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राजनीति में उलझता बीसीसीआई चुनाव

जगमोहन डालमिया
बताया जा रहा है कि डालमिया का गुट अपने समर्थक को जिताने की कोशिश में है
क्रिकेट की पिचों पर होने वाले मुक़ाबलों के आयोजकों का चुनाव! कौन बनेगा भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड या बीसीसीआई का अध्यक्ष? कौन सँभालेगा कुबेर का वो खजाना, जिसका आकार दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा है.

इस सवालों के जवाब मिलेंगे बुधवार को कोलकाता में होने वाले चुनाव में.

वर्तमान अध्यक्ष जगमोहन डालमिया का कार्यकाल समाप्त हो रहा है लेकिन उसका वर्चस्व क़ायम रहे इसलिए उनके उम्मीदवार का जीतना ज़रूरी है.

राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता को ताक़ पर रखकर राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण जेटली की उम्मीदवारी के समर्थन की घोषणा कर दी थी.

उन्हें डालमिया का समर्थन प्राप्त भी बताया जा रहा था.

इसके अलावा इस बार अध्यक्ष पद के लिए उत्तरी क्षेत्र के उम्मीदवार की बारी भी है.

ऐसे में चुनाव से ठीक पहले डालमिया गुट ने जेटली की जगह हरियाणा के रणबीर सिंह महेन्द्रा को उम्मीदवार बना दिया.

 आश्चर्य है कि उत्तरी क्षेत्र के उम्मीदवार की बारी है और उम्मीदवार हैं महाराष्ट्र के शरद पवार
कमल मोरारका

उधर पंजाब क्रिकेट संघ ने केंद्रीय मंत्री शरद पवार की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी.

इस घोषणा से चौंकने वालों में शामिल थे बीसीसीआई के उपाध्यक्ष और डालमिया के समर्थक कमल मोरारका.

बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में मोरारका ने कहा, "आश्चर्य है कि उत्तरी क्षेत्र के उम्मीदवार की बारी है और उम्मीदवार हैं महाराष्ट्र के शरद पवार."

मोरारका ने चुनाव के पहले ही ये बेझिझक कहना शुरू कर दिया कि शरद पवार के सामने दो ही रास्ते हैं या तो अपनी उम्मीदवारी वापस ले लें या फिर हारने के लिए तैयार रहें.

क्रिकेट के इस चुनावी दंगल में चढ़ते तापमान ने देश के राजनीतिक तापमान को भी बढ़ा दिया है.

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस अपनी सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार से दो-दो हाथ करने के मूड में नहीं दिखती.

बहरहाल राजनीतिज्ञों के खेल संघों में प्रवेश को लेकर ऐतराज़ था रणबीर सिंह महेंद्रा को, जो ख़ुद हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के पुत्र हैं और कांग्रेस के नेता भी हैं.

उधर शरद पवार ने अपने पत्ते अभी पूरी तरह नहीं खोले हैं और कहा है कि चुनाव वह तभी लड़ेंगे जब यह तय हो जाएगा कि वह जीतने ही जा रहे हैं.

शरद पवार
पवार के समर्थक 18 मतों का दावा कर रहे हैं

पवार के समर्थक और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष राज सिंह डुंगरपुर ने कहा है कि पवार की जीत तय है और उन्हें 31 में से 18 मत मिलेंगे.

मोरारका ने डुंगरपुर के दावों को ये कहते हुए खारिज किया कि ये अटकलें वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं.

मतदाने से पहले इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच क्रिकेट की राजनीति भारतीय राजनीति से अछूती नहीं रह पाई है हालाँकि कांग्रेस प्रवक्ता गिरिजा व्यास ने बड़े जोर-शोर से और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन चुनाव का राजनीति से कोई संबंध नहीं है.

मोरारका भी इस बात से इनकार करते हैं कि ये चुनाव राजनीति से प्रेरित है.

खेल संघों और महासंघों में राजनीतिज्ञों की घुसपैठ कोई नई बात नहीं है और फिर जब सवाल क्रिकेट जैसे महाखेल का हो तब इस बात पर आश्चर्य क्यों हो कि राजनीति के अखाड़े में खेला जा रहा है इस खेल संघ पर क़ाबू पाने का खेल.

फिर गठबंधन की राजनीति से भी अछूता नहीं रहा है क्रिकेट. आम सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं और चुनाव अगर टल भी जाते हैं तब भी इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

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