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क्रिकेट बोर्ड का चुनाव राजनीति में उलझा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष का चुनाव क़ानूनी दांवपेंच में फंसता नज़र आ रहा है. अभी ये तय नहीं है कि शुक्रवार को बोर्ड की आम बैठक हो सकेगी या नहीं. वर्तमान अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा और उनको चुनौती देने वाले शरद पवार के गुटों की ओर से अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं. बोर्ड के अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा का कहना है कि उन्होंने वार्षिक आम बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है. लेकिन शरद पवार गुट का कहना है कि पर्यवेक्षकों के आने के बाद अध्यक्ष पद का चुनाव हो जाना चाहिए. कोलकाता हाई कोर्ट ने जिन पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया है, उनमें से दो कोलकाता पहुँच चुके हैं. स्थिति पवार खेमे के पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष राजसिंह डूँगरपुर ने बीबीसी को बताया कि पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त सुप्रीम कोर्ट के दोनो पूर्व न्यायाधीशों ने कोलकाता जाकर बैठक की और कहा कि अगले दिन यानी शुक्रवार को बैठक होगी. डूँगरपुर ने कहा,"डालमिया साहब की तरफ़ से टालमटोल की काफ़ी कोशिश हुई लेकिन पर्यवेक्षकों ने कहा कि अगले दिन दस बजे चुनाव करवाया जाएगा". उधर वर्तमान अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा का कहना है कि पर्यवेक्षकों को बैठक बुलाने का अधिकार ही नहीं है. उन्होंने कहा,"संविधान के अनुसार तो बोर्ड की बैठक केवल अध्यक्ष बुला सकता है, जब मैंने बैठक बुलाई ही नहीं तो बैठक हो कैसे सकती है". महेंद्रा ने कहा कि दूसरी तरफ़ जब उन्होंने बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी तो बोर्ड के कई लोग वापस दिल्ली लौट गए. उल्लेखनीय है कि महेंद्रा और डालमिया समर्थक समझे जानेवाले दिल्ली बोर्ड के अध्यक्ष अरूण जेटली गुरूवार को कोलकाता से दिल्ली लौट गए. ऐसी अटकलें हैं कि शायद अरूण जेटली इस बारे में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाने के इरादे से दिल्ली गए हैं. पर्यवेक्षक कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरूवार को भारत के दो पूर्व मुख्य न्यायाधीशों, केएन सिंह और एमएम पुंछी को बीसीसीआई चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. इसके पहले हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अवकाशप्राप्त न्यायाधीश एससी सेन को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था. इस नियुक्ति को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने चुनौती दी थी. एसोसिएशन की माँग थी कि बोर्ड चुनावों के लिए एक नहीं बल्कि तीन पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएँ ताकि किसी भी एसोसिएशन को पिछली बार की तरह अयोग्य क़रार न दिया जा सके. अदालत ने आदेश दिया है कि तीनों पर्यवेक्षक चुनाव शुरू होने से पहले योग्यता संबंधी विवादों का फ़ैसला करेंगे. माना जा रहा है कि अदालत में यह मामला शरद पवार के समर्थकों की ओर से दायर किया था. जोड़-तोड़ ग़ौरतलब है कि पिछली बार कृषि मंत्री शरद पवार अध्यक्ष पद के चुनाव में रणबीर सिंह महेंद्रा से एक वोट से हार गए थे. रणबीर सिंह महेंद्रा का समर्थन जगमोहन डालमिया कर रहे थे.
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और डालमिया समर्थक माने जाने वाले कमल मोरारका ने दावा किया है कि इस बार संख्या बल उनके पक्ष में है. इस बार रणबीर सिंह महेंद्रा के लिए चुना जाना आसान नहीं होगा. पिछली बार शरद पवार को 15 वोट मिले थे और ये सभी पश्चिमी क्षेत्र से थे. हालाँकि महाराष्ट्र को एसोसिएशन को अयोग्य क़रार दे दिया गया था और इस पर विवाद खड़ा हो गया था. शरद पवार को सरकारी संस्थाओं- रेलवे, सर्विसेज़ और विश्वविद्यालय के वोट मिले थे. माना जा रहा है कि पवार इस बार भी इनके वोट पा जाएँगे. लेकिन हैदराबाद एसोसिएशन की स्थिति स्पष्ट नहीं है कि वो किस तरफ़ जाएँगे. राजस्थान की एसोसिएशन में भी परिवर्तन हुआ है और वहाँ किशोर रुंगटा के स्थान पर ललित मोदी आ गए हैं. साथ ही उत्तर प्रदेश में भी परिवर्तन हुआ है. प्रेक्षकों का मानना है कि इन परिवर्तनों से शरद पवार खेमे की स्थिति मज़बूत हुई है. |
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