'क्रिकेट में सुधार पर फतवे और फरमान सही नहीं'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भारतीय क्रिकेट में सुधार के लिए बनाई गई लोढ़ा कमिटी की सिफ़ारिशों को लागू करने पर सवाल उठाए हैं.

मीडिया रिपोर्टों और पीटीआई के मुताबिक़ जस्टिस काटजू ने लोढ़ा समिति के बीसीसीआई के कामकाज में सुधारों की सिफ़ारिश करने को तो सही ठहराया है. लेकिन उन्होंने न्यायपालिका की ओर से इन्हें लागू करने पर आपत्ति जताते हुए इसे 'असंवैधानिक और ग़ैर-क़ानूनी' कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को आदेश दिया था कि वो लोढ़ा कमिटी की सिफ़ारिशों को लागू करे.

जस्टिस काटजू को बीसीसीआई ने उन चार सदस्यों की टीम का प्रमुख बनाया था जो इन सिफ़ारिशों को लागू करने के लिए बोर्ड की मदद करेगी.

लेकिन जस्टिस काटजू ने सख़्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि नियम-क़ानून बनाने के काम विधायिका का है और इस बारे में 'फ़तवा और फरमान' जारी नहीं हो सकता है.

उन्होंने कहा कि लोढ़ा कमेटी को सिर्फ़ जांच और उसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपने का अधिकार है, उसे किसी को दंडित करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है.

स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी से जुड़े विवादों के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लोढ़ा कमेटी बनाई गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की जिन सिफ़ारिशों को स्वीकार किया है, उनमें 70 साल से कम उम्र के लोगों को बोर्ड में रखना, मंत्री या किसी प्रशासनिक अधिकारी को बोर्ड से दूर रखना और बोर्ड में कैग का प्रतिनिधि शामिल करना शामिल हैं.

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