टी20 वर्ल्ड कप: बाबर आज़म की पाकिस्तानी टीम ने ऐसा क्या किया जो रोहित शर्मा की टीम इंडिया नहीं कर सकी

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- Author, वात्सल्य राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ अपने देश के पूर्व पीएम इमरान ख़ान की तरह क्रिकेट नहीं खेले हैं, लेकिन गुरुवार को उन्होंने दो आंकड़ों के ज़रिए भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन पर ऐसी चुटकी ली जो अर्से तक याद रह जाएगी.
भारत की सेमीफ़ाइनल मैच में इंग्लैंड के हाथों 10 विकेट की करारी हार के बाद शहबाज़ शरीफ़ ने एक ट्वीट किया.
इसमें टीम इंडिया का कोई ज़िक्र नहीं था, लेकिन बिना नाम लिए ही वो रोहित शर्मा की टीम को इंग्लैंड के हाथों मिली हार के जख़्म पर नमक रगड़ गए.
शहबाज़ शरीफ़ ने लिखा, तो, इस रविवार, "ये (मैच) होगा, 152/0 vs 170/0". 152 के नीचे उन्होंने पाकिस्तान का झंडा लगाया और 170 के नीचे इंग्लैंड का झंडा.
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ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप का फ़ाइनल रविवार को पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच ही खेला जाएगा.
और शरीफ़ ने दोनों टीमों का नाम लिखने के बजाए जो आंकड़े लिखे, वो भारतीय टीम की दुखती रग को दबाने की कोशिश जैसी थी.
इंग्लैंड ने रविवार को भारत से मिले 169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बिना नुक़सान 170 रन बनाए. वहीं, पिछले ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की टीम ने भी भारत को 10 विकेट से क़रारी मात दी थी और तब बिना विकेट खोए 152 रन बनाए थे.
पाकिस्तान की टीम ने बुधवार को वर्ल्ड कप के पहले सेमीफ़ाइनल में न्यूज़ीलैंड को सात विकेट से हराकर फ़ाइनल में जगह बनाई.
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भारत के फ़ैन्स भी उम्मीद लगाए थे कि रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम इंग्लैंड को हराकर फ़ाइनल में जगह बनाएगी. फ़ैन्स ने एडिलेड का स्टेडियम भर दिया था. फ़ैन्स के पास उम्मीद लगाने की वजह भी थी.
भारतीय टीम से क्यों लगाई जा रही थी उम्मीद

- भारतीय टीम ट्वेंटी-20 की रैंकिग में पहले नंबर पर है.
- 360 डिग्री बल्लेबाज़ी से दुनिया भर के गेंदबाज़ों में ख़ौफ़ जगाने वाले सूर्यकुमार यादव ट्वेंटी-20 बल्लेबाज़ों की रैंकिंग में पहले नंबर पर हैं.
- टूर्नामेंट के सबसे कामयाब बल्लेबाज़ विराट कोहली कई विश्लेषकों की राय में करियर की सबसे उम्दा टी-20 क्रिकेट खेल रहे हैं
- अर्शदीप की अगुवाई में गेंदबाज़ भी उम्मीद जगा रहे थे.
शर्मनाक सरेंडर

लेकिन, गुरुवार को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ इसी टीम ने सारे हथियार डालकर सरेंडर कर दिया. बल्लेबाज़ रन बनाने में जूझते रहे. गेंदबाज़ रन रोकने और विकेट लेने की कला भूल गए और टीम 24 गेंद बाकी रहते मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गई.
इंग्लैंड की एकतरफ़ा जीत के बाद भारतीय टीम की ट्रोलिंग शुरू हो गई. दूसरे सेमीफ़ाइनल का नतीजा आने के पहले तक मेलबर्न में भारत से 'महामुक़ाबले' की आस लगाने वाले पाकिस्तान के फ़ैन्स ट्विटर और दूसरी सोशल मीडिया साइट्स पर मीम शेयर करने लगे. इनमें भारतीय टीम को ट्रोल किया जा रहा था.
एक तस्वीर में विराट कोहली को फ़ोन पर बात करते दिखाया गया और इसके साथ कैप्शन था, 'हेलो बाबर, ये फ़ाइनल में कैसे आते हैं.'
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इससे मिलते जुलते कई मीम शेयर किए जाने लगे.
भारत के लिए ये ट्रोलिंग वर्ल्ड कप में लिखी गई कहानी का बिल्कुल उलट पहलू पेश कर रही है. सिर्फ़ 18 दिन पहले (23 अक्टूबर को) सरहद के आरपार के फ़ैन्स विराट कोहली की तारीफ़ में जुटे थे. तब कोहली ने अकेले दम पर टीम इंडिया को पाकिस्तान पर यादगार जीत दिलाई थी.
भारत से हार के बाद पाकिस्तान के हौसले ऐसे पस्त हुए कि वो अगले मैच में जिंबाब्वे से भी हार गई. पाकिस्तान टीम पर टूर्नामेंट से बाहर होने का ख़तरा मंडराने लगा. पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर, समीक्षक और फ़ैन्स कप्तान बाबर आज़म को हटाने की मांग करने लगे.
लेकिन, अब उनमें से तमाम लोग मीम्स शेयर कर रहे हैं और तंज़ कर रहे हैं कि भारतीय टीम को बाबर आज़म से समझना चाहिए कि फ़ाइनल में पहुंचने का फ़ॉर्मूला क्या है?
टीम इंडिया के खिलाड़ी और कोचिंग स्टॉफ़ बाबर आज़म से ये सवाल करें या न करें, लेकिन वो ये समझना ज़रूर चाहेंगे कि आख़िर पाकिस्तान टीम टूर्नामेंट से बाहर होते होते ख़िताब की सबसे अहम दावेदार कैसे बन गई.

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वर्ल्ड कप में पाकिस्तान बनाम भारत
टूर्नामेंट की शुरुआत में लगातार दो मैच हारने वाली पाकिस्तान टीम के कप्तान बाबर आज़म के बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे. मिडल ऑर्डर भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था और टीम के आला गेंदबाज़ शाहीन शाह आफ़रीदी बेरंग थे.
भारत के ख़िलाफ़ मैच में बाबर कोई रन नहीं बना सके थे और आफ़रीदी को कोई विकेट नहीं मिला था. शाहीन शाह आफ़रीदी को जिंबाब्वे के ख़िलाफ़ भी कोई विकेट नहीं मिला और बाबर आज़म सिर्फ़ चार रन बना सके.
लेकिन, उस स्थिति में भी पाकिस्तान टीम ने ख़ुद पर भरोसा करना बंद नहीं किया था.
जिम्बाब्वे से मिली हार के बाद पाकिस्तान के सामने हर मैच में 'करो या मरो' की स्थिति थी, लेकिन कप्तान और सभी खिलाड़ी लगातार दावा कर रहे थे कि वो ऐसा कर दिखाएंगे.
दूसरी हार के बाद तेज़ गेंदबाज़ हैरिस राऊफ़ ने कहा, ''हम भी दुखी हैं. लेकिन हम अभी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुए हैं. अब भी हम वापसी कर सकते हैं. हमने अपनी ग़लतियों का विश्लेषण किया है. हम अपने खेल पर ध्यान लगा रहे हैं न कि हमारे बारे में बाहर क्या कहा जा रहा है.''
और पाकिस्तान ने उसके बाद कुछ वैसी ही वापसी की जैसे इमरान ख़ान की टीम ने 1992 के वनडे वर्ल्ड कप में की थी. दबाव में पाकिस्तान की टीम बिखरने के बजाए निखर गई.
वहीं भारतीय टीम के साथ इसका उल्टा हुआ. सेमीफ़ाइनल के दवाब में रोहित शर्मा और उनके साथी खिलाड़ी पूरी तरह पस्त नज़र आए.
ख़ुद कप्तान रोहित शर्मा ने कहा, "नॉकआउट स्टेज में सबकुछ इस पर निर्भर करता है कि आप दवाब से कैसे निपटते हैं. ये खिलाड़ियों की निजी क्षमता पर भी होता है. आप किसी को दवाब का समना करना नहीं सिखा सकते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "आईपीएल के नॉकआउट भी हाई प्रेशर गेम होते हैं. वो इसे संभाल लेते हैं."

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पाकिस्तान का कमबैक
इसके उलट पाकिस्तान टीम ने अब तक दवाब को अच्छे से संभाला है, वो भी मुश्किल हालात में.
पाकिस्तान ने अपने तीसरे मैच में नीदरलैंड्स पर आसान जीत हासिल की. बाबर और आफ़रीदी उस मैच में भी रंग नहीं जमा सके, लेकिन टीम लय में लौटने लगी थी. इसके बाद पाकिस्तान ने दक्षिण अफ़्रीका को 33 रन से हराकर अपनी उम्मीदों को मजबूती दी. इस मैच में आफ़रीदी ने तीन विकेट लिए.
बांग्लादेश के ख़िलाफ पांच विकेट से जीत ने पाकिस्तान की सेमीफ़ाइनल में जगह पक्की की. इस मैच में चार विकेट लेने वाले शाहीन शाह आफ़रीदी ने टॉप फ़ॉर्म में वापसी का एलान कर दिया. बाबर आज़म (25 रन) भी लय में लौटते दिखे.
क़िस्मत और संघर्ष के सहारे सेमीफ़ाइनल में पहुंची पाकिस्तान टीम न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ नॉकआउट मुक़ाबले में अलग ही रंगत में दिखी. न्यूज़ीलैंड ने टॉस ज़रूर जीता, लेकिन पूरे मैच में हावी पाकिस्तान ही रहा. पाकिस्तान के गेंदबाज़ सटीक थे तो बाबर आज़म (53 रन) और मोहम्मद रिज़वान (57 रन) की ओपनिंग जोड़ी ने पुरानी लय में लौटने का एलान कर दिया.

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हार के बाद बोले कप्तान...
वहीं, ग्रुप स्टेज में सिर्फ़ एक मैच गंवाने वाली रोहित शर्मा की टीम सेमीफ़ाइनल में उस टीम की छाया भर नज़र आई जिसने एक मैच पहले ही ज़िम्बाब्वे को 76 रन के बड़े अंतर से मात दी थी.
हार के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने गेंदबाज़ों को कठघरे में खड़ा किया.
रोहित शर्मा ने कहा, "हम गेंदबाज़ी में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सके. ये ऐसा विकेट नहीं था जहां कोई टीम 16 ओवर में लक्ष्य हासिल कर ले."
"हमने गेंदबाज़ी में आदर्श शुरुआत नहीं की. लेकिन हमें उनके ओपनर्स को भी क्रेडिट देना होगा."
हालांकि, कई समीक्षकों की राय है कि हार के लिए सिर्फ़ गेंदबाज़ों की नाकामी ही ज़िम्मेदार नहीं है.
टीम इंडिया खेल के हर मोर्चे पर इंग्लैंड से पीछे नज़र आई. अहम मौकों को भुनाने में टीम नाकाम रही. इंग्लैंड के पास भारत से बेहतर गेमप्लान था और टीम इंडिया उसकी काट नहीं खोज सकी.

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हार का गुनहगार कौन?
पाकिस्तान के कप्तान बाबर आज़म ने अहम मैच में अपने बल्ले से टीम को जीत की राह दिखाई, लेकिन रोहित शर्मा ऐसा करने में नाकाम रहे.
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पावर प्ले में भारतीय टीम ने सिर्फ़ 38 रन बनाए. वहीं इंग्लैंड के ओपनर्स ने इसी दौरान 63 रन जोड़ लिए.
टीम के कोच राहुल द्रविड़ के मुताबिक़, "अगर आप पहले छह ओवर हारते हैं तो मैच जीतना मुश्किल होता है. इस मैच की दोनों पारी में पहले छह ओवर में हम आउटप्लेड हो गए."
भारत की ताक़त बल्लेबाज़ी है और इंग्लैंड टीम के पास भारत के हर बल्लेबाज़ के लिए गेमप्लान था. चाहे वो रोहित शर्मा हों या सूर्यकुमार यादव.
विराट कोहली और हार्दिक पांड्या ने हाफ सेंचुरी ज़रूर जमाई, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट ऐसा नहीं था जिससे इंग्लैंड का सिरदर्द बढ़े.
वहीं रिकॉर्ड रन लुटाने वाले गेंदबाज़ भी इंग्लैंड के ओपनर्स के सामने लाचार रहे. साफ़ है कि भारतीय टीम के पास इंग्लैंड के किसी प्लान की काट नहीं थी.
रोहित शर्मा की टीम और बाबर आज़म की टीम के बीच सबसे बड़ा अंतर यही रहा कि जब मामला साख पर आया तो पाकिस्तान ने राख के बीच से शोले भड़का दिए, लेकिन भारतीय टीम की साख दबाव में खाक हो गई.
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