धोनी के घर में सिरीज़ बचाने की जंग

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
पुणे में खेले गए पहले टी-20 अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में बीते मंगलवार को भारत श्रीलंका से पांच विकेट से हारा.
अब युवा श्रीलंकाई टीम शुक्रवार को तीन मैचों की इस सिरीज़ को अपने नाम करने के उद्देश्य से रांची में होने वाले दूसरे मैच में उतरेगी.
वहीं भारत हर हाल में मैच जीतकर सिरीज़ को बचाने की कोशिश करेगा. रांची भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का घरेलू मैदान है.
अब यह भी बिल्कुल तय है कि रांची में पुणे जैसा ग्रीन टॉप विकेट नहीं मिलने जा रहा है.

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पुणे में भारतीय टीम पूरे 20 ओवर भी नहीं खेल सकी थी और 18.5 ओवर में ही केवल 101 रनों पर सिमट गई थी.
पुणे में घास वाला तेज़ विकेट दोनो टीमों को खेलने के लिए मिला. वैसा विकेट पिछले कुछ वर्षों में शायद ही कभी किसी ने भारत में अंतराष्ट्रीय मैच में देखा हो.
उस विकेट पर टॉस जीतना श्रीलंका के लिए सोने पर सुहागे जैसा साबित हुआ.
अपना पहला ही अंतराष्ट्रीय टी-20 मैच खेल रहे श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ कसुन रचिथ ने कमाल की गेंदबाज़ी की.

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हक़ीक़त तो यह है कि रचिथ और शनाका लगातार 140 से 147 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद कर रहे थे. वह भी सटीक लाइन और लैंग्थ के साथ.
भारतीय बल्लेबाज़ों पर इसका ख़ौफ साफ नज़र आ रहा था.
कप्तान धोनी भी इसी तरह शनाका की गेंद पर विकेटकीपर को कैच दे बैढ़े. युवराज सिंह के हेल्मेट पर तो एक बाउंसर भी लगा.
श्रीलंका के कप्तान दिनेश चांदीमल, चमारा कपूगेदारा और मिलिंदा सिरीवर्दना ने आक्रामक बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए बिना किसी दबाव के टीम को पांच विकेट से जीत दिला दी.
मैच के बाद भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने ही अंदाज़ में थोड़ी नाराज़गी दिखाते हुए कहा कि यहां तो पूरी तरह इंग्लिश कंडीशन थी.
उनका इशारा साफ तौर पर विकेट की तरफ था.

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भारत की इस हार से कई बातें साफ हो गईं. एक तो तेज़ विकेट पर भारतीय बल्लेबाज़ आज भी लड़खड़ाते हैं.
दूसरा भारत में भी अगर क्रिकेट संघ चाहे तो कप्तान और दूसरे स्टार बल्लेबाज़ों के लाख कहने के बावजूद घास वाला विकेट दे सकता है.
वैसे कुछ पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों ने कहा कि ऐसे विकेट से दर्शकों का मनोरंजन नहीं होता. लेकिन यह सही नहीं है.
कुछ भी हो क्रिकेट प्रेमियों को लम्बे समय बाद गेंदबाज़ों का दम-ख़म देखने का मौक़ा मिला.
खैर कुछ भी हो अब शायद ही ऐसी शानदार विकेट गेंदबाज़ों को नसीब हो.
लेकिन श्रीलंका ने दिखा दिया है कि वह अनुभवहीन भले ही हो लेकिन भारत को चुनौती देने में सक्षम है.
वैसे केवल एक हार से भारतीय टीम को कमज़ोर नहीं माना जा सकता. जैसे ही बल्लेबाज़ी के अनुरूप विकेट मिलेगा टीम चमक उठेगी.
ऐसे में रांची में सिरीज़ बचाने और अपने नाम करने की जंग में एक रोचक मुक़ाबला होने की उम्मीद है.
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