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गोलकीपर से विकेटकीपर तक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के ख़िलाफ भारत की एक दिवसीय क्रिकेट टीम में विकेटकीपर चुने गए महेंद्र सिंह धोनी के लिए खेल का सफ़र गोलकीपर से विकेटकीपर तक का एक रोमांचक सफ़र रहा है. कई साल पहले की बात है स्कूल की क्रिकेट टीम के लिए विकेटकीपर की ज़रुरत थी और एक लड़का प्रैक्टिस के दौरान, फुटबाल के मैदान में जिस बारीकी से गेंद को झपट कर पकड़ रहा था, कोच चंचल भट्टाचार्य को लगा कि इस लड़के में वो बात है जिसकी उन्हें तलाश है. बस फिर क्या था चंचल भट्टाचार्य के संकल्प और महेंद्र सिंह धोनी की मेहनत ने रंग दिखाया और आज भारत के पास एक बेहतरीन ऑल राउँड विकेटकीपर है. विकेट के दोनों तरफ़ गेंद को सहजता से लपकना, ऐसा लगता है फुटबाल का शुरुआती अनुभव अब भी ढोनी के काम आ रहा है. धोनी के कोच चंचल भट्टाचार्य का मानना है कि “ धोनी में गज़ब की सकंल्पशक्ति है वो जो एक बार सोच लेता है उसे पूरा करके ही दम लेता है. एकदिवसीय क्रिकेट के लिए उसकी शैली और तकनीक बिल्कुल सही है. उसकी नीति करो या मरो की है. मुझे विश्वास था कि धोनी पाकिस्तान के ख़िलाफ बहुत सफल रहेगा, और आज के स्कोर के बाद तो उसने मेरे विश्वास को साबित कर दिखाया है ”.
मेहनत, भाग्य, भगवान और ईमानदारी पर विश्वास रखने वाले ढोनी, विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेन्द्र सहवाग को अपना आदर्श मानते हैं. उनका कहना है “ बांग्लादेश के दौरे के बाद मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और मैं अब फ़िटनेस पर भी काफी ध्यान देने लगा हूँ. पाकिस्तान जैसी टीम के ख़िलाफ खेलने को लेकर मुझ पर कोई दबाव नहीं है मै अपना नेचुरल गेम खेल रहा हूँ ”. बेहद साधारण परिवार में जन्में 23 वर्षीय महेंद्र सिंह धोनी शांत स्वभाव के हैं और शायद यही स्वभाव उनको मैदान में एकाग्रता बनाए रखने में मदद देता है. उनके पिता पान सिंह का कहना है, “वह मेहनत के बल पर ही इस स्तर तक पहुँचा है. मेरा सहयोग इतना ही है कि मैने उसे खेलने से कभी नहीं रोका. वैसे भी पढ़ाई और क्रिकेट के अलावा उसे किसी और चीज़ से कभी कोई मतलब रहा भी नहीं”.
उनका कहना है कि महेंद्र के भारतीय टीम में चुने जाने के बाद से उनकी समाज में पहचान बढ़ गई है और उनके प्रति लोगों के रुख़ में भी बदलाव आया है. हाल ही में महेंद्र सिंह धोनी ने दिलीप ट्रॉफी के दौरान एक पारी में आठ कैच पकड़ कर जेएफ़ पार्कर के 25 वर्ष पुराने रिकॉर्ड की बराबरी की थी और पाकिस्तान के ख़िलाफ आज खेले गए दूसरे एक दिवसीय मैच में भी उन्होंने किसी भारतीय विकेटकीपर द्वारा बनाए गए रनों का नया रिकार्ड बनाया है. धोनी के शौक बहुत सीमित हैं अंतरमुखी तो वो हैं ही लेकिन जानवरों से उन्हें प्यार है उनका सबसे प्यारा दोस्त उनका पालतू कुत्ता ‘सैम ’ है. उनकी माँ जानकी देवी का कहना है “ उसके बहुत कम दोस्त हैं, महिला मित्र तो कोई भी नहीं है. वो सभी बातें मुझ से बाँटता है. वो सीढ़ी दर सीढ़ी मेहनत करके यहाँ तक पहुँचा है, मेरी तो भगवान से यही प्रार्थना है कि वो हमेशा सफल हो ”. आज के मैच को देख कर पूर्व क्रिकेटर मोहिंदर अमरनाथ ने ठीक ही कहा है टीम में दूसरा सहवाग आ गया है. |
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