'मुश्किलों को धता बताने वाला सच्चा हीरो'

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ब्राज़ील के रियो से सोना लाने के लिए की गईं भारतीयों की दुआ शुक्रवार रात रंग लाई.
अगस्त के महीने में ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने गया भारत का अब तक का सबसे बड़ा दल भले ही सुनहरा तमगा न जीत सका हो, लेकिन तमिलनाडु के मारियप्पन थंगवेलु ने पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण की साध पूरी कर दी.
पुरुषों के टी-42 ऊंची कूद मुक़ाबले में 1.89 मीटर की छलांग लगाकर इतिहास बनाने वाले मारियप्पन की कामयाबी ने उन्हें रातों-रात हीरो बना दिया.
<link type="page"><caption> सचिन तेंदुलकर</caption><url href="https://twitter.com/sachin_rt/status/774540105390419968" platform="highweb"/></link> और वीरेंद्र सहवाग जैसे सुपरस्टार क्रिकेटरों ने ट्विटर पर उनकी तारीफ की तो तमिलनाडु और केंद्र सरकार ने उन पर इनामों की बरसात कर दी.
मारियप्पन की जीत से उत्साहित ब्रावोमैन नाम के ट्विटर यूजर ने अपने हैंडल <link type="page"><caption> @an_usa_bar</caption><url href="https://twitter.com/an_usa_bar/status/774427538688839680" platform="highweb"/></link> से ट्वीट किया, "उनके नाम में ही सोना है, ऐसे में वो कैसे नहीं जीतते "
दरअसल, तमिल में सोने को थंगम कहा जाता है. हालांकि, मारियप्पन के गोल्ड मेडल तक पहुंचने का सफ़र सुनहरा नहीं बल्कि संघर्षों से भरा रहा है.

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सोने के तमगे तक पहुंचने के लिए उन्हें मुश्किलों के कई पड़ाव पार करने पड़े है.
तमिलनाडु के सेलम ज़िले के छोटे से गांव पेरिया वडखनपट्टी के रहने वाले मारियप्पन थंगवेलु जब सिर्फ पांच साल के थे तो एक बस ने उनके दाएं पांव को कुचल दिया.
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक कुली का काम करने वाले पिता और सब्ज़ी बेचने वाली मां के लिए बेटे का इलाज कराना आसान नहीं था.
माता-पिता पर कुछ कर्ज़ भी हो गया. इलाज के सीमित मौकों की वजह से उनके पैर के घुटने से नीचे का हिस्सा लगभग बेकार हो गया.
लेकिन, मारियप्पन ने अपने दर्द को लाचारी नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने जोश को ज़िंदा रखा. इसे गांव के ही एक शिक्षक ने देखा और उन्हें खिलाड़ी बनने के लिए प्रोत्साहित किया.

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ऊंची कूद में कमाल ने मारियप्पन को 2013 में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई. इसके बाद उनकी नज़रें पैरालंपिक खेलों पर जम गईं.
रियो जाने के पहले कम ही लोग मारियप्पन के नाम से परिचित थे लेकिन शुक्रवार रात एक ऐतिहासिक छलांग ने उन्हें सुर्खियों की बुलंदी पर ला दिया.
स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने उन्हें 2 करोड़ रुपये का इनाम देने का एलान किया है. वहीं केंद्रीय खेल मंत्रालय ने उन्हें 75 लाख रुपये देने की घोषणा की है.
और इन सब से कहीं आगे मारियप्पन अब ऐसी सुनहरी कहानी के नायक बन चुके हैं जो भारतीयों को लंबे वक्त तक प्रेरणा देती रहेगी.
जैसा कि <link type="page"><caption> वीरेंद्र सहवाग</caption><url href="https://twitter.com/IndianOlympians/status/774444299392061440" platform="highweb"/></link> ने ट्विटर पर लिखा है, "सभी अवरोधों को धता बताने वाला सच्चा हीरो"
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