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प्रसारण विवाद से चिंतित है क्रिकेट बोर्ड | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कहा है कि वह अदालत से इस बारे में निर्देश लेगा कि क्या आगामी भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट सिरीज़ के प्रसारण के लिए कोई आपात योजना बनाई जाए. कोलकाता में बोर्ड की बैठक के बाद गुरुवार को बोर्ड के सचिव एसके नायर ने बीबीसी से कहा कि बोर्ड को आगामी क्रिकेट सिरीज़ संबंधी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करना है, और अदालत को इस बारे में अवगत करा दिया गया है. उन्होंने कहा, "हमने अदालत से मामले को जल्दी निपटाने का आग्रह किया है." बोर्ड ने कहा है कि वह प्रसारण अधिकारों के बारे में अदालत के फ़ैसले का पालन करने को तैयार है. ग़ौरतलब है कि बंबई उच्च न्यायालय ने मामले के निपटान तक टेलीविज़न प्रसारण अधिकारों के बारे में कोई फ़ैसला नहीं करने को कहा था. उधर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि प्रसारण अधिकार के बारे में जल्दी फ़ैसला नहीं किए जाने के से क्रिकेट सिरीज़ संकट में पड़ सकती है. विवाद भारतीय क्रिकेट टीम के टेस्ट और एकदिवसीय मैचों के प्रसारण अधिकार ज़ी टेलीफ़िल्म्स को दिए जाने की घोषणा के बाद ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स ने फ़ैसले पर आपत्ति जताते हुए बंबई उच्च न्यायालय में इसके ख़िलाफ़ याचिका दायर कर थी. याचिका में कहा गया है कि ज़ी टेलीफ़िल्म्स को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के प्रसारण का अनुभव नहीं है, और उसे प्रसारण अधिकार दिए जाते समय इस बात को नज़रअंदाज़ किया गया. अदालत ने प्रसारण अधिकारों के लिए नए सिरे से प्रस्ताव मँगाए जाने की बात की है, बशर्ते दोनों पक्ष सहमत हों. लेकिन ज़ी टेलीफ़िल्म्स नए सिरे से किसी निविदा में भाग लेने से इनकार किया है. इस बीच मामले को नया मोड़ देते हुए सब टीवी के वकील ने बंबई उच्च न्यायालय से आग्रह किया है कि ईएसपीएन-स्टार एक विदेश संयुक्त उपक्रम है इसलिए उसे किसी भी तरह क्रिकेट मैचों का प्रसारण अधिकार नहीं मिलना चाहिए. |
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