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शुक्रवार, 25 मार्च, 2005 को 20:37 GMT तक के समाचार
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हरभजन का विश्वास डिगा नहीं है

हरभजन सिंह
भज्जी 'दूसरा' गेंद पर विश्वास से भरपूर हैं
बंगलौर टेस्ट में पाकिस्तान के 6 विकेट लेकर हरभजन सिंह ने साबित कर दिया है कि गेंदबाज़ी एक्शन पर उठा विवाद उनके आत्मविश्वास को डिगा नहीं पाया है. उन्होंने बताया कि उन्होंने दूसरे दिन भी अपना ‘दूसरा’ इस्तेमाल किया.

मैच के दूसरे दिन पाकिस्तान की पारी को 570 पर रोकने में सबसे बड़ा योगदान हरभजन का ही रहा.

उन्होंने यूनुस ख़ान का साथ देने आए बल्लेबाज़ों को निशाना बनाना जारी रखा और किसी को भी लंबी साझेदारी करने का मौक़ा नहीं दिया.

भज्जी ने यूनुस ख़ान, युसुफ़ योहाना, अब्दुल रज़्ज़ाक़, आसिम कमाल, कामरान अकमल और दानिश कनेरिया के विकेट लिए.

मैच के बाद हरभजन ने बताया कि शिक़ायत किए जाने के बावजूद अपना सबसे ख़तरनाक हथियार यानि ‘दूसरा’ लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “बिल्कुल, मैंने आज भी दूसरा डाला है. दूसरा भी डाला, ऑफ़ स्पिन भी डाली और खुल कतर गेंदबाज़ी की.”

“मुझे तो ये पूरा विवाद समझ ही नहीं आ रहा. हाल ही में मेरा टेस्ट किया गया था और मेरे ‘दूसरा’ को पास किया गया था इसलिए मेरे ये गेंद डालने पर कोई पाबंदी नहीं है.”

आत्मविश्वास

दूसरे दिन हरभजन की गेंदबाज़ी देख कर लगता है कि इस पूरे विवाद से उनका आत्मविश्वास ज़रा भी प्रभावित नहीं हुआ है.

हरभजन सिंह

वो भी मानते हैं, “मुझे तो पहले से ही विश्वास था. क्रिकेट खेलते हुए ऐसे छोटे छोटे आरोप तो लगते ही रहते हैं और ऐसे में काम आता है आपका व्यक्तित्व और चरित्र.”

“ये भी अहम है कि आप ख़ुद पर कितना विश्वास करते हैं और आपकी टीम आपका कितना साथ देती है.”

“मेरी टीम और बोर्ड ने मेरा भरपूर साथ दिया है, मैं उनका शुक्रगुज़ार हूँ.”

'सोचा भी नहीं'

हरभजन ने कहा कि वो तो अंपायरों और आईसीसी मैच रेफ़री की शिक़ायत के बारे में सोच भी नहीं रहे.

वो बोले, “ये मेरे बोर्ड का काम है, बीसीसीआई ही इससे निपटेगा. मैंने तो इस बारे में ही सोचना ही बंद कर दिया है.”

क्या है ‘दूसरा’

‘दूसरा’ ऑफ़ स्पिनर के तर्कश का वो तीर है जो विरोधी बल्लेबाज़ों को घुमा कर रख देता है.

पाकिस्तान के सक़लैन मुश्ताक़ ने इसे विकसित करके इसे 'दूसरा' नाम दिया और इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल भी किया है.

‘दूसरा’ नाम की ये गेंद ऑफ़ स्पिनर फेंकता तो उसी अंदाज़ में है लेकिन वो ऑफ़ स्टंप पर पड़ कर अंदर आने के बजाय बाहर निकल जाती है और अच्छे अच्छे बल्लेबाज़ चकमा खा जाते हैं.

ऑफ़ स्पिनर के लिए ‘दूसरा’ का वही महत्व है जो लेग स्पिनर के लिए गुगली का है.

ये गेंद फेंकने के लिए ऑफ़ स्पिनर को अपनी कलाई सामान्य से ज़्यादा मोड़नी पड़ती है.

और आईसीसी के नए नियमों के मुताबिक़ अब कोई भी बोलर, चाहे वो तेज़ गेंदबाज़ हो या स्पिनर, अपना हाथ 15 डिगरी से ज़्यादा नहीं मोड़ सकता.

हाल के सालों में ‘दूसरा’ फेंकने के चक्कर में कई गेंदबाज़ों के एक्शन पर अंपायरों ने आपत्ति की है.

श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के ‘दूसरा’ फेकने पर तो आईसीसी ने प्रतिबंध लगा दिया है.

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