कैसा रहा विश्वकप में भारत का प्रदर्शन

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- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
विश्व कप क्रिकेट सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया से 95 रनों से हारने के बाद भारत टूर्नामेंट से बाहर हो गया है. अब रविवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया का फ़ाइनल मुक़ाबला न्यूज़ीलैंड से होगा.
लेकिन इस विश्व कप के शुरू होने से पहले भारतीय टीम को लेकर क्रिकेट पंडित गंभीर नहीं थे. सेमीफ़ाइनल से पहले भारत ने लगातार सात मैच जीते और एक नया भरोसा हासिल किया.
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पूल मैचों और क्वार्टर फ़ाइनल में ज़बरदस्त प्रदर्शन करने वाली भारतीय टीम सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलियाई टीम का तिलिस्म नहीं तोड़ पाई.
इस विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम के खेल की समीक्षा की जाए तो भारत ने केवल एक ख़राब मैच खेला और वह भी सेमीफाइनल जैसा महत्वपूर्ण मुक़ाबला.
इससे पहले भारत ने आसानी से पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज़, आयरलैंड, ज़िम्बाब्वे और संयुक्त अरब अमीरात को मात दी.

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इसके बाद भारत ने क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश को भी मात दी. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ सेमीफाइनल में भारतीय गेंदबाज़ी दबाव और तनाव में नज़र आई.
पिछले सात मैचों में 70 विकेट लेने वाले यानी सभी विरोधी टीमों को ऑलआउट करने वाले भारतीय गेंदबाज़ ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट ही ले सके. हालांकि उन्हें शुरुआती सफलता जल्दी ही मिल गई थी.
आसान कैच

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खराब फॉर्म में चल रहे डेविड वार्नर एक खराब शॉट खेलते हुए उमेश यादव की गेंद पर विराट कोहली को आसान कैच दे बैठे.
इसके बाद एरोन फिंच और स्टीव स्मिथ ने भारतीय गेंदबाज़ों को हताश कर दिया. विकेट में उछाल और तेज़ी नहीं थी.
ऐसे में उमेश यादव, मोहम्मद शमी और मोहित शर्मा ने शॉर्ट पिच गेंदें कर उन्हें जमने का अवसर दे दिया.
भारत के खिलाफ

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एरोन फिंच ने 81 रन बनाए जबकि इससे पहले वह केवल इंग्लैंड के ख़िलाफ 135 रन बनाने में कामयाब हुए थे और रन बनाने के लिए जूझ रहे थे.
स्टिव स्मिथ तो पूरे ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर भारत के ख़िलाफ जमकर चमके. उनका शतक मैच में बड़ा अंतर साबित हुआ.
ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ आर अश्विन को सावधानी से खेले. नतीजा ऑस्ट्रेलिया सात विकेट पर 328 रन बनाने में कामयाब रहा.
इस विश्व कप में भारत ने इससे पहले इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं किया था. ज़ाहिर है पहली बार भारतीय बल्लेबाज़ी पर दबाव पड़ा और वो बिखर गई.
तेज़ गेंदबाज़ी

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इसके अलावा बल्लेबाज़ी में पूरे विश्व कप में भारत को इससे पहले न तो इतनी सधी हुई तेज़ गेंदबाज़ी का सामना करना पड़ा जैसी ऑस्ट्रेलिया के जेम्स फॉक्नर, मिचेल स्टार्क और मिचेल जॉनसन ने की. इसका ख़ामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ा.
शिखर धवन ग़ैरज़िम्मेदाराना शॉट खेलकर आउट हुए तो विराट कोहली का भी यही हाल रहा. वहीं रोहित शर्मा जमने के बाद ऑउट हुए.

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सुरेश रैना तो सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच में दोनों पारियों में अपना खाता भी नहीं खोल सके थे, यही दबाव उन पर सेमीफाइनल में भी नज़र आया.
बाद में धोनी और रहाणे को ऑस्ट्रेलिया ने खुलकर खेलने का मौक़ा ही नहीं दिया.
भारत ने विश्व कप में खराब खेल तो नहीं दिखाया लेकिन इतना ज़रूर माना जा सकता है कि भारत एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ वैसे ही दबाव में नज़र आया जैसा वह साल 2003 के विश्व कप के फाइनल में आया था. तब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रन से हराया था.
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