अब धोनी पहले जैसे फिनिशर नहीं रहे?

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
अमरीका के फ्लोरिडा में खेले गए पहले टी-20 मैच में भारत मुक़ाबले को जीतता-जीतता हार गया.
कई बार पहले भी देखा गया है कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी मैच को अंतिम ओवर और अंतिम गेंद तक ले जाते है, जिसकी शायद ज़रूरत नहीं होती.
लेकिन धोनी शायद अब पहले जैसे फिनिशर नहीं रहे. पहले वो अंतिम गेंद पर चौका या छक्का लगाकर मैच जिता देते थे, लेकिन अब वो कई बार कैच आउट हो रहे हैं.
शनिवार को हुए मुक़ाबले में आख़िरी ओवर की पहली गेंद पर भी उनका एक आसान कैच छूटा था.
इसके अलावा उन्होंने अंतिम ओवर में केएल राहुल को कम स्ट्राइक दी जबकि उन्होंने अपना नाबाद शतक लगाया था.
ऐसा लगता है कि कप्तान धोनी को जो मिडास टच है, वो धीरे धीरे खो रहा है. वैसे उनकी बल्लेबाजी पर कोई सवाल नहीं है.

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लेकिन इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि धोनी के सामने एक कप्तान, एक बल्लेबाज़ और टीम के मार्गदर्शक के तौर पर चुनौतीपूर्ण समय है.
इस पूरे मैच के दौरान वेस्ट इंडीज ने 21 छक्के लगाए जिससे साबित होता है कि भारतीय गेंदबाज़ी में कोई धार नहीं थी.
वेस्ट इंडीज के 245 रन बन जाने से साफ़ होता है कि किसी भी भारतीय गेंदबाज़ में वेस्ट इंडीज के बल्लेबाजों को रोकने की क्षमता नहीं थी.
वेस्ट इंडीज की सलामी जोड़ी ने ही पहले विकेट के लिए 100 से अधिक रनों की साझेदारी कर भारत को दबाव में ला दिया था.
देखा जाए तो पिछले कुछ समय से भारत की गेंदबाजी ही टीम की हार का कारण बनी है.
सवाल स्टुअर्ट बिन्नी को लेकर भी है जिन्होंने हाल के समय में कोई शानदार प्रदर्शन नहीं किया है लेकिन उन्हें बराबर मौक़े मिल रहे हैं.
शनिवार को उन्हें एक ओवर करने का मौका मिला लेकिन उसमें पांच छक्के पड़े.

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इतने महंगे ओवर करने वाले गेंदबाज जिस टीम में हों, तो फिर बल्लेबाजों पर दबाव बढ़ जाता है और उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता.
एक समय जब अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली और रोहित शर्मा आउट होकर पैवेलियन लौट चुके थे तब लगा था कि भारत एक बड़ी हार का सामना करने जा रहा है.
लेकिन तभी केएल राहुल ने दमदार बल्लेबाज़ी करते हुए शतकीय पारी खेली. उन्हीं के दम पर भारत का स्कोर सम्मानजनक स्तर तक पहुंच सका.
इस मैच में भारत को एक लेग स्पिनर की कमी खली. अगर अमित मिश्रा टीम में होते तो निश्चित रूप से वेस्ट इंडीज पर दबाव आता. वो वेस्ट इंडीज में टेस्ट सिरीज भी खेल चुके हैं.
अमित मिश्रा आईपीएल में कामयाब गेंदबाज माने जाते हैं.
दूसरी तरफ़ वेस्ट इंडीज के खिलाड़ियों को जीत का पूरा श्रेय देना होगा. ड्वेन ब्रावो ने अंतिम ओवर में केएल राहुल और धोनी को जिस तरह बांधे रखा, वो लाजवाब था.
अंतिम पांच ओवरों में वेस्ट इंडीज के खिलाड़ियों ने दमदार फील्डिंग दिखाई. जो चौके हो सकते थे, उन्होंने उनको दो रनों में तब्दील कर दिया. उनके थ्रो अच्छे रहे.
कुल मिलाकर जिस टीम में ज्यादा जोश था वो जीत गई.
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