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प्यार का बिल्कुल अनोखा अंदाज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान की दोस्ती के फूल बिखरते नज़र आ रहे हैं तो एक दिलचस्प प्रेमकहानी सामने आई है जो इन दोनों देशों के बीच प्यार और दोस्ती की एक दास्तान कहती है. पाकिस्तान के हरफ़नमौला क्रिकेट खिलाड़ी शोएब मलिक का दिल एक भारतीय लड़की पर आ गया या यूँ कहें कि वह लड़की ही अपना दिल शोएब को हार बैठी, बहरहाल दोनों की यह दास्तान किसी दंतकथा से कम दिलचस्प नहीं है. शोएब मलिक इन दिनों पाकिस्तानी टीम के साथ भारत में हैं और अगले सप्ताह जब उनकी टीम अभ्यास के लिए आंध्र प्रदेश के हैदराबाद शहर पहुँचेगी तो उन्हें वहाँ अपने प्यार से मिलने का मौक़ा भी मिलेगा. उनका प्यार है हैदराबाद की आयशा महा सिद्दीकी जो सऊदी अरब में एक स्कूल में नौकरी करती हैं, उनकी परवरिश भी सऊदी अरब में ही हुई है. बेहद दिलचस्प बात ये है कि शोएब मलिक और आयशा महा सिद्दीक़ी का निकाह परंपरागत रूप में नहीं बल्कि टेलीफ़ोन के ज़रिए हुआ. आयशा बताती हैं, 'हम लोगों की पहली मुलाक़ात वर्ष 2000 में दुबई में हुई थी जब भारत, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीन देशों की क्रिकेट प्रतियोगिता हो रही थी. हम लोग दुबई शॉपिंग फ़ेस्टिवल के लिए वहाँ गए हुए थे." एक इत्तेफ़ाक और फिर... आयशा वो हसीन लम्हा याद करते हुए कहती हैं कि शोएब से उनकी मुलाक़ात महज़ एक इत्तेफ़ाक थी. वह होटल में खाना खाने के बाद अपनी चाबियाँ भूल गई थीं. एक नौजवान जब चाबी वापस करने आया तो पता चला कि वह तो शोएब मलिक हैं. बस यह मुलाक़ात इश्क का आग़ाज़ था और इसकी परिणति हुई निकाह के रूप में.
आयशा कहती हैं, "फिर दो मुलाक़ातों के बाद ही दोस्ती हो गई और मुलाक़ातें बढ़ती गईं. हम इंटरनेट पर भी चैट करते थे. कुछ दिन बाद शोएब ने शादी की पेशकश की और मैंने भी हाँ कर दी." आयशा के मुताबिक़, "13 अप्रैल, 2002 को हमने चुपचाप और बेहद ही सादे तरीक़े से टेलीफ़ोन के ज़रिए निकाह कर लिया. मैं ख़ुद सऊदी अरब में थी और पाकिस्तान के सियालकोट में शोएब मलिक ने एक क़ाज़ी का इंतज़ाम किया. क़ाज़ी ने कुछ रिश्तेदारों की मौजूदगी में निकाह पढ़ाया." "मैं निकाह के लिए तो तैयार थी लेकिन माता-पिता को बताने से झिझक रही थी. क्योंकि मैं भारत की थी और शोएब पाकिस्तान के हैं तो शायद कहीं कोई समस्या ना हो जाए." आयशा बताती हैं कि बाद में जब शोएब उनके माता पिता से मिले तो उन्हें बहुत अच्छे लगे. तब सबने स्वीकार कर लिया, और कोई समस्या नहीं हुई. शोएब दो बार हैदराबाद भी आ चुके हैं. बहरहाल, कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद से यह ख़बर दोनों के परिवारों तक पहुँचाई गई. शुरू में कुछ अचंभा ज़रूर हुआ और मान-मनोव्वल के बाद दोनों परिवार मान भी गए. अब दोनों परिवारों के बीच कई मुलाक़ातें हो चुकी हैं और औपचारिक रूप से आयशा की विदाई का रास्ता साफ़ हुआ है. आयशा बताती हैं कि औपचारिक विदाई की योजना आगामी अगस्त में है जिसके बाद वह पाकिस्तान में अपने प्यार शोएब मलिक के साथ ज़िंदगी की नई पारी की शुरूआत करेंगी. |
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