BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 23 सितंबर, 2005 को 07:43 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
हंगामे के बाद बोर्ड की बैठक स्थगित
रणबीर सिंह महेंद्रा
माना जा रहा है कि इस बार रणबीर सिंह महेंद्रा की राह आसान नहीं है
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) दो दिन के राजनीतिक दावपेचों के बाद दो महीने के लिए स्थगित कर दी गई है.

बोर्ड के अधिकारियों ने शुक्रवार को कोलकाता में पत्रकारों को बताया कि बोर्ड में नियंत्रण वाले गुट और उसका विरोध करने वाले गुटों में समझौते के बाद बैठक दो महीने के लिए स्थगित की गई है.

विरोधी गुट का नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार कर रहे हैं.

बोर्ड के चेयरमैन रणबीर सिंह महेंद्रा ने पत्रकारों को बताया कि बैठक 30 नवंबर तक स्थगित की गई है और इस अवधि के भीतर ही पदाधिकारियों के लिए चुनाव कराए जाएंगे.

महेंद्रा ने बताया कि बोर्ड ने शरद पवार को मार्केटिंग कमेटी में शामिल करने का फ़ैसला किया है. इस कमेटी को काफ़ी शक्तिशाली माना जाता है.

लेकिन पवार इतने भर से ख़ुश नहीं हुए हैं वह महेंद्रा के स्थान पर बोर्ड का चेयरमैन बनना चाहते हैं.

पर्यवेक्षक मुद्दा

गुरुवार को शरद पवार समर्थकों की ओर से अदालत का सहारा लिया गया. शुक्रवार को जगमोहन डालमिया के समर्थकों ने कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.

कालीघाट क्रिकेट क्लब और कर्नाटक एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को अदालत में एक याचिका दायर की गई कि 30 वोटों के लिए तीन पर्यवेक्षकों की आवश्कता नहीं है.

उन्होंने अदालत से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव पर रोक लगाने का अनुरोध किया.

कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक बोर्ड के अध्यक्ष पद के चुनाव पर रोक लगा दी.

क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष पद के लिए मौजूदा अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा और कृषि मंत्री शरद पवार आमने सामने हैं. महेंद्रा को डालमिया का समर्थन हासिल है.

शुक्रवार को जब बोर्ड की बैठक शुरू हुई तो कोलकाता हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त तीनों पर्यवेक्षक-केएन सिंह, एमएम पुंछी और एससी सेन वहाँ उपस्थित थे.

क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष को देश की 30 एसोसिएशन के प्रतिनिधि चुनते हैं और ऐसे संकेत हैं कि इस बार कृषि मंत्री शरद पवार का पलड़ा भारी है.

इसके पहले बोर्ड की बैठक को लेकर भारी दावपेंच दिखाए गए. बुधवार को एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश एससी सेन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. इस नियुक्ति को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने चुनौती दे दी थी.

एसोसिएशन की माँग थी कि बोर्ड चुनावों के लिए एक नहीं बल्कि तीन पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएँ ताकि किसी भी एसोसिएशन को पिछली बार की तरह अयोग्य क़रार न दिया जा सके.

बाद में हाईकोर्ट ने दो अन्य पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, केएन सिंह और एमएम पुंछी को बीसीसीआई चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया था.

चुनावी गणित

ग़ौरतलब है कि पिछली बार कृषि मंत्री शरद पवार अध्यक्ष पद के चुनाव में रणबीर सिंह महेंद्रा से एक वोट से हार गए थे. रणबीर सिंह महेंद्रा का समर्थन जगमोहन डालमिया कर रहे थे.

शरद पवार
इस बार शरद पवार की स्थिति मज़बूत मानी जा रही है

बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और डालमिया समर्थक माने जाने वाले कमल मोरारका ने दावा किया है कि इस बार संख्या बल उनके पक्ष में है.

इस बार रणबीर सिंह महेंद्रा के लिए चुना जाना आसान नहीं होगा. पिछली बार शरद पवार को 15 वोट मिले थे और ये सभी पश्चिमी क्षेत्र से थे.

हालाँकि महाराष्ट्र एसोसिएशन को अयोग्य क़रार दे दिया गया था और इस पर विवाद खड़ा हो गया था.

शरद पवार को सरकारी संस्थाओं- रेलवे, सर्विसेज़ और विश्वविद्यालय के वोट मिले थे.

माना जा रहा है कि पवार इस बार भी इनके वोट पा जाएँगे. लेकिन हैदराबाद एसोसिएशन की स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वो किस तरफ़ जाएँगे.

राजस्थान की एसोसिएशन में भी परिवर्तन हुआ है और वहाँ किशोर रुंगटा के स्थान पर ललित मोदी आ गए हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश में भी परिवर्तन हुआ है.

प्रेक्षकों का मानना है कि इन परिवर्तनों से शरद पवार खेमे की स्थिति मज़बूत हुई है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>