बैडमिंटन के लिए कामयाबी का साल

- Author, आदेश कुमार गुप्त
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
साइना नेहवाल, पीवी सिंधू, पी कश्यप, के श्रीकांत और अजय जयराम जैसे युवा और अरविंद भट्ट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के दम पर इस साल भारतीय बैडमिंटन की दुनिया जगमगाती रही.
आज भारत के पास बैडमिंटन के इक्का-दुक्का नहीं, ढेरों खिलाड़ी हैं.
पिछले दिनों साइना नेहवाल और के श्रीकांत दुबई में खेली गई विश्व सुपरसिरीज़ फ़ाइनल्स के सेमीफ़ाइनल तक पहुंचे.
उल्लेखनीय है कि इस चैंपियनशिप में दुनिया के चोटी के आठ खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं.
कामयाबी का रास्ता

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के श्रीकांत पुरुष वर्ग के सेमीफ़ाइनल में पहुंचने वाले भारत के पहले खिलाड़ी हैं.
फ़िलहाल वह दुनिया के टॉप टेन खिलाड़ियों में शामिल हैं. इस साल की शुरुआत में उनकी रैंकिंग 47वीं थी.
और हाल ही में जारी बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ैडरेशन (बीडब्लूएफ़) के पुरुषों की रैंकिंग में उन्हें चौथे स्थान पर रखा गया है.
शायद ही किसी खिलाड़ी ने इतने कम समय में कामयाबी का ऐसा रास्ता तय किया हो.
साइना का कमाल

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इतना ही नहीं साइना नेहवाल ने इसी साल चाइना ओपन का ख़िताब जीतकर तहलका मचा दिया.
यह कारनामा उन्होंने पहली बार किया. फ़ाइनल में उन्होंने जापान की युवा खिलाड़ी अकाने यामागुची को हराया.
यह उनका इस साल का तीसरा ख़िताब रहा. इससे पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलियन सुपर सिरीज़ और सैयद मोदी इंटरनेशनल ग्रां प्री टूर्नामेंट जीता था.
साइना नेहवाल ने इससे पहले पांच बार चाइना ओपन में भाग लिया था.
चीनी दीवार पार

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ऑस्ट्रेलियन ओपन के फ़ाइनल में उन्होंने स्पेन की कैरोलिन मारिन को 21-18 और 21-11 से हराया.
साइना नेहवाल के नक्शे क़दम पर चलते हुए के श्रीकांत ने भी चाइना ओपन में पुरुष वर्ग का ख़िताब अपने नाम किया.
फ़ाइनल में उन्होंने पांच बार के विश्व और दो बार के ओलंपिक चैंपियन चीन के लिन दान को 21-19 और 21-17 से हराया.
इसके साथ ही पहली बार किसी भारतीय महिला और पुरुष खिलाड़ी ने चाइना ओपन का ख़िताब जीता.
दमखम दिखाया

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इसके अलावा इस साल अनुभवी पी कश्यप ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीता.
फ़ाइनल में उन्होंने सिंगापुर के डेरेन वोंग को 21-14, 11-21 और 21-19 से हराया.
साइना नेहवाल के अलावा महिला वर्ग में पीवी सिंधू ने भी अपना दमखम दिखाया.
उन्होंने डेनमार्क में हुई विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता.
मकाउ ओपन

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इससे पहले उन्होंने पिछले साल भी कांस्य पदक जीता था. ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी हैं.
पीवी सिंधू ने इसके बाद मकाउ ओपन का ख़िताब भी लगातार दूसरे साल जीता.
इतना ही नहीं भारत के 35 वर्षीय अरविंद भट्ट ने जर्मन ओपन ग्रां प्री अपने नाम किया.
इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाला साल भारतीय बैडमिंटन की चिड़िया को नई उड़ान दे सकता है.
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