श्रीलंका क्रिकेट टीम: 1996 में चैंपियन और दो बार उपविजेता रही टीम को क्या हो गया?

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- Author, शिवाकुमार उलगनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इन दिनों क्रिकेट की दुनिया में इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल की चर्चा हो रही है. आईपीएल की धूम के बीच क्रिकेट की दुनिया की एक बेहद अहम ख़बर की उतनी चर्चा नहीं हुई, जितनी होनी चाहिए.
जिस दिन आईपीएल की शुरुआत हुई, उसी दिन हैमिल्टन में श्रीलंकाई टीम एक बेहद अहम मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ खेलने उतरी.
यह सिरीज़ का निर्णायक मैच तो था लेकिन श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए ये उससे भी महत्वपूर्ण था.
ये मैच श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए कितना अहम था, इसे समझने के लिए मैच के नतीजे और इसके असर को समझना चाहिए.
इस मैच में श्रीलंकाई टीम हार गई. इस हार के साथ ही 2023 के वनडे वर्ल्ड कप क्रिकेट के लिए सुपर लीग मुक़ाबले की आठवीं टीम बनने का उसका सपना टूट गया है.
2023 के वर्ल्ड कप क्रिकेट के दौरान शुरुआती मुक़ाबलों को सुपर लीग कहा जाएगा और इसमें दस टीमें हिस्सा लेंगी.
मेजबान भारत सहित सात टीमें पहले ही टूर्नामेंट के लिए अपना स्थान सुरक्षित कर चुकी है. वर्ल्ड कप इस साल अक्टूबर नवंबर में भारत में होगा.
अब श्रीलंका पहली आठ टीमों की होड़ से बाहर हो चुकी है, ऐसे में वर्ल्ड कप में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए उसे जून में ज़िंबाब्वे में वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर मुक़ाबला खेलना होगा.
इस क्वालिफ़ायर मुक़ाबले में वेस्टइंडीज़, आयरलैंड और ज़िंबाब्वे जैसी टीमें हिस्सा लेंगी. ऐसे में श्रीलंका के लिए 2023 वर्ल्ड कप में जगह पाना आसाना नहीं होगा.
1996 की चैंपियन और दो बार की फ़ाइनलिस्ट टीम
ऐसे एक सवाल ये भी है कि श्रीलंकाई क्रिकेट टीम को आख़िर हुआ क्या है?
श्रीलंकाई टीम 1996 में वर्ल्ड चैंपियन रह चुकी है. जबकि 2007 और 2011 के वर्ल्ड कप में टीम फ़ाइनल तक पहुंची थी यानी उपविजेता रही.
कई वर्ल्ड कप के दौरान श्रीलंका टीम को फेवरिट भी माना गया. इस टीम में दुनिया के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़, विकेटकीपर बल्लेबाज़ और विश्व स्तरीयर स्पिनर मौजूद रहे हैं, जिसके चलते टीम को एक मज़बूत दावेदार माना जाता रहा है.
लेकिन ये सब अतीत की बातें हैं. बीते पांच सालों में श्रीलंकाई टीम को घरेलू मैदानों में कई हार का सामना करना पड़ा है. इस दौरान भारत, ज़िंबाब्वे, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीकी टीमों ने श्रीलंका में श्रीलंका को वनडे सिरीज़ में हराया है.
हाल में नवंबर, 2022 में अफ़ग़ानिस्तान ने श्रीलंकाई ज़मीन पर वनडे सिरीज़ ड्रॉ कराई. इस दौरान श्रीलंकाई टीम विदेशी मैदानों पर भी जीत से मरहूम रही है.
2015 के वर्ल्ड कप के बाद महेला जयवर्धने और कुमार संगाकारा जैसे वरिष्ठ क्रिकेटरों ने संन्यास ले लिया और उसके बाद टीम में युवा चेहरों को मौका मिला.
2016 में तिलकरत्ने दिलशान ने भी संन्यास ले लिया. नुआन कुलसेकरा जैसे तेज़ गेंदबाज़ ने 2017 में अपना अंतिम वनडे मैच खेला था.

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2019 वर्ल्ड कप में ख़राब प्रदर्शन
2017 से 2019 के बीच श्रीलंकाई टीम की हार की वजह वरिष्ठ क्रिकेटरों की विदाई को ही माना गया. करुणारत्ने के नेतृत्व में श्रीलंका ने 2019 में अपना वर्ल्ड कप अभियान शुरू किया था.
शुरुआती मैच में न्यूज़ीलैंड से श्रीलंका टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा. पूरे टूर्नामेंट में महज तीन जीत के साथ टीम अंक तालिका में छठे स्थान पर रही.
इसके तुरंत बाद तेज़ गेंदबाज़ लसिथ मलिंगा ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया. इस दौरान वेस्टइंडीज़ और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ टीम को घरेलू मैदान पर जीत भी मिली. लेकिन 2020 और 2021 में टीम का प्रदर्शन फिर से कमतर होता गया. वेस्टइंडीज़, बांग्लादेश, इंग्लैंड और भारत के ख़िलाफ़ टीम लगातार चार सिरीज़ हार गई.
हालांकि इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जोरदार संघर्ष दिखाते हुए टीम ने 2022 में घरेलू सिरीज़ में जीत हासिल की लेकिन टीम उस लय को कायम नहीं रख सकी. अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ टीम को ड्रॉ से संतोष करना पड़ा जबकि भारत के ख़िलाफ़ टीम सिरीज़ के तीनों मैच हार गई.
हालांकि टीम के कुछ युवा क्रिकेटरों ने गेंद और बल्ले से ज़ोरदार प्रदर्शन किया है लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रही है. पहले टीम के पास कई मैच विनर खिलाड़ी थे लेकिन मौजूदा टीम में मैच विनर खिलाड़ियों का अभाव दिखता है.

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घरेलू क्रिकेट पर सवाल
श्रीलंका के वरिष्ठ खेल पत्रकार लोशन टीम की नाकामी की वजहों की चर्चा करते हुए कहते हैं, "ये टीम संक्रमण के दौर से गुजर रही है. हर टीम के साथ ऐसा दौर आता है. लेकिन श्रीलंकाई टीम की नाकामी की प्राथमिक वजह देश में घरेलू क्रिकेट और प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का स्तर है. स्कूली क्रिकेट तो भविष्य के लिए उम्मीदें जगाता है लेकिन घरेलू स्तर और इंटरनेशनल क्रिकेट के स्तर में काफ़ी बड़ा अंतर है."
लोशन के मुताबिक देश में पिच की गुणवत्ता भी टीम की नाकामी की एक वजह है. वो कहते हैं, "देश भर में पिच और की गुणवत्ता को बेहतर करना होगा. परंपरागत धीमी पिच पर गेंदबाज़ों के लिए बहुत कुछ नहीं है. इसलिए युवा क्रिकेटरों को इंटरनेशनल क्रिकेट में मुश्किल होती है."
"हालांकि श्रीलंका के पास सभी फॉर्मेट के लिए अच्छे स्पिन गेंदबाज़ हैं. वानिंदु हसरंगा और महेश तीक्ष्णा विश्वस्तरीय स्पिनर हैं, जो टीम को वनडे में जीत भी दिलाते रहे हैं. लेकिन तेज़ गेंदबाज़ी टीम के लिए संकट बना हुआ है. इससे टीम की उम्मीदों को झटका लगता है."

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लोशन के मुताबिक मौजूदा टीम में अच्छे बल्लेबाज़ मौजूद हैं लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता का अभाव है.
इस साल होने वाले वर्ल्ड कप क्रिकेट के लिए अब श्रीलंका की कितनी उम्मीदें बाक़ी हैं, इस सवाल पर लोशन कहते हैं, "श्रीलंका के सामने मुश्किल चुनौती है. ज़िंबाब्वे की पिच भी तेज़ गेंदबाज़ी के अनुकूल है. इसलिए विपक्षी टीमों की चुनौती को हल्के में नहीं ले सकते. वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफ़ाई करने के लिए श्रीलंका को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा और यह इतना आसान भी नहीं होगा."
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