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बुधवार, 30 मार्च, 2005 को 12:48 GMT तक के समाचार
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कपिलदेव ने गांगुली की तरफ़दारी की
कपिलदेव
सौरभ गांगुली से हमदर्दी जताई पूर्व कप्तान कपिलदेव ने
भारत के पूर्व कप्तान और प्रसिद्ध गेंदबाज़ कपिलदेव ने कहा है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ वर्तमान क्रिकेट श्रृंखला में ख़राब प्रदर्शन के बावजूद सौरभ गांगुली को कप्तान बनाए रखा जाना चाहिए.

गांगुली ने तीन टेस्ट मैंचों की पाँच पारियों में कुल 48 रन बनाए और बंगलौर में खेले गए अंतिम मैच में मिली हार के बाद उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.

लेकिन कपिलदेव ने बीबीसी स्पोर्टस् के साथ बातचीत में कहा, “गांगुली की कप्तानी में कोई ख़राबी नहीं है. पिछले दस वर्षों से भारत के क्रिकेट प्रबंधन ने समझदारी से काम लिया है और मुझे उम्मीद है कि अब भी वो कोई अविवेकपूर्ण निर्णय नहीं लेगें.”

गांगुली ने पिछले सोलह महीनों में एक भी शतक नहीं लगाया है और पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी का कहना है कि गांगुली को हटा कर किसी और को कप्तान बना देना चाहिए.

 इस समय राहुल द्रविड़ ही ऐसा है जिसे कप्तानी का भार सौंपा जा सकता है लेकिन वो इतनी अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा है कि ऐसा करने से उसकी लय बिगड़ जाएगी
कपिलदेव

लेकिन कपिलदेव का कहना है कि ऐसा करने से टीम को फायदे की जगह नुकसान ही अधिक होगा.

कपिलदेव ने कहा, “बिशन सिंह बेदी ने बहुत क्रिकेट खेला है और वो अपनी राय ज़ाहिर कर सकते हैं, मैं इस बात से शतप्रतिशत सहमत नहीं हूँ कि अगर टीम एक टेस्ट मैच हार जाए तो आप सभी को निकाल बाहर करें और जीत जाने पर किसी को प्रधानमंत्री बना दें.”

उन्होंने कहा, “आप को टीम के हित में तर्कसंगत निर्णय लेना होगा. मैं गांगुली के प्रदर्शन से निराश हूँ पर उसने टीम को एकजुट करके काफ़ी ऊपर तक पहुँचाया है."

विकल्पों के बारे में कपिलदेव कहते हैं, “ इस समय राहुल द्रविड़ ही ऐसा है जिसे कप्तानी का भार सौंपा जा सकता है लेकिन वो इतनी अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा है कि ऐसा करने से उसकी लय बिगड़ जाएगी.”

बंगलौर में पहली पारी में आउट होने और मैच ख़त्म होने के बाद गांगुली को दर्शकों के गुस्से का सामना करना पड़ा था, लेकिना कपिलदेव ने उस बात को ख़ास महत्व नहीं दिया है.

कपिलदेव ने कहा, “ उपमहाद्वीप क्षेत्र के क्रिकेट खेलने वाले देशों में ऐसा अक्सर होता है. ऐसा सुनील गावस्कर, बेदी और मेरे साथ भी हुआ था. यह सभी क्रिकेटरों के साथ होता है और हमें यह समझना चाहिए कि हम काफी संवेदनशील लोग हैं लेकिन दुनिया यहीं ख़त्म नहीं हो जाती. लोग कुछ ही समय में संभल जाएंगें और देश के लिए सही निर्णय लेंगें.”

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