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'सीरिज़ बराबर कर लेने पर ख़ुशी होगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपने सौवें टेस्ट में लगाया शतक पाकिस्तानी कप्तान इंज़माम उल हक़ ने अपने पिता के नाम कर दिया है. पेश है बंगलौर में बीबीसी संवाददाता मानक गुप्ता के साथ उनकी ख़ास बातचीत... इंज़माम मुबारक हो, काफ़ी थके हुए लग रहे हैं. शुक्रिया. हाँ, थक तो गया हूँ. आज गर्मी बहुत थी और पूरा दिन बल्लेबाज़ी करके थकना तो था ही. बीच में तो तबीयत भी थोड़ी ख़राब हो गई थी लेकिन फिर इलाज कराया और दवाई लेनी पड़ी. पर ख़ुशी है कि मैंने अपने सौंवे टेस्ट में शतक लगाया है. आपका परिवार भी आया हुआ है, क्या उसने इस शतक को और ख़ास बना दिया है. हाँ, मेरी पत्नी, बच्चे, बड़े भाई और वालिद यहाँ आए हुए हैं. लगभग आधा परिवार मेरे साथ यहाँ है लेकिन शतक तो मैं अपने वालिद के ही नाम करूँगा. इन सब को यहाँ पाकर मेरी ख़ुशी बढ़ गई है. क्या अब आप दोहरे शतक की राह देख रहे हैं? बिल्कुल, मैच के दूसरे दिन मेरी कोशिश तो यही होगी कि पहले डबल सेंचरी पूरी करूँ. और बस 16 रन की ही बात है. सिर्फ़ 7 रन पर दो विकेट गिर गए थे जब आप बल्लेबाज़ी करने उतरे तो कितना दबाव था. वो मुश्किल समय था और हमने तो बस यही सोचा कि पहले 10-12 ओवर निकाल दें. पिच बल्लेबाज़ों के लिए अच्छी थी इसलिए हमारा अंदाज़ा था कि बाद में गेंदबाज़ों के लिए हमें आउट करना मुश्किल होगा. और वही हुआ. पहले दिन ही 2 विकेट पर 323 रन, दूसरे दिन क्या लक्ष्य है. कोशिश करेंगे कि ऐसे ही बल्लेबाज़ी जारी रखें. हम सोच रहे हैं कि 500 से ऊपर रन बनाएँ. एक समय आप रनों के ढेर लगा रहे थे, फिर ख़राब समय आया 2003 के वर्ल्ड कप में लेकिन क्या अब फिर से करियर के शबाब पर हैं. बिल्कुल, वो ख़राब था जो अब निकल गया है, मैंने उसके बाद बहुत मेहनत की थी. अल्लाह का शुक्र है कि मुझे उसका फल मिल रहा है. मेरा प्रदर्शन अब बेहतर है और मेरी कोशिश है कि इसे और बेहतर करूँ. क्या दूसरे दिन डबल सेंचरी से ज़्यादा ख़ुशी होगी या फिर.. अगर मेरी टीम ये टेस्ट जीत कर सीरीज़ बराबर कर लेती है तो मुझे ज़्यादा ख़ुशी होगी. |
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