने के बजाए क्रिकेट में महारथ हासिल करें. स्तर उनका मानना है कि दक्षिण एशियाई मूल के खिलाड़ियों को अमरीका में अन्य खेलों में फ़िटनेस स्तर तक पहुँचने में बहुत मुश्किल होती है और उसके बाद भी स्पर्धा के कारण वह अन्य खेलों में अच्छा नाम नहीं कमा पाते हैं.
उनके मुताबिक़ दक्षिण एशियाई मूल के खिलाड़ियों को क्रिकेट खेलने में ज़्यादा मुश्किल इसलिए नहीं होगी क्योंकि क्रिकेट में फ़िटनेस स्तर उस हद तक ज़रूरी नहीं है जितना बेसबॉल, बास्केटबॉल और फ़ुटबॉल जैसे तेज़ खेलों में होना ज़रूरी है. अज़हरुद्दीन का कहना है कि अमरीका में क्रिकेट को बढ़ावा देने की ज़रूरत है. अज़हरुद्दीन ने कहा, "मैने देखा है यहाँ अमरीका में बहुत से अच्छे खिलाड़ी हैं जिन्हे अगर थोड़ी ट्रेनिंग मिल जाए तो वह बेहतरीन खिलाड़ी बन सकते हैं. ख़ासकर उभरते हुए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण की ज़रूरत है जिससे अमरीका में क्रिकेट को बढ़ावा देने में बहुत मदद मिलेगी.” अज़हर कहते हैं कि लगभग 25 हज़ार लोग अमरीका में अच्छे स्तर पर क्रिकेट खेलते हैं इसलिए यहाँ लोगों में शौक तो बहुत है. लेकिन उनका कहना है कि बस थोड़ा संगठित तरीक़े से क्रिकेट को बढ़ावा देने की ज़रूरत है. अज़हरुद्दीन कहते हैं, "देखिए 25 हज़ार खिलाड़ियों में से 12-15 हज़ार अच्छे खिलाड़ी निकालना कोई मुश्किल काम नहीं है." लेकिन अमरीका में क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए अज़हर इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अच्छी ग्राउंड और बेहतर सुविधाएँ मुहैया कराना भी ज़रूरी है. उन्होने अमरीकी क्रिकेट संघ से भी अपील की है कि वह क्रिकेट के प्रोत्साहन के लिए काम करें. राजनीति अमरीकी क्रिकेट संघ में व्याप्त राजनीति और भाई-भतीजावाद की निंदा करते हुए अज़हरउद्दीन ने कहा कि खेल में राजनीति आ जाती है तो बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अमरीकी क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों को क्रिकेट के भले की सोचना चाहिए और उनका फ़र्ज़ है कि वह क्रिकेट के प्रचार प्रसार के लिए काम करें. अज़हर ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर अधिकारी क्रिकेट को पीछे ले जा रहे हैं तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए. अज़हर से पहले कई भारतीय खिलाड़ी अमरीका में कोचिंग कैंप लगा चुके हैं. हाल ही में वेंकटेश प्रसाद, प्रवीन आमरे और श्रीनाथ के साथ एक ऐसे ही कैंप का आयोजन करने वाले बद्री रामकी कहते हैं, "भारत में तो हम ख़ुद भी क्रिकेट खेलते थे और क्रिकेट हमें छोड़ती नहीं है. क्रिकेट को भी हम अपनी संस्कृति का ही हिस्सा मानते हैं इसलिए हम अपने बच्चों को क्रिकेट भी सिखाना चाहते हैं. यह ऐसा खेल है जिससे बच्चों को अनुशासन भी सिखाया जा सकता है.” दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में और अन्य क्रिकेट खेलने वाले देशों से ताल्लुक रखने वाले लोगों में जैसे वेस्ट इंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया से आकर अमरीका में बसे लोगों में क्रिकेट को लेकर काफ़ी दिलचस्पी है. लेकिन अमरीका में ही पैदा हुई और पल बढ़ रही नई पीढ़ी को क्रिकेट समझने में थोड़ी मुश्किल होती है क्योंकि अमरीका में बेसबॉल और बास्केटबॉल का ज़्यादा चलन है. और अब अमरीका में क्रिकेट प्रेमियों ने यह बात महसूस की है कि अगर उनके प्यारे खेल क्रिकेट को अमरीका में प्रचलित करना है तो नई पीढ़ी में इस खेल का शौक जगाना ज़रूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब अमरीका में क्रिकेट के कई कोचिंग कैंप शुरू किए जा रहे हैं. जिनका मक़सद है कि नए उभरते हुए खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण दिया जा सके औऱ बच्चों में रूचि पैदा की जा सके. क्रिकेट के प्रेमी माता पिता अपने बच्चों को इन कैंपों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं. न्यू जर्सी में वेंकटेश प्रसाद, प्रवीन आमरे और रॉबिन सिंह ने जब अपने क्रिकेट कोचिंग कैंप शुरू किए तो काफ़ी लोग अपने बच्चों को उसमें शामिल करने के लिए ले आए. उत्साह न्यू जर्सी में कई कैंप लगाए गए क्योंकि वहाँ पिसकाटवे शहर में क्रिकेट के लिए बेहतर मैदान मौजूद है. रॉबिन सिंह, जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद और प्रवीन आमरे के कैंप न्यू जर्सी में पिसकाटवे के मैदान पर ही लगाए गए.
प्रवीन आमरे अपने कैंप के बारे में कहते हैं, "हम तो अपने गुरू का ज्ञान आगे बढ़ा रहे हैं. मैं कोचिंग कैंप में बच्चों को क्रिकेट के खेल की बुनियादी चीज़ें सिखाना शुरू करता हूँ. जैसे किसी भी अच्छे बल्लेबाज़ के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वह बॉल को बल्ले के बीचों-बीच से मारने में निपुण हो. और ऐसे ही अच्छे स्ट्रोक्स खेले जाते हैं.” आमरे मानते हैं कि अमरीका में पैदा हुए बच्चों को क्रिकेट सिखाना आसान काम नहीं है. लेकिन उन्हे उम्मीद है कि जो क्रिकेट खेलने लगेंगे वह उसे पसंद भी करेंगे. कुछ बच्चों के माता-पिता काफ़ी खुश हैं कि उनके बच्चों को जाने-माने खिलाड़ी क्रिकेट की तालीम दे रहे हैं. पाकिस्तानी मूल के राशिद अशरफ कहते हैं, "अमरीका में हमारे बच्चों के लिए और नई नस्ल के लिए क्रिकेट खेलने के लिए पर्याप्त सुविधाएँ नहीं हैं. अच्छे क्रिकेटर बनाना तो बहुत ही मुश्किल काम है. लेकिन क्रिकेट एकेडेमी और कोचिंग कैंपों में मशहूर खिलाड़ियों से कम से कम बच्चों को खेल तो समझ में आएगा." अब न्यूयॉर्क जैसे कुछ शहरों में स्कूलों में भी बच्चों के खेल में क्रिकेट को भी शामिल किया जा रहा है. न्यूयॉर्क के मेयर भी इस खेल की तारीफ़ करते हैं. उनका कहना है कि क्रिकेट अमरीका में सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ खेल है. |
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