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प्रसारण अधिकारों को लेकर विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भारतीय टीम के घरेलू टेस्ट और एकदिवसीय मैचों की सिरीज़ के टेलीविज़न प्रसारणों का अधिकार ज़ी नेटवर्क्स को देने का फ़ैसला किया है. ज़ी नेटवर्क्स को ये अनुबंध ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स को क़ीमत के मामले में पछाड़ने की वजह से दिया गया है. मगर इस फ़ैसले से दूसरे पक्ष में कुछ नाराज़ग़ी भी है. ईएसपीएन का दावा है कि क्रिकेट बोर्ड ने टेंडर की अपनी ही प्रक्रिया का उल्लंघन किया है. ईएसपीएन के प्रबंध निदेशक रिक डोवी ने कहा, "हमें लगता है कि पूरी प्रक्रियाएँ प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन करती हैं." ज़ी ने जितने धन का प्रस्ताव रखा है वो उस क़ीमत का चार गुना है जो पिछले चार वर्षों के लिए अनुबंध पाए दूरदर्शन ने दिया था. ज़ी ने पहले 14 करोड़ 60 लाख पाउंड का प्रस्ताव रखा था और बाद में जब ईएसपीएन ने अपने शुरुआती 12 करोड़ 90 लाख पाउंड का प्रस्ताव बढ़ाकर 17 करोड़ 30 लाख पाउंड का कर दिया तो ज़ी ने भी उसके बराबर ही बोली लगा दी. बोर्ड के अध्यक्ष डालमिया ने कहा, "ज़ी ने सबसे ऊँची बोली लगाई है इसलिए अधिकार उन्हें ही मिलेगा मगर उन्हें कुछ शर्तों का पालन करना होगा." कंपनी से कहा गया है कि वे इस सप्ताह के मध्य तक लगभग एक करोड़ 12 लाख पाउंड की रकम अदा करें और चार करोड़ 20 लाख पाउंड की रकम उन्हें 15 सितंबर तक जमा करानी होगी. बाक़ी राशि इस अनुबंध के बीच की समयावधि में जमा करानी होगी. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसार ज़ी को इससे 11 करोड़ 20 लाख पाउंड का फ़ायदा होगा. |
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