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डूंगरपुर ने उठाई डालमिया पर उँगली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष राजसिंह डूंगरपुर ने कहा है कि उनका अनुमान है कि क्रिकेट टीम के कोच ग्रेग चैपल का ई-मेल जगमोहन डालमिया ने लीक किया है. बीबीसी के साथ बातचीत में डूंगरपुर ने कहा कि अगर ग्रेग चैपल का ई-मेल जगमोहन डालमिया और गौतमदास गुप्ता के पास भेजा गया था, तो ये बंगाली अख़बार में कैसे आ गया. डूंगरपुर ने कहा कि बंगाली अख़बारों के साथ संबंध या तो डालमिया जी के हैं या फिर गौतमदास गुप्ता के. उन्होंने कहा कि ई-मेल का हिस्सा भी चुनकर लीक हुआ है और इससे कप्तान सौरभ गांगुली के प्रति सहानुभूति हो रही है. डूंगरपुर ने बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि ये उनका दावा नहीं बल्कि उनका आकलन है. उन्होंने माना कि जगमोहन डालमिया के साथ उनका मतभेद है लेकिन इसमें उनका कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है. राजसिंह डूंगरपुर ने बोर्ड के अधिकारियों की भी आलोचना की और कहा कि वे कप्तान सौरभ गांगुली के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट की परंपरा को नुक़सान पहुँचा रहे हैं. सवाल डूंगरपुर ने कहा कि सौरभ गांगुली को कप्तानी के पद पर बने नहीं रहना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि गांगुली कैसे कप्तान बने हुए हैं. डूंगरपुर ने कहा, "जो आदमी विकेट देख कर नहीं खेलता है वह भारत का कप्तान कैसे हो सकता है. सौरभ गांगुली भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते. लेकिन वे डालमिया साहब के दम पर अपनी मनमानी कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि निराशा की बात ये भी है कि इस सारे मामले में कोच ग्रेग चैपल को एक प्यादे की तरह इस्तेमाल किया गया. दूसरी ओर बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और जगमोहन डालमिया के क़रीबी माने जाने वाले कमल मोरारका ने कहा कि इस समय डूंगरपुर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वे हर चीज़ के लिए डालमिया को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. मोरारका ने कहा, "राजसिंह डूंगरपुर की इस समय जो मानसिक हालत है. उसमें मैं समझता हूँ कि ये तो क्रिकेट से जुड़ा हुआ मामला है, वे किसी तरह अगर जोड़ सकेंगे तो हरिकेन कैटरीना की ज़िम्मेदारी भी डालमिया साहब पर डालना चाहेंगे." मोरारका ने भी माना कि ड्रेसिंग रूम की बातें बाहर नहीं आनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बातें जो भी हो वे गुप्त रहनी चाहिए. प्रेस में ज़ाहिर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राजसिंह डूंगरपुर साहब इस समस्या को और जटिल बना रहे हैं. मोरारका ने कहा कि कोच और कप्तान के बीच मतभेद हो सकते हैं. लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि हरभजन सिंह को इस मामले पर बयान नहीं देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि बोर्ड के शीर्ष अधिकारी इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं. |
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