विश्व कप: भारतीयों का पैसा कीवी टीम पर!

रिप्पी वर्षों पहले कोलकाता से ऑस्ट्रेलिया आए थे

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इमेज कैप्शन, रिप्पी वर्षों पहले कोलकाता से ऑस्ट्रेलिया आए थे
    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मेलबर्न से

क्रिकेट विश्व कप ख़िताब के लिए ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के ज़्यादातर लोगों की पसंद अब न्यूज़ीलैंड की टीम बनती जा रही है.

विश्व कप का फ़ाइनल रविवार को मेलबर्न में दोनों मेज़बान टीमों, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच खेला जाना है.

न्यूज़ीलैंड ने एक <link type="page"><caption> रोमांचक सेमी फ़ाइनल में </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2015/03/150324_wc2015_semi_final_africa_newzealand_du" platform="highweb"/></link>दक्षिण अफ्रीका को हराया था, जबकि <link type="page"><caption> भारत की टीम सिडनी में ऑस्ट्रेलिया से हार कर </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2015/03/150327_wc2015_dhoni_trending_twitter_md" platform="highweb"/></link>प्रतियोगिता से बाहर हुई थी.

हितेश वछराजानी और उनका परिवार

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शायद यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग ख़ासे निराश हैं और चाहते हैं कि न्यूज़ीलैंड पहली बार विश्व चैम्पियन बने. सिडनी के रहने वाले हितेश वछराजानी और उनके परिवार ने भारत की हार को देखा और अब परिवार के साथ न्यूज़ीलैंड को जिताने मेलबर्न पहुँच चुके हैं.

सदमा

वछराजानी कहते हैं, "भारत तो हार गया, लेकिन जो टीम एक भी मैच नहीं हारी है वो कीवीज़ ही हैं. उम्मीद है, वे ही जीतेंगे".

सिंगापुर में रहने वाले रमननया भारतीय फैन हैं जो सेमीफ़ाइनल के पहले बड़ी उम्मीद के साथ आए थे, लेकिन भारत की हार के बाद अब सदमे में हैं.

सिंगापुर में रहने वाले रमननया और उनके मित्र कृष्णा

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रमननया ने बताया, "भारत जिस तरह हारा उससे थोड़ा अफ़सोस तो हुआ, लेकिन अब सभी भारतीयों की कामना है कि कप न्यूज़ीलैंड पहुंचे". उनके साथ मेलबर्न में फ़ाइनल देखने उनके मित्र कृष्णा भी रहेंगे जो न्यूज़ीलैंड में रहते हैं और मैकुलम की टीम का समर्थन करने आए हैं.

समर्थन

स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि ऐसा लगता है कि ऑस्ट्रेलिया वाले पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के लोगों का समर्थन भी न्यूज़ीलैंड के साथ हो सकता है.

भारत के कोलकाता से वर्षों पहले ऑस्ट्रेलिया आए रिप्पी टैक्सी चलाते हैं. उनके पास फ़ाइनल का टिकट भी है.

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान माइकल क्लार्क और न्यूज़ीलैंड के कप्तान ब्रैंडन मैकुलुम

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रिप्पी ने कहा, "100 डॉलर का टिकट खरीदा था. अब भारत तो हार गया, लेकिन हमारी दुआ न्यूज़ीलैंड के साथ है. वैसे भी अगर ऑस्ट्रेलिया जीत गया तो मस्ती में ही सही, लेकिन बड़े ताने सुनने पड़ेंगे यहाँ रहने वाले भारतीयों को."

हालाँकि जानकारों का मत है कि क़रीब 87,000 दर्शकों की क्षमता वाले एमसीजी मैदान में ऑस्ट्रेलियाई समर्थक निश्चित तौर पर ज़्यादा ही होंगे.

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