रवींद्र जडेजा की गेंदें नहीं, ये शॉट ऑस्ट्रेलियाई टीम को ले डूबा

भारत ऑस्ट्रेलिया दिल्ली टेस्ट मैच

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    • Author, चंद्रशेखर लूथरा
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

ट्रेविस हेड और मार्नस लुबेशान जब रविवार की सुबह दिल्ली के कोटला मैदान पर बल्लेबाज़ी करने उतरे तो शायद ही किसी को उसका अंदाज़ा रहा होगा कि अगले एक डेढ़ घंटे में क्या कुछ होने वाला है.

12 ओवर में एक विकेट पर 61 रन से पारी को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी इन दोनों बल्लेबाज़ों पर थी. इस स्कोर से शुरू हुई पारी 31.1 ओवरों में 113 रनों पर सिमट गई. 115 गेंदों पर 52 रन जोड़कर ऑस्ट्रेलिया के नौ विकेट गिर गए.

स्पिन गेंदबाज़ों को खेलने में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों की कमज़ोरी एक बार फिर जगज़ाहिर हो गई. कम उछाल वाली पिच पर स्वीप शाट्स खेलने की कोशिश में आउट होने वाले ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ अब सिरीज़ के अगले दो टेस्ट मैचों के लिए भारी दबाव में आ गए हैं.

कोटला के मैदान को जानने वालों ने पहले दो दिन के खेल से यह महसूस किया था कि इस बार का विकेट कहीं बेहतर था और गेंद को ऐवरेज बाउंस मिल रहा था. पहले दिन यही वजह थी कि मोहम्मद शमी 60 रनों पर चार विकेट के साथ पारी के सबसे कामयाब गेंदबाज़ साबित हुए थे.

शमी की गेंदबाज़ी को देखकर पैट कमिंस की टीम सोच में पड़ गई थी क्योंकि 2017 के बाद पहली बार टीम एक तेज़ गेंदबाज़ के साथ टेस्ट खेलने उतरी थी. टॉस जीतने के बाद ऑस्ट्रेलियाई पारी 263 रनों पर सिमटी. यह कोटला की पिच को देखते हुए पहले दिन का अच्छा स्कोर नहीं था, क्योंकि बीते पांच टेस्ट मैचों के दौरान पहले दिन के खेल में औसतन 277 रन बने हैं.

रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी ने पहली पारी में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों को ज़्यादा आज़ादी नहीं लेने दी. अश्विन ने 57 रन देकर तीन विकेट चटकाए जबकि जडेजा ने 68 रन देकर तीन विकेट लिए.

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दूसरे दिन किसका पलड़ा भारी

दूसरे दिन का खेल जब शुरू हुआ तो भारत ने बिना किसी नुक़सान के 21 रनों से पारी को आगे बढ़ाया. ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता यही थी कि इस विकेट पर उनके स्पिनर क्या कुछ करेंगे.

दिल्ली का कोई भी क्रिकेटर ये बता सकता है कि कोटला की पिच पर स्वीप शॉट खेलना जोख़िम लेने जैसा है. यही वजह है कि भारतीय क्रिकेटरों ने संयम दिखाया, लेकिन नेथन लॉयन भी अपनी पूरी तैयारी के साथ उतरे थे.

उन्होंने अपने गेम प्लान से भारतीय बल्लेबाज़ों को छकाना शुरू किया. उन्होंने अपनी गेंदों की गति बढ़ा दी.

जिस गेंद पर उन्होंने रोहित शर्मा को क्लीन बोल्ड किया वह 95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से फेंकी गई थी. महज़ चार रनों के भीतर लॉयन ने तीन विकेट झटक लिए, कोटला मैदान में ख़ामोशी पसर गई थी.

अक्षर पटेल और आर अश्विन के बीच अहम साझेदारी नहीं हुई होती तो निश्चित तौर पर ऑस्ट्रेलिया एक रन के बदले बड़ी लीड लेने में सक्षम होता. दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने तक मेहमान टीम का पलड़ा ही भारी था. ऑस्ट्रेलियाई टीम 62 रनों की बढ़त बना चुकी थी और उसके नौ विकेट बाक़ी थे.

तीसरे दिन का खेल जब शुरू हुआ तो दबाव टीम इंडिया पर था, क्योंकि उन्हें चौथी पारी में बल्लेबाज़ी करनी थी और ऑस्ट्रेलियाई टीम एक विकेट पर 61 रन से अपनी पारी को आगे बढ़ाने वाली थी. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई पारी खेल के पहले ही घंटे में ताश के पत्ते की तरह ढह गई.

ऑस्ट्रेलिया टीम नौ विकेट गंवा कर महज़ 52 रन जोड़ सकी. रविचंद्रन अश्विन ने पहली पारी की तरह ही तीन विकेट लिए, लेकिन रवींद्र जडेजा ने मारक गेंदबाज़ी करते हुए सात विकेट चटकाए.

ऑस्ट्रेलिया की इस दुर्दशा के लिए जितनी जडेजा की गेंदबाज़ी ज़िम्मेदार रही, उससे ज़्यादा उनके बल्लेबाज़ों का आत्मघाती प्रदर्शन रहा. स्वीप शॉट के चलते दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया ने छह विकेट गंवाए.

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कोटला में लड़खड़ाने की असली वजह

हालांकि पहली पारी में उस्मान ख़्वाजा ने इसी स्वीप शॉट के इस्तेमाल से अच्छे रन बटोरे थे, दूसरी पारी में लाबुशेन ने भी अच्छे स्वीप लगाए. लेकिन कोटला की पिच पर ये शॉट कब आत्मघाती बन जाए, कोई नहीं जानता.

दिल्ली के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ सुरिंदर खन्ना कहते हैं, "सुबह की नमी में कोटला की पिच अलग बर्ताव करती है. ये बात ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों के ध्यान में नहीं रही. जडेजा वैसे भी सीधी और तेज़ गेंद फेंकते हैं. उनकी गेंदों ने कोई कमाल नहीं किया. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों के स्वीप शॉट खेलने की चाहत के चलते टीम इस हाल में पहुंच गई."

जडेजा ने 12.1 ओवरों की गेंदबाज़ी में 42 रन देकर सात विकेट चटकाए. यह उनके टेस्ट करियर की सबसे अच्छी गेंदबाज़ी रही. इससे पहले 2016 में उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 48 रन देकर सात विकेट लिए थे.

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कोटला की पिच पर चौथी पारी में 115 रन बनाना भी आसान नहीं था. केएल राहुल सस्ते में आउट हो गए. लंच के बाद रोहित शर्मा ने आक्रामक अंदाज़ अपनाया और लायन की गेंद पर एक ज़ोरदार छक्का भी जमाया. लेकिन वे जल्दी ही रन आउट हो गए.

अपने सौवें टेस्ट में पुजारा कोई बड़ा स्कोर तो नहीं बना पाए, लेकिन इस मैच में जीत उनके चौके से ही आयी. 74 गेंदों पर उन्होंने नाबाद 31 रन बनाए.

विराट कोहली ने अपनी 20 रन की पारी के दौरान 25 हज़ार इंटरनेशनल रन पूरे किए, लेकिन वे टेस्ट में पहली बार स्टंप आउट भी हुए. इसके बाद अय्यर भी आउट हो गए. लेकिन आख़िर में भारत ये मुक़ाबला छह विकेट से जीतने में कामयाब रहा.

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वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का समीकरण

भारत ने टेस्ट सिरीज़ के पहले दो मैच जीत कर यह तय कर दिया है कि टीम यहां से सिरीज़ नहीं हारेगी. वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप फ़ाइनल के लिए भी टीम ने अपना दावा मज़बूत कर लिया है जहां ऑस्ट्रेलियाई टीम पहले से पहुंची हुई है.

दो टेस्ट जीतने के बाद टीम वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप का फ़ाइनल खेल पाएगी, इस सवाल का उत्तर तकनीकी तौर पर 'हां' में नहीं दिया जा सकता. अगर भारत अगले दोनों टेस्ट हार जाए और उधर श्रीलंकाई टीम न्यूज़ीलैंड को न्यूज़ीलैंड में 2-0 से हरा दे तो श्रीलंकाई टीम फ़ाइनल में पहुंच सकती है.

भारत, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका तीनों टीमें चैम्पियनशिप में पहले स्थान पर पहुंच सकती हैं. अगर ऑस्ट्रेलिया चारों मैच हार गया तो फिर उसके लिए भी मुश्किलें उत्पन्न हो सकती हैं. हालांकि टीम अभी शीर्ष पर बनी हुई है. ऑस्ट्रेलिया अगर सिरीज़ में एक मैच भी ड्रॉ करा ले तो टीम फ़ाइनल में पहुंच जाएगी.

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सिरीज़ में बाक़ी हैं दो टेस्ट

सिरीज़ के बाक़ी दो मैचों के लिए चयन समिति ने इसी टीम को बरक़रार रखा है. चेतन शर्मा के इस्तीफ़े के बाद चारों चयनकर्ताओं की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया. लगातार नाकामी के बावजूद केएल राहुल की टीम में जगह बनी हुई है. ऐसा लग रहा है कि वे जब तक शतक नहीं बना लेते तब तक उन्हें मौका मिलता रहेगा.

मौजूदा सिरीज़ का तीसरा टेस्ट मैच एक मार्च से खेला जाना है. इसके अलावा वनडे सिरीज़ के लिए भी टीम की घोषणा कर दी गई है. पहले वनडे में रोहित शर्मा पारिवारिक वजहों से नहीं खेल पाएंगे और उनकी जगह टीम की कप्तानी हार्दिक पांड्या करेंगे.

जडेजा

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दिल्ली टेस्ट के दौरान टीम से बाहर रहे बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ जयदेव उनादकट को दोनों टीमों में रखा गया है. उनादकट सौराष्ट्र की ओर से बंगाल के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल खेल रहे थे.

सौराष्ट्र ने नौ विकेट से जीत हासिल कर रणजी ट्रॉफ़ी जीता है और इस मुक़ाबले में 129 रन देकर नौ विकेट लेने वाले उनादकट मैन ऑफ़ द मैच आंके गए. वहीं पहले दोनों टेस्ट मैचों में 17 विकेट झटकने वाले रवींद्र जडेजा की वनडे टीम में भी वापसी हुई है.

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