'अभी मौत को गले लगाने का वक्त नहीं'

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रियो पैरालिंपिक में रजत पदक हासिल करने वाली बेल्जियम की खिलाड़ी मारीका वेरवूर्त का कहना है कि वह भविष्य में इच्छा मृत्यु को चुनेंगी, लेकिन अभी नहीं.

मांसपेशी विकृति की असाध्य बीमारी से जूझ रही, 37 वर्षीय इस धाविका ने व्हील चेयर की चार सौ मीटर की रेस में रजत पदक हासिल किया है.

इस बीमारी के चलते उन्हें पैरों में लगातार भीषण दर्द रहता है जो उन्हें मुश्किल से सोने देता है.

14 साल की उम्र में मारीका वेरवूर्त को अपनी इस बीमारी का पता चला था. तब से उनकी ज़िंदगी लगातार चलने वाली जंग जैसी है.

उन्होंने बताया कि वह 2008 में ही यूथेनिसिया ( इच्छा मृत्यु) के कागज़ों पर हस्ताक्षर कर चुकी है.

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बेल्जियम की सामाचार ऐजेंसियों ने ख़बर दी थी कि वह रियो के बाद अपनी जीवन समाप्त कर सकती हैं. लेकिन उन्होंने अपनी जीत के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में इन सभी अटकलों को नकार दिया.

उन्होंने कहा, "अभी वह जीवन के हर छोटे पल का आनंद उठा रही हैं."

उन्होंने आगे कहा, "जब ऐसा पल आएगा जिसमें अच्छे दिनों की तुलना में जब मेरे पास बुरे दिन ज़्यादा होंगे, तब में अपनी इच्छा से मौत चुन लूंगी, लेकिन अभी ये वक़्त नहीं आया है."

व्हील चेयर रेस को अपना करियर चुनने वाली मारीका ने 2012 के लंदन ओलंपिक में 100 मीटर में स्वर्ण और 200 मीटर में रजत पदक हासिल किया था.

यूथेनिसिया बेल्जियम में वैध है.

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