BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
रविवार, 02 जुलाई, 2006 को 09:48 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
इस बार सांबा नहीं.........

ब्राज़ील समर्थक
ब्राज़ील की हार पर रो पड़े समर्थक
जर्मनी का फ़्रैंकफ़र्ट हो, ब्राज़ील का साओ पावलो या फिर कोलकाता की कोई छोटी बस्ती- शनिवार को सभी साँस थामे ब्राज़ील और फ़्रांस के बीच विश्व कप का क्वार्टर फ़ाइनल मैच देख रहे थे.

अंदाज़ा तो था कि मैच में मुक़ाबला ज़बरदस्त होगा. हुआ भी लेकिन फ़्रांस की टीम ब्राज़ील पर भारी पड़ी और मौजूदा चैम्पियन को बाहर होना पड़ा.

हर जगह सांबा की तैयारी कर रहे ब्राज़ील समर्थकों को हाथ लगी निराशा. पाँच बार की चैम्पियन ब्राज़ील की टीम ख़िताब की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही थी.

विश्व कप से पहले जिस टीम पर सबसे ज़्यादा सट्टा लगा हो और जिसके खिलाड़ी यूरोप के प्रतिष्ठित क्लबों की आन-बान-शान हों, उसके क्वार्टर फ़ाइनल में ही बाहर हो जाने के पीछे आख़िरकार वजह क्या थी?

फ़ुटबॉल विशेषज्ञ नोवी कपाड़िया का मानना है कि ब्राज़ील को पहले राउंड में बड़ा आसान ग्रुप मिला था और दूसरे राउंड में भी उसके सामने घाना जैसी टीम थी.

यानी ब्राज़ील की चैम्पियन टीम को क्वार्टर फ़ाइनल से पहले मुक़ाबला मिला ही नहीं. इसका असर खिलाड़ियों पर भी पड़ा और उन्होंने क्वार्टर फ़ाइनल से पहले तक अपना 100 फ़ीसदी प्रदर्शन किया ही नहीं.

ब्राज़ील की हार के बारे में अपनी राय देना चाहें, तो साथ में दिए फ़ॉर्म का इस्तेमाल करके लिख भेजिए. अपने विचार वर्चुअल की-बोर्ड का इस्तेमाल करते हुए हिंदी में भेजें.

परीक्षा में नाकाम

जब क्वार्टर फ़ाइनल में ब्राज़ील को फ़्रांस के ख़िलाफ़ कड़ी परीक्षा देनी पड़ी, तो खिलाड़ियों में वो तालमेल दिखा ही नहीं.

सिर झुक गया रोनाल्डो का

भारतीय फ़ुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान पीके बैनर्जी भी मानते हैं कि ब्राज़ील के खिलाड़ी फ़्रांस के आगे नहीं टिके और रोनाल्डिनियो जैसे खिलाड़ी बस देखते ही रह गए.

दूसरी ओर फ़्रांस पर पहले राउंड से ही बाहर होने का ख़तरा मँडरा रहा था. लेकिन टोगो के ख़िलाफ़ निर्णायक मैच में जीत हासिल करने के बाद फ़्रांस की टीम 1998 के फ़ॉर्म में आती दिख गई थी.

दूसरे दौर में स्पेन के ख़िलाफ़ शानदार जीत हासिल करके तो उसने ब्राज़ील को पहले ही बता दिया था कि उन्हें कमज़ोर आँकना ग़लत होगा.

ब्राज़ील की टीम की दूसरी समस्या थी उम्रदराज़ खिलाड़ी. नोवी कपाड़िया मानते हैं कि ब्राज़ील ने 1966 की तरह अपनी टीम में ऐसे खिलाड़ियों को जमा किया जिनमें में ज़्यादातर उम्रदराज़ थे.

नोवी बताते हैं, "काफ़ू, रोबर्तो कार्लोस, रोनाल्डो जैसे 30 से ज़्यादा उम्र के खिलाड़ियों की टीम में भरमार थी. डिफ़ेंस लाइन में तो लूसियो को छोड़कर सभी की उम्र 30 से ज़्यादा थी."

ब्राज़ील के साथ दूसरी समस्या थी उसके स्टार खिलाड़ियों का प्रदर्शन. रोनाल्डो और रोनाल्डिनियो से टीम को काफ़ी उम्मीदें थी. दुनियाभर की निगाह दो बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रह चुके रोनाल्डिनियो पर थी.

लेकिन रोनाल्डो के साथ-साथ रोनाल्डिनियो ने भी काफ़ी निराश किया. नोवी कपाड़िया कहते हैं, "इस विश्व कप में तो ऐसा लगा ही नहीं कि रोनाल्डिनियो दो बार लगातार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं. वे काफ़ी थके हुए नज़र आ रहे थे और उनमें लय-ताल की कमी भी थी."

 इस विश्व कप में तो ऐसा लगा ही नहीं कि रोनाल्डिनियो दो बार लगातार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे हैं. वे काफ़ी थके हुए नज़र आ रहे थे और उनमें लय-ताल की कमी भी थी
नोवी कपाड़िया

रोनाल्डो ने विश्व कप में सबसे ज़्यादा गोल करने का रिकॉर्ड ज़रूर बनाया लेकिन उनका बढ़ता वजन उनके लिए चिंता का विषय है. उनमें वो क्षमता नहीं दिखाई दी, जो पिछले विश्व कप में थी.

इसके अलावा एड्रियानो ने भी निराश किया. काका ने कुल मिलाकर अच्छा खेल दिखाया लेकिन फ़्रांस के ख़िलाफ़ मैच में वे पूरी तरह फ़िट नहीं थे.

ब्राज़ील की डिफ़ेंस लाइन ने भी काफ़ी निराश किया. क्वार्टर फ़ाइनल में लगातार फ़्रांस के आक्रमण को रोकने में नाकाम रहे ब्राज़ील के डिफ़ेंडर.

ब्राज़ील के कोच ने युवा डिफ़ेंडर्स को मौक़ा नहीं दिया. काफ़ू और रोबर्तो कार्लोस ज़्यादा प्रभावी नहीं थे. फ़्रांस के फ़्रैंक रिबेरी ने रोबर्तो कार्लोस की नाक में दम कर दिया था.

वैसे जब टीम ख़राब प्रदर्शन करती है तो टीम का कोच भी सवालों के घेरे में आता है. ब्राज़ील के कोच अल्बर्तो परेरा ऐसे कोच माने जाते हैं, जो ज़्यादा प्रयोग में विश्वास नहीं करता.

समस्या

उन्होंने जो सोच लिया, वही करते हैं. चाहे इसका अंजाम जो भी हो. नोवी कहते हैं, "परेरा के साथ समस्या ये रही कि उन्होंने जिन खिलाड़ियों के बारे में सोच लिया, उन्हीं को बार-बार मैदान पर उतारते रहे. चोट वाले खिलाड़ी भी खेलते रहे जैसे काका. इमर्सन के ना होने का भी नुक़सान हुआ."

रोनाल्डिनियो ने निराश किया

इस हार के साथ ही ब्राज़ील की इस पीढ़ी के कई खिलाड़ी शायद अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल को अलविदा कह दें. डीडा, काफ़ू, रोबर्तो कार्लोस, युवान, इमर्सन, रोनाल्डो और शायद एक-दो और खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल को अलविदा कह दें.

इस विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन न कर पाने के कारण ब्राज़ील के खिलाड़ियों को यूरोपीय क्लब फ़ुटबॉल में भी नुक़सान हो सकता है. फ़ुटबॉल विशेषज्ञ नोवी कपाड़िया मानते हैं कि यूरोपीय क्लबों में ब्राज़ील के खिलाड़ियों की मांग कम होगी.

नोवी मानते हैं कि रोनाल्डो को शायद स्पेन का क्लब रियाल मैड्रिड छोड़कर इटली जाना पड़े. क्योंकि वे रियाल मैड्रिड में पहले से ही आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें अपने बढ़ते वजन पर भी ध्यान देना होगा.

इस विश्व कप में ब्राज़ील की हार उनके स्टार खिलाड़ियों और प्रबंधकों के लिए सबक है. जितनी जल्दी वे सबक सीख लें, ब्राज़ील के लिए उतना ही अच्छा होगा.


नाम
आपका पता
किस देश में रहते हैं
ई-मेल पता
टेलीफ़ोन नंबर*
* आप चाहें तो जवाब न दें
क्या कहना चाहते हैं
आपकी राय के लिए धन्यवाद. हम इसे अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश करेंगे, लेकिन कुछ परिस्थितियों में शायद ऐसा संभव न हो. ये भी हो सकता है कि हम आपकी राय का कुछ हिस्सा ही इस्तेमाल कर पाएँ.
ज़िनेदिन ज़िदानबूढ़ा नहीं हुआ शेर
ज़िनेदिन ज़िदान ने बेहतरीन खेल दिखाकर आलोचकों का मुँह बंद कर दिया है.
बांग्लादेशमैच न देख पाए तो..
बांग्लादेश में जब जर्मनी-अर्जेटीना मैच के दौरान बिजली गुल हुई तो....
बेकमदस नहीं सात
इस बार विश्वकप में ज़्यादातर चर्चित खिलाड़ियों की जर्सी का नंबर सात है.
बच्चेवो जो बनाते हैं फ़ुटबॉल
मेरठ के फ़ुटबॉल बनाने वाले बच्चों की कहानी
हॉलैंड समर्थकहाफ़ पैंट में मैच
हॉलैड के समर्थकों को हाफ़ पैंट में ही मैच देखना पड़ा क्योंकि....
इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>