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क्रिकेट प्रसारण विवाद के हल की उम्मीद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई) के अध्यक्ष रणबीर सिंह महिंद्रा ने कहा है कि टीवी प्रसारण पर जारी विवाद के बावजूद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सिरीज़ अपने समय पर ही होगी. रणबीर सिंह महिंद्रा ने कहा, "हम इस बारे में आश्वस्त हैं कि समय रहते सब कुछ तय कर लिया जाएगा. मामला अदालत में है. लेकिन अदालत से कोई भी निर्देश आने के बाद सब कुछ समय से कर लिया जाएगा." टीवी प्रसारण का मामला अभी मद्रास हाईकोर्ट में लंबित है. बोर्ड के फ़ैसले को अदालत में चुनौती दे रहे ज़ी टेलीफ़िल्म्स ने भी समझौते की पेशकश की है. ज़ी टीवी ने अब सभी मैच दिखाने की पेशकश की है. ज़ी का कहना है कि उसे सिर्फ़ प्रोडक्शन पर होने वाला ख़र्च चाहिए. दूसरी ओर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने प्रसारण अधिकार पर चल रहे विवाद पर चिंता व्यक्त की है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बयान में कहा कि अगर मैच नहीं होते, तो क्रिकेट प्रेमियों को काफ़ी निराशा होगी. पीसीबी ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की है कि अगर सिरीज़ रद्द होती है तो दोनों क्रिकेट बोर्डों को भारी नुक़सान भी हो सकता है. पाकिस्तान की टीम तीन टेस्ट और छह एक दिवसीय मैच खेलने के लिए 28 फरवरी को भारत पहुँच रही है. विवाद ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका के दौरे के दौरान मैच दूरदर्शन पर प्रसारित किए गए थे जबकि प्रोडक्शन का काम टेन स्पोर्ट्स ने संभाला था लेकिन इस व्यवस्था से बीसीसीआई को लगभग 150 करोड़ रुपए का नुक़सान उठाना पड़ा था. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॉउंसिल के नियमों के अनुसार मैचों का प्रसारण आवश्यक है. टीवी तीसरे अंपायर के लिए भी ज़रूरी है. भारतीय क्रिकेट टीम के घरेलू मैचों के टेलीविज़न प्रसारण अधिकारों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ज़ी टेलीफ़िल्म्स की अपील ख़ारिज कर दी है. प्रसारण के अधिकारों का चार साल का अनुबंध ज़ी नेटवर्क्स को दिया गया था, जिसपर ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स ने आपत्ति जताई थी. इसके बाद क़ानूनी लड़ाई शुरु हो गई क्योंकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने ज़ी नेटवर्क्स का अनुबंध रद्द कर दिया और ज़ी नेटवर्क्स न्यायालय में चला गया. ज़ी नेटवर्क्स ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया. इस फ़ैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बीसीसीआई स्वायत्तता प्राप्त संस्थान है और सरकार का उस पर केवल निरीक्षक के तौर पर ही नियंत्रण है. लेकिन ज़ी ने तर्क रखा था कि बीसीसीआई ने ज़ी के मूल अधिकारों का उल्लंघन किया है क्योंकि वह सरकार द्वारा संचालित संस्था है और उसका जो भी कहना है उसे सरकार का फ़ैसला ही माना जाए. |
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