BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 06 मार्च, 2006 को 21:27 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
'माफ़ी नहीं माँगी तो अदालत जाऊँगा'
डालमिया
डालमिया ने आरोपों को निराधार बताया है
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया पर बोर्ड के कामकाज में आर्थिक अनियमितता बरतने के आरोप लगे हैं.

उन्हें बीसीसीआई ने कानूनी नोटिस भेजकर उनके कार्यकाल में हुए लेनदेन से संबंधित कुछ सवालों के जवाब माँगे है.

बीबीसी के मलय नीरव ने क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया से बातचीत की.

आप पर गंभीर वित्तीय अनियमित्ताओं के आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों के जवाब में आप क्या कहना चाहते हैं ? क्या तथ्य आपके पास हैं जिनके आधार पर आप कह सकते हैं कि आरोप गलत हैं.

इन्होंने तीन आरोप लगाए हैं. पहला ये कि 1996 के वर्ल्ड कप में चालीस लाख डॉलर मिलने चाहिए थे, वे रुपए कम आए हैं तो उसके लिए हमें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. उनका कहना है कि ये रुपया आया नहीं और आया तो उसे आपने रख लिया. उसमें कोई तथ्य नहीं है और न ही उसके डिटेल्स दिए गए हैं. मैंने उन्हें कहा है कि आप 40 लाख तो क्या चार रुपए के भी हेराफेरी का मामला दिखाएं नहीं तो मॉफी माँगे.

दूसरा आरोप है कि 65 हज़ार रुपए हर महीने जो बैंक से निकाले जाते हैं उस पर उन्होंने सवाल उठाए हैं. वह तीन-चार कार्यालय कर्मचारियों के आने-जाने के खर्च और भत्ते इत्यादि के लिए खर्च होते हैं.

 ये अपनी हरकरत से बाज़ नहीं आए और माफी नहीं माँगी तो सारा मामला कोर्ट में चला जाएगा
जगमोहन डालमिया

तीसरे वे ये कह रहे थे कि आपने जब हमें एकाउंट भिजवाया है तो आपने क्रिकेट एसोसियशन बंगाल की तरफ से हमें चेक क्यों दी. ये तीन उनके सवाल हैं.

क़ानूनी डिटेल्स आने पर ही तथ्य मालूम होंगे क्योंकि आजकल हर कोई दूसरे पर आरोप लगाता है. किसी को ये नहीं समझ में आता कि इसकी बात सच है और किसी झूठ. मीडिया भी कंफ्यूज्ड है और सुनने वाला भी.

आरोप गंभीर है, आरोपों के जबाब आपके पास हैं और उन आरोपों को सुनकर चुप रह जाना भी तो सही नहीं है. क्या आप किसी क़ानूनी कार्रवाई की बात सोच रहे हैं?

क़ानूनी कार्रवाई ज़रूर करूँगा और इसकी घोषणा भी कर दी है कि अगर ये अपनी हरकरत से बाज़ नहीं आए और माफी नहीं माँगी तो सारा मामला कोर्ट में चला जाएगा.

कहा जा रहा है कि शरद पवार जी जब से अध्यक्ष बने और उनके लोग बीसीसीआई में आई तब से बीसीसीआई की आमदनी काफी बढ़ गई है. दावा किया जा रहा है कि बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ गई है.

अगर समय पर थोड़ा भी ध्यान दें तो समझ में आ जाएगा कि ये बिलकुल बेकार बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि पारदर्शिता रखते हैं और जो सबसे ऊँची बोली होती है उसे ठेका दे देते हैं.

अगर हमारे समय में 240 करोड़ आता था जो श्री मुथैया ने अंतिम बार दिया था जो चार वर्ष तक रहा और फिर वर्ष 2004 में जब हमने टेंडर मंगाया था तभी 1400 करोड़ आया था अब इनके पास तीन हज़ार करोड़ आया तो जैसे-जैसे बाज़ार में बोली बढ़ रही है, वैसे-वैसे रकम भी बढ़ती जा रही है.

इसमें ये कैसा श्रेय ले रहे हैं. अगर 100 रुपए की बोली लगे और उसे बढ़ाकर ये 120 रुपया करा दें तब तो श्रेय लें. अगर 100 की बोली लगी और 100 ही मिले फिर पारदर्शिता और श्रेय की बात कहाँ से आई.

क्या यह तय है कि आप अदालत में जाएँगे?

अगर ज़रूरी हुआ तो ज़रूर जाएंगे.

शरद पवार जी से आपकी कोई बात हुई है?

नहीं, मेरी बात नहीं हुई लेकिन श्री पवार ने कार्यसमिति की बैठक में बहुत ही अच्छे तरीके से व्यवहार किया और उन्होंने ही सात दिन का समय दिया था. उनके साथी चाहते थे कि मुझे तुरंत नोटिस दे दिया जाए. लेकिन उन्होंने काफी शालीनता और समझदारी से काम लिया.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>