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प्रसारण अधिकारों के विवाद में नया रुख़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट टीम के घरेलू मैचों के टेलीविज़न प्रसारण अधिकारों को लेकर उठा विवाद थमता नहीं दिख रहा है. प्रसारण के अधिकारों का चार साल का अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) ज़ी नेटवर्क्स को दिया गया था, जिस पर आपत्ति व्यक्त करते हुए ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स ने मुंबई उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर दी. ईएसपीएन का कहना था कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए ये अनुबंध ज़ी नेटवर्क्स को दिया है. आज अदालत ने एक नया विकल्प रखा कि अगर दोनों पक्षों को मंज़ूर हो तो उसके पास नए टेंडर भेजे जा सकते हैं. यानी अब अगर ज़ी नेटवर्क्स मान जाता है तो नए सिरे से बोलियाँ लगाई जाएँगी. इस पर विचार के लिए ज़ी नेटवर्क्स ने मंगलवार तक का समय माँगा है जिससे वह इस बात पर विचार कर सके. ज़ी ने ये प्रसारण अधिकार 30 करोड़ 80 लाख डॉलर की क़ीमत की बोली के साथ ख़रीदे थे. इससे पहले ये अधिकार सरकारी चैनल दूरदर्शन के पास था. दूरदर्शन को चार वर्ष पहले ये अधिकार जिस क़ीमत पर मिले थे इस बार ज़ी ने उससे छह गुनी ऊँची बोली लगाई है. बीसीसीआई भी राज़ी अब अगर ज़ी नेटवर्क्स तैयार हो जाता है तो मुंबई उच्च न्यायालय की खंडपीठ के सामने बुधवार को सीलबंद लिफ़ाफ़ों में दोनों पक्ष अपने टेंडर रखेंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो अगले गुरुवार को इस पर बहस होगी. ईएसपीएन का पक्ष रख रहे वकील अजय बहल के अनुसार ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स ने इस बात के संकेत अदालत को दे दिए हैं कि वो इस बात के लिए तैयार है जबकि ज़ी ने विचार के लिए समय माँगा है. ज़ी नेटवर्क्स के वकील अपने संगठन का विचार ईएसपीएन के वकील को मंगलवार तक बता देंगे. बहल ने स्पष्ट किया कि अब बीसीसीआई का कहना है कि वह इस बात के लिए तैयार है जहाँ दोनों ही टेलीविज़न चैनल अदालत में अपनी बोलियाँ रखें और ऊँची बोली लगाने वाले को प्रसारण अधिकार दे दिए जाएँ. बहल का कहना है कि इससे मामले को जल्दी ही सुलझाने में मदद मिलेगी. ईएसपीएन ने दो आधारों पर बोर्ड के फ़ैसले को चुनौती दी थी. उसका कहना था कि ज़ी इस बोली में हिस्सा लेने लायक़ ही नहीं है और बोर्ड ने टेंडर की अपनी ही प्रक्रिया का उल्लंघन किया है. मगर अब यदि इस बात पर सहमति होती है कि नई बोलियाँ लगाई जाएँ तो ईएसपीएन ये दावा नहीं कर सकेगा कि ज़ी नेटवर्क्स इसमें शामिल होने लायक़ ही नहीं है. |
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