रूस में कैसे हुआ इतना बड़ा डोपिंग स्कैंडल?

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रूस में डोपिंग स्कैंडल को बहुत सुनियोजित तरीक़े से अंजाम दिया जाता था और इसमें सरकार के भी शमिल होने की बात कही जा रही है.
2014 सोची विंटर ऑलंपिक के दौरान रूस के एंटी-डोपिंग लैबोरेटोरी के डायरेक्टर रहे ग्रीगोरी रॉडशेनकॉफ़ के साक्षात्कार से यह मामला सामने आया था.
स्विटज़रलैंड स्थित कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिटट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स ने डोपिंग आरोपों से घिरे रूसी एथलेटिक्सों की रियो ओलंपिक में खेलने की अनुमति संबंधी अपील ख़ारिज कर दी है.
ऐसे में अब रूस की एथलेटिक्स टीम के रियो ओलंपिक में शामिल होने पर पाबंदी लग चुकी है.
लेकिन अभी भी लोग इस बात से हैरान हैं कि आख़िर बड़े पैमाने पर डोपिंग के मामले को छिपाया कैसे जा सका और कौन सा ड्रग्स खिलाड़ियों को दिया जाता था.

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कैसे दिया जाता था ड्रग्सः
रसायन विज्ञान में ग्रेजुएट ग्रिगोरी रॉडशेनकॉफ़ का कहना है कि उन्होंने तीन एनाबॉलिक स्टेरॉयड्स के कॉकटेल बनाए जिसे शराब के साथ लेना था.
इससे एथलीटों को कड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम से जल्द उबरने में आसानी होती थी जिससे वो प्रतिस्पर्धा में पूरे जोश के साथ भाग ले सकते थे.
ग्रीगोरी रॉडशेनकॉफ़ ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि रूसी अधिकारियों ने एक ख़ुफ़िया अधिकारी को उनके प्रयोगशाला के लिए नियुक्त किया.
इस अधिकारी से सूचना ली जाती थी कि एथलीट्स के यूरिन के नमूनों का क्या हुआ जिन्हें सेल्फ-लॉकिंग ग्लास बोतलों में रखा जाता था जिसे स्विस कंपनी बरलिंगर ने बनाया है.
एक दिन ख़ुफ़िया अधिकारी ने रॉडशेनकॉफ़ को खुला बोतल दिया, जो उनके मुताबिक़ सोची खेलों में हुए डोपिंग का एक अहम हिस्सा था.
वो कहते हैं कि प्लान के मुताबिक़ रूसी एथलीट्स ने अपने यूरिन के साथ ग्लास कंटेनरों के सीरियल नंबरों के फोटो खींचे और उसे रूसी खेल मंत्रालय को भेज दिया.

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रात को रॉडशेनकॉफ़ एक रूम में गए जहां सैंपल के कंटेनर्स रखे गए थे. एक सहकर्मी ने दीवार में बने एक छोटे से छेद से उन्हें ये सौंप दिए.
उन्होंने यूरिन के इन नमूनों को फेंककर, जिनमें स्टेरॉयड के अंश मिलते, उसमें महीनों पहले लिए गए एथलीटों के साफ़ यूरिन से बदल दिया.
उनका कहना था कि करीब यूरिन के 100 नमूनों को इस तरफ़ से बदला गया.
वाडा को लिखी अपनी चिट्ठी में रॉडशेनकॉफ़ ने कहा कि सोची ऑपरेशन ये दिखाता है कि कैसे पूरी दुनिया में एंटी-डोपिंग सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया है.
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