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शुक्रवार, 30 जून, 2006 को 21:42 GMT तक के समाचार
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जर्मनी पैनल्टी शूटआउट में जीता
जर्मनी बनाम अर्जेंटीना
दोनों ही टीमों का खेल ज़ोरदार रहा
विश्व कप के क्वार्टरफाइनल मुक़ाबले में जर्मनी ने एक रोमांचक मैच में मज़बूत टीम अर्जेंटीना को हरा दिया हालाँकि हार-जीत का फ़ैसला करने के लिए पैनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया.

सेमीफाइनल में जर्मनी का मुक़ाबला इटली से होगा जिसने दूसरे क्वार्टर फाइनल में यूक्रेन को 3-0 से हराया.

इससे पहले निर्धारित डेढ़ घंटे के समय में दोनों टीमें 1-1 गोल से बराबर रहीं जिसके बाद आधा घंटे का अतिरिक्त समय दिया गया लेकिन उसमें भी कोई टीम गोल नहीं कर पाई.

फिर हार-जीत के लिए पैनल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया जिसमें जर्मनी ने 4-2 से जीत हासिल की.

जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल भी मैच देखने के लिए स्टेडियम में मौजूद थीं और लगा कि साँस थामे अपनी टीम की जीत देखने को आतुर थीं. और जब हार-जीत का फ़ैसला हुआ तो अन्य जर्मन दर्शकों के साथ ही मर्केल भी जोश से उछल पड़ीं.

हार-जीत का फ़ैसला पैनल्टी शूटआउट के ज़रिए होने के बाद किसी बात को लेकर दोनों टीमों के कुछ खिलाड़ियों में कुछ तू-तू-मैं-मैं भी हुई और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों को समझाने-बुझाने में सुरक्षा कर्मियों को ख़ासी मशक्कत करनी पड़ी.

जर्मनी के जेंस लेहमन ने उस समय जीत की उम्मीद बढ़ा दी जब उन्होंने अयाला का पैनल्टी शूटआउट गोल होने से बचा लिया. इतना ही नहीं लेहमन ने ईस्टेबेन कैमबियासो के शूटआउट पर भी गोल नहीं होने दिया जिसके बाद तो बस फ़ैसला हो ही गया.

पैनल्टी शूटआउट में जर्मनी की तरफ़ से ओलीवर नौविल्ले, मिशेल बलाक, लुकास पुडोल्स्की और टिम बोरोव्स्की ने पैनल्टी शूटआउट लगाए.

अर्जेंटीना की तरफ़ से जूलियो क्रूज़ और मैक्सी रोड्रीग्ज़ पैनल्टी शूटआउट पर गोल करने में कामयाब रहे.

काँटे की टक्कर

इस मैच में दोनों ही टीमें ख़ासी मज़बूत थीं लेकिन पूरे खेल में जर्मनी के खिलाड़ी खेल पर छाए रहे और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के खेल को देखकर लगा कि वो कहीं कमतर पड़ रहे हैं.

हालाँकि पहला गोल अर्जेंटीना की तरफ़ से अयाला ने किया और उसके लिए दर्शकों को 49 मिनट तक का इंतज़ार करना पड़ा.

जेंस लेहमन
लेहमन ने पैनल्टी शूटआउट में दो गोल बचाकर जर्मनी को जीत दिलाई

यह बहुत सीधा से गोल था. जुआँ रोमन रिक्वेल्मे ने पैनल्टी पर जो किक लगाई वो सीधे अयाला तक पहुँची और गोल नेट के पास खड़े अयाला ने इउसे बड़ी आसानी से हैडर के ज़रिए नेट में डाल दिया.

जर्मनी पर इस गोल के बाद दबाव काफ़ी बढ़ गया और ऐसा लगा कि मेज़बान टीम के खिलाड़ी जैसे गोल करने के लिए छटपटाने लगे ताकि स्कोर बराबर तो कर दिया जाए.

जर्मनी के खिलाड़ियों को गोल करने के कई मौक़े मिले लेकिन अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने भी काफ़ी मज़बूत खेल दिखाया और जर्मनी को स्कोर बराबर करने के लिए तब तक इंतज़ार करना पड़ा जब क्लोज़े ने 80वें मिनट में गोल किया.

मिरोस्लाव क्लोज़े ने यह गोल हैडर के ज़रिए किया जिसने दोनों टीमों को अतिरिक्त समय में खेलने के लिए मजबूर किया.

बलाक ने सेंटर में खड़े बोरोव्स्की को गेंद दी जिसने हैडर के ज़रिए गेंद क्लोज़े को दी और उन्होंने भी हैडर के ज़रिए ही बड़ी चतुराई से गोल कर दिया.

पोलैंड मूल के स्ट्राइकर क्लोज़ का यह विश्व कप का पाँचवाँ गोल था और उन्होंने इस गोल के साथ ही बैक अप गोलकीपर लियोनार्दो फ्रेंको को पीछे छोड़ दिया है.

मध्यांतर तक के खेल में लगभग दो तिहाई समय तक गेंद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के पास रही और खेल की रफ़्तार कुछ धीमी रही जिसकी वजह से जर्मनी के खिलाड़ियों में कुछ हताशा भी नज़र आई.

लेकिन मेज़बान टीम को 16वें मिनट में गोल करने का एक सुनहरी मौक़ा तब मिला जब बलाक ने हैडर के ज़रिए शॉट लगाया मगर गेंद ऊपर से होकर निकल गई.

यह एक क्लासिक मैच था जिसके लिए बहुत से फुटबॉल प्रेमियों ने उम्मीद लगाई होगी लेकिन मैच से बहुत निराशा भी हुई. स्टेडियम में बैठे लगभग 72 हज़ार दर्शकों में भी उत्साह की कमी नज़र आई.

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