अर्शदीप सिंह: क्या भारत को मिल गया डेथ ओवर का गेंदबाज़

अर्शदीप सिंह

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    • Author, प्रियंका झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बीबीसी हिंदी
  • भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश को पाँच रन से हराकर सेमीफ़ाइनल की राह आसान बनाई.
  • बारिश की वजह से मैच रुका, बांग्लादेश को 16 ओवर में 151 रन का लक्ष्य मिला.
  • अर्शदीप सिंह ने आख़िरी ओवर में दिए 14 रन, बांग्लादेश को 20 रन की ज़रूरत थी.
  • टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्शदीप सिंह ने इसी साल किया है डेब्यू. अब तक 14 मैच खेले हैं.
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भारत ने एडिलेड में बुधवार को बांग्लादेश को हराकर इस टी-20 विश्वकप में तीसरी जीत दर्ज की.

बारिश के ख़लल के बावजूद पूरा मैच रोमांचक बना रहा. भारत के अर्शदीप सिंह के आख़िरी ओवर की भी चर्चा है.

बारिश के कारण बांग्लादेश की टीम को 16 ओवर में 151 रन का लक्ष्य दिया गया था. आख़िरी ओवर में बांग्लादेश की टीम को जीत के लिए 20 रन बनाने की ज़रूरत थी.

क्रिकेट प्रेमियों के दिल में सबसे बड़ा सवाल था कि भारत के कप्तान रोहित शर्मा 16वें यानी आख़िरी ओवर की ज़िम्मेदारी किसे देंगे.

माना जा रहा था कि मोहम्मद शमी को आख़िरी ओवर करने का मौक़ा मिलेगा क्योंकि वह अनुभवी हैं, लेकिन मौक़ा मिला युवा गेंदबाज़ अर्शदीप सिंह को.

भारत की जीत के बाद बाएँ हाथ के इस गेंदबाज़ की तारीफ़ की जा रही है. सोशल मीडिया पर लोग उन्हें 'गेम चेंजर' बता रहे हैं. कई लोगों की नज़र में अर्शदीप भविष्य में भारतीय टीम 'बड़ा चेहरा' हो सकते हैं.

क्रिकेट प्रेमियों का ये भी मानना है कि भारतीय टीम में आख़िरी ओवरों के लिए गेंदबाज़ की तलाश पर अर्शदीप ने विराम लगाया है.

अर्शदीप सिंह को क्यों मिला आख़िरी ओवर?

टी-20 वर्ल्ड कप में मेलबर्न की फ़्लाइट में बैठते हुए टीम इंडिया के सामने बड़ा सवाल था- आख़िर डेथ ओवर्स में कौन गेंदबाज़ी करेगा.

डेथ ओवरों के लिए गेंदबाज़ की कमी का ख़मियाज़ा एशिया कप में भारतीय टीम भुगत चुकी थी और वर्ल्ड कप जैसी स्टेज पर और जोख़िम मोल नहीं लिया जा सकता था. जसप्रीत बुमराह की चोट ने टीम को झटका दिया.

अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट करियर को देखें तो अर्शदीप सिंह ने अभी तक महज़ 14 मैच ही खेले हैं. ये उनका पहला विश्व कप भी है.

इससे पहले वो इंडियन प्रीमियर लीग में पंजाब की टीम के लिए खेलते आए हैं. इसी साल जून में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ हुई टी-20 सिरीज़ के लिए अर्शदीप सिंह को पहली बार चुना गया था.

इतने युवा ख़िलाड़ी के लिए विश्वकप के अहम मुक़ाबले में आख़िरी ओवर का दबाव भी अधिक होता है.

रोहित शर्मा

मैच ख़त्म होने के बाद भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा से आख़िरी ओवर के लिए गेंदबाज़ के चुनाव पर सवाल भी किया गया.

इस पर रोहित शर्मा ने कहा, "अर्शदीप जब टीम में आए थे तो हमने उन्हें डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ी करने को कहा था. बुमराह (जसप्रीत) की ग़ैर-मौजूदगी में ये किसी भी गेंदबाज़ के लिए मुश्किल काम है.

एक युवा खिलाड़ी के लिए ऐसा काम (डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ी) करना आसान नहीं है, लेकिन हमने उन्हें इसके लिए तैयार किया है. पिछले 8-9 महीनों से हमारे लिए वो ऐसा कर रहे हैं."

रोहित ने कहा, "मुझे ऐसे खिलाड़ी का समर्थन करना था जो नियमित तौर पर ऐसा कर रहा है. चुनाव मोहम्मद शमी और अर्शदीप के बीच था."

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अर्शदीप के लिए नया नहीं डेथ ओवर फेंकना

अर्शदीप सिंह के लिए आख़िरी ओवरों में गेंदबाज़ी कोई नई बात नहीं है.

आईपीएल में पंजाब किंग्स के लिए अर्शदीप सिंह ने कमाल का प्रदर्शन किया है. वहीं उन्होंने ख़ुद को तैयार किया.

बांग्लादेश के ख़िलाफ़ जीत के बाद पंजाब की टीम ने अलग अंदाज़ में अर्शदीप के लिए अपना प्यार भी जताया.

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इसी साल आईपीएल के बाद एक इंटरव्यू में अर्शदीप सिंह से डेथ ओवरों में टीम की ओर से दी जाने वाली ज़िम्मेदारी पर सवाल किया गया था.

इस पर उन्होंने कहा, "डेथ ओवर करने के लिए सबसे पहले तो आपको ख़ुद पर भरोसा करना होता है. तभी दूसरे आप पर भरोसा जताएँगे. जब भी आप मैदान पर जाएँ, इस विश्वास के साथ जाएँ कि आपके सामने चाहे कोई हो, आप अपने कौशल से अपनी टीम के लिए अच्छा खेलेंगे."

डेथ ओवरों में गेंदबाज़ी क्या ख़ुशी देती है, इस पर अर्शदीप ने कहा, "मुझे हर तरफ़ गेंदबाज़ी करने में मज़ा आता है. जब भी मुझे अपनी टीम के लिए प्रदर्शन करने का मौक़ा मिलता है, मैं उसका आनंद लेने की कोशिश करता हूँ. जब आप अपने काम से प्यार करते हैं तो आप थकते नहीं."

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पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कैच छोड़कर हुए थे ट्रोल

एशिया कप 2022 में पाकिस्तान के साथ मुक़ाबले में अर्शदीप सिंह ने मैच के 18वें ओवर में आसिफ़ अली का एक आसान कैच छोड़ दिया था.

आसिफ़ अली ने बाद में पाकिस्तान के लिए कई चौके-छक्के मारे.

कैच ड्रॉप करने के लिए अर्शदीप को काफ़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी क्योंकि ये मैच भारत हार गया था.

कई लोगों ने अर्शदीप को मैच की हार की वजह भी बताया था.

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ऐसे शुरू हुआ क्रिकेट का सफ़र

अंग्रेज़ी के लेखक ग्राहम ग्रीन ने कहा था, "बचपन में हमेशा एक ऐसा मौक़ा आता है, जहाँ भविष्य के लिए दरवाज़े खुलते हैं. "

ट्रिब्यून इंडिया की ख़बर के अनुसार, मध्य प्रदेश के गुना में 1999 में जन्मे अर्शदीप को ये मौक़ा 7-8 साल की उम्र में मिला, जब वो अपने पिता दर्शन सिंह के सामने गेंदबाज़ी कर रहे थे.

हालाँकि, पिता के तबादले की वजह से अर्शदीप और उनका परिवार खरड़ में रहने लगा और उन्होंने 2015 में चंडीगढ़ के जसवंत राय एकेडमी में दाखिला लिया.

'वन क्रिकेट' नाम के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में दर्शन सिंह ने बताया कि अर्शदीप सिंह ने किन दिक़्क़तों को झेलकर क्रिकेट ट्रेनिंग ली.

दर्शन सिंह ख़ुद भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन वो अपने इस सपने को साकार नहीं कर सके.

उन्होंने बताया कि सबसे पहले अर्शदीप सिंह और उनके दो भाई-बहन को खेल से जोड़ने के लिए स्केटिंग करनी सिखाई और फिर बास्केटबॉल भी सिखाया.

दर्शन सिंह ने कहा, "एक दिन पार्क में इसने मेरे सामने गेंद फेंकी और मैं बड़ा प्रभावित हुआ क्योंकि ये लेफ़्टी था और फिर भी इसने बड़ी स्मूदली (अच्छी तरह) गेंद फेंकी."

इसके बाद दर्शन सिंह अर्शदीप को लेकर एकेडमी गए और ट्रेनिंग दिलवानी शुरू कर दी. लेकिन नौकरी में तबादले की वजह से ये ज़्यादा समय तक नहीं चल सका.

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इमेज कैप्शन, माता-पिता के साथ अर्शदीप सिंह

17 साल की उम्र में क्रिकेट छोड़ने वाले थे अर्शदीप

दर्शन सिंह कहते हैं कि चंडीगढ़ में कोच जसवंत राय के पास 11-12 साल में अर्शदीप ने फिर से कोचिंग शुरू की.

अंडर-16 में अर्शदीप ने अच्छा परफ़ॉर्म किया.

दर्शन सिंह ने बताया, "अंडर-19 में सीनियर प्लेयर को मौक़ा मिलता ही है. इसको मौक़ा नहीं मिल रहा था. मुझे अर्शदीप के करियर की चिंता होने लगी थी."

इस बीच अर्शदीप के बड़े भाई कनाडा चले गए. माता-पिता ने अर्शदीप से भी अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए कनाडा जाने को कहा.

दर्शन सिंह कहते हैं, "अर्शदीप ने मुझसे एक से डेढ़ साल मांगे. इसके बाद उसने बहुत मेहनत की. कमियाँ दूर कीं."

अर्शदीप सिंह साल 2018 में अंडर-19 वर्ल्ड कप विजेता टीम का भी हिस्सा थे.

पिता कहते हैं, "अंडर-19 टीम में पहले अर्शदीप था नहीं. लेकिन कोई खिलाड़ी चोटिल हुआ तो इसे जगह मिली. इसने अच्छा परफ़ॉर्म किया."

फिर आईपीएल में नाम आया और बीते दो सीज़न में अर्शदीप सिंह पंजाब टीम के बड़े गेंदबाज़ों में शामिल हो गए.

अर्शदीप की मां बलजीत कौर ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि एकेडमी से घर के बीच अच्छी ख़ासी दूरी थी, जिसे अर्शदीप साइकिल चलाकर पार करते थे. फिर सर्दी हो या गर्मी वो घंटों एकेडमी में प्रैक्टिस करते रहते थे.

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बांग्लादेश के साथ मुक़ाबले में आख़िरी ओवर की कहानी

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत और बांग्लादेश के मैच में बारिश ने ख़लल डाली और खेल दोबारा शुरू होने के बाद बांग्लादेशी टीम विकेट खोने लगी.

हालांकि, उनके रन बनाने की रफ़्तार में ख़ास फ़र्क नहीं दिखा.

16वें ओवर में भारत को जीत के लिए 20 रन बचाने थे. गेंदबाज़ के रूप में ये ज़िम्मेदारी अर्शदीप के कंधों पर थी.

अर्शदीप ने पहली गेंद पर एक रन दिया, लेकिन इसके अगली ही बॉल पर ज़ोरदार छक्का लगा. पर इस दबाव को बेअसर करते हुए अर्शदीप ने एक डॉट बॉल फेंकी.

चौथी बॉल पर दो रन बने और पाँचवीं पर एक चौका.

अब एक गेंद पर बांग्लादेश को सात रन बनाने थे. अगर यहाँ छक्का लगता, तो मैच सुपर ओवर में जाता. लेकिन अर्शदीप की आख़िरी गेंद पर बांग्लादेश के बल्लेबाज़ सिर्फ़ एक ही रन बना सके और भारत पाँच रन से जीत गया.

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