हरियाणा ने दिए सबसे ज़्यादा ओलंपिक खिलाड़ी

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- Author, पवन नारा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
लंदन ओलंपिक 2012 में भारतीय उम्मीदों को देखा जाए तो आपके ज़हन में कुछ नाम आएंगे. मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह, निशानेबाज़ गगन नारंग, पहलवान सुशील कुमार, बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल.
क्या आपने कभी सोचा हैं कि इन सब खिलाड़ियों में समानता क्या है. इनमें समानता ये है कि ये या तो हरियाणा की ओर से खेलते हैं या फिर हरियाणा से नाता रहा है. जैसे पहलवान सुशील कुमार दिल्ली के हैं, गगन नारंग और साइना नेहवाल तो हमेशा से ही हैदराबाद में रहे हैं.
ये सब कुछ गिने चुने नाम नहीं हैं. लंदन ओलंपिक में भाग ले रही 81 खिलाड़ियों की भारतीय टीम में 18 खिलाड़ी हरियाणा से है. लंदन में भाग ले रही पुरुष मुक्केबाज़ी टीम में सात में से पांच मुक्केबाज़ हरियाणा से हैं.
दिल्ली में हुए राष्टमंण्डल खेलों में भी हरियाणा की ओर से खिलाड़ियों ने खूब पदक जीते थे. दिल्ली राष्टमंडल खेलों में 16 स्वर्ण पदक, आठ रजत और आठ कांस्य पदक समेत कुल 32 पदक हरियाणा से मिले थे.
हरियाणा में खास क्या.
सवाल उठता हैं कि हरियाणा में ऐसा क्या हैं कि हरियाणा इतने खिलाड़ी पैदा कर रहा है और खिलाड़ी हरियाणा की ओर से खेलना चाहते हैं.
इसका जवाब आपको मिल सकता हैं हरियाणा सरकार की हाल ही में की गई घोषणा में.
हरियाणा सरकार ने ओलंपिक खेलों के स्वर्ण पदक विजेता को 2.5 करोड़ रुपये, रजत पदक विजेता को 1.5 करोड़ रुपये और कांस्य पदक विजेता को एक करोड़ रुपये देने का ऐलान किया है. जो कि किसी भी सरकार द्वारा घोषित इनाम से ज्यादा है.
राष्टमंडल खेलों के बाद भी खिलाड़ियों को इनाम में लाखों रुपये मिले थे, गाड़ी मिली थी और इतना ही नहीं इनाम में 100 किलो घी भी मिला था.
बीजिंग ओलंपिक मे रजत पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह और पहलवानों को 50-50 लाख रुपये इनाम मिला था.
इसके अलावा हरियाणा की ओर से खेलने वाले अधिकतर खिलाड़ियों को हरियाणा सरकार ने नौकरी भी दी है और यही वजह कि अब हरियाणा से बच्चे खेलों में हाथ आज़माने लगे हैं और परिणाम दिखाई दे रहे हैं.

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लंदन में भाग ले रही पहलवान गीता फौगाट के पिता से जब पूछा गया कि वो अपनी बेटी को पहलवान क्यों बनाना चाहते थे तो उनका जवाब था, "जब 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने ओलंपिक में पदक जीता तो हरियाणा सरकार ने घोषणा की थी कि जो खिलाडी ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाएगा, उसे एक करोड़ का इनाम दिया जाएगा. तब मैंने सोचा कि क्यों न मेरी बेटियां भी करोड़पति बनें."
इससे दिखता हैं कि खेल नीति कैसे खिलाड़ियों को प्रेरित कर सकती हैं. हालांकि वो बात अलग हैं कि पहलवान गीता फौगाट लंदन ओलंपिक में हिस्सा ज़रुर ले रही हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने अभी तक उन्हें कोई नौकरी नहीं दी हैं.
हरियाणा की खेल नीति काफी अव्वल हैं. अगर ज़रुरत हैं तो सिर्फ ज़मीनी स्तर पर और ज्यादा सुधार लाने की.












