टी-20 विश्व कप: भारत और पाकिस्तान युद्ध के दौरान जब मज़बूत हो रहे थे क्रिकेटरों के रिश्ते

ज़हीर अब्बास (अंतिम पंक्ति में बायें से दूसरे) आसिफ़ मसूद (मध्य, बायें से पांचवे) और इंतेख़ाब आलम (बैठे हुए, बायें से चौथे) ने सुनील गावस्कर (अंतिम पंक्ति में खड़े हुए, बायें से तीसरे) बिशन सिंह बेदी ( खड़े हुए, बायें से छठवें) और फ़ारूख़ इंजीनियर (अंतिम पंक्ति में बायें से चौथे) के साथ 1972 में ड्रेसिंग रूम साझा किया था.

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इमेज कैप्शन, ज़हीर अब्बास (अंतिम पंक्ति में बायें से दूसरे) आसिफ़ मसूद (मध्य, बायें से पांचवे) और इंतेख़ाब आलम (बैठे हुए, बायें से चौथे) ने सुनील गावस्कर (अंतिम पंक्ति में खड़े हुए, बायें से तीसरे) बिशन सिंह बेदी ( खड़े हुए, बायें से छठवें) और फ़ारूख़ इंजीनियर (अंतिम पंक्ति में बायें से चौथे) के साथ 1972 में ड्रेसिंग रूम साझा किया था.
    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय क्रिकेट बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत की टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी. इसके बाद भारत का अगले साल एशिया कप में खेलना खटाई में पड़ गया है.

पाकिस्तान का कहना है कि भारत का ये क़दम साल 2023 में भारत में होने वाले आईसीसी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भागीदारी को प्रभावित कर सकता है.

रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में बेसब्री से इंतज़ार किए जा रहे टी-20 मैच का मुक़ाबला होना है. टी-20 वर्ल्ड कप में ये दोनों ही टीमों का पहला मैच होगा.

बीबीसी नज़र डाल रहा है उन मौकों पर जब भारतीय उपमहाद्वीप की इन चिर प्रतिद्वंद्वी टीमों के मैदान में दोस्ताना रिश्ते रहे- यहां तक की युद्ध के दौरान भी.

युद्ध के दौरान ड्रेसिंग रूम किया साझा

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भारतीय क्रिकेट टीम के महान खिलाड़ी सुनील गावस्कर उस दौर को याद करते हैं जब भारतीय और पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने चार महीनों तक ड्रेसिंग रूम साझा किया था. ये उस दौर की बात है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध चल रहा था.

यहां से सात हज़ार किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट सितारे रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड टीम का हिस्सा थे. दुनियाभर के खिलाड़ियों की इस टीम ने मेज़बान ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ आधा दर्जन से अधिक मुक़ाबले खेले थे.

9 महीने चला वो युद्ध बांग्लादेश के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के साथ साल 1971 में समाप्त हो गया था.

अपने संस्मरण में दुनिया के सबसे महान ओपनिंग बल्लेबाज़ों में से एक सुनील गावस्कर ने लिखा था, "जो भी हो रहा था उसके बावजूद भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच कोई तनाव नहीं था."

गैरी सॉबर्स के नेतृत्व वाली रेस्ट ऑफ़ द वर्ल्ड टीम में आधा दर्जन से अधिक खिलाड़ी भारतीय उपमहाद्वीप के थे. इस टीम में भारत से सुनील गावस्कर, महान लेग स्पिनर बिशन सिंह बेदी और विकेटकीपर बल्लेबाज़ फ़ारूख़ इंजीनियर शामिल थे.

पाकिस्तान से तेज़तर्रार बल्लेबाज़ ज़हीर अब्बास, ग़ज़ब की शैली वाले ऑलराउंडर इंतेख़ाब आलम और तेज़ गेंदबाज़ आसिफ़ मसूद टीम का हिस्सा थे.

दिल्ली में साल 1952 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए पहले टेस्ट मुक़ाबले में भारत के विजय हजारे ने पाकिस्तान के आमिर इलाही को 76 रन के स्कोर पर बोल्ड कर दिया था.

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इमेज कैप्शन, दिल्ली में साल 1952 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए पहले टेस्ट मुक़ाबले में भारत के विजय हजारे ने पाकिस्तान के आमिर इलाही को 76 रन के स्कोर पर बोल्ड कर दिया था.

1976 में रिलीज़ हुई अपनी किताब सनी डेज़ में गावस्कर लिखते हैं, "हर शाम हम एक पाकिस्तानी रेस्त्रां में खाना खाने जाया करते थे. रेस्त्रां का मालिक कई रेडियो बुलेटिन से समाचार सुनकर एक पेपर नेपकिन पर लिखा करता था और इंतेख़ाब आलम को दिया करता था. इंतेख़ाब उस पर अधूरी नज़र डालते और नेपकिन को मोड़कर फेंक देते."

मैदान में साथी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भारतीय उपमहाद्वीप के इन प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के बारे में धीमी आवाज़ में बात किया करते. सुनील गावस्कर के साथ ओपनिंग करने वाले दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ हाइल्टन एकरमैन 'इस परिस्थिति में कुछ बेहद मज़ाकियां कल्पनाएं किया करते.'

इनमें से एक थी आलम और इंजीनियर के बारे में "जो संगीन वाली बंदूकें लिए एक दूसरे के सामने थे. मैं एक लड़ाकू विमान में होता और मेरे पीछे आसिफ़ मसूद लगे होते और बिशन सिंह और ज़हीर अब्बास भागने की कोशिश कर रहे होते."

गावस्कर लिखते हैं, "हम इन बातों पर ख़ूब हंसा करते."

मैदान के बाहर ज़रूर कुछ चिंताएं थीं

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गावस्कर लिखते हैं कि बेदी इंजीनियर के एक स्थानीय पत्रकार को दिए बयान से नाराज़ थे. इंजीनियर ने पत्रकार को बताया था कि 'मुंबई में उनका घर समंदर के सामने है और वो अपनी पत्नी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उनसे कहने जा रहे हैं कि वो लंकाशर (यहां इंजीनियर का घर था) वाले घर में चले जाएं.'

स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने पत्रकारों से बात नहीं की थी लेकिन वो भी 'युद्ध को लेकर दुखी थे क्योंकि उनका घर अमृतसर में था जो पाकिस्तान सीमा के पास है.'

2004 की चैपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के शोएब अख़्तर और भारत के राहुल द्रविड में नोंक-झोंक हो गई थी.

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इमेज कैप्शन, 2004 की चैपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के शोएब अख़्तर और भारत के राहुल द्रविड में नोंक-झोंक हो गई थी.

बांग्लादेश युद्ध के दौरान भारत और पाकिस्तानी खिलाड़ियों के एक ही ड्रेसिंग रूम साझा करने के संस्मरण बताते हैं कि किस तरह परमाणु हथियारों से संपन्न चिर प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान के ख़राब रिश्ते कभी भी दोनों देशों के क्रिकेटरों के रिश्तों के बीच में नहीं आए. भारत और पाकिस्तान दो युद्ध और कश्मीर में सीमित युद्ध भी लड़ चुके हैं.

1947 में भारत के बंटवारे के पांच साल बाद तक पाकिस्तान ने कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच नहीं खेला था. पाकिस्तान टीम 1952 में भारत के दौरे पर आई थी जब दोनों देशों ने अपना पहला टेस्ट मुक़ाबला खेला था.

भारतीय इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने क्रिकेट के इतिहास पर लिखी अपनी चर्चित किताब 'ए कॉर्नर ऑफ़ ए फॉरेन फ़ील्ड' में भी इस दौरे को याद किया है और दो प्रतिद्वंद्वियों की तनावपूर्ण राजनीति के साथ खेल के जटिल और विरोधाभासी संबंधों का वर्णन किया है.

पाकिस्तानी अख़बार द डॉन, कभी जिसके मालिक पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना थे, उन्होंने अपने पिछले पन्ने पर ये उम्मीद ज़ाहिर की थी कि 'टीम अच्छा प्रभाव छोड़ेगी.. वे सद्भावना के दूत हैं..' हालांकि अख़बार के फ्रंट पेज पर शीर्षक था, "भारत अपने अधिकृत कश्मीर में सेना को बढ़ा रहा है."

वीडियो कैप्शन, टी20 विश्व कप: भारत को हराने के लिए ये कर रहा है पाकिस्तान

17 सालों तक कोई मुक़ाबला नहीं हुआ

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हर तरह से ये दौरा कामयाब था. एक तथाकथित कट्टरवादी हिंदू समूह ने कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुए इस टेस्ट का बहिष्कार करने के लिए जन समर्थन जुटाने की कोशिश की थी. लेकिन वो बहुत बुरी तरह नाकामयाब रहे और भारी तादाद में लोग मैच देखने पहुंचे. पांच टेस्ट मैचों की इस सीरीज़ को भारत ने 2-1 से जीत लिया था.

पिछले 70 सालों में भारत और पाकिस्तान ने 58 टेस्ट मुक़ाबले खेले हैं. इस समयकाल में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 97 टेस्ट मुक़ाबले खेले हैं.

भारत और पाकिस्तान के बीच हुई शुरुआती टेस्ट सीरीज़ नीरस ही रही जिनके नतीजे ड्रॉ ही निकले, 1960-61 में भारत में हुई एक सीरीज़ भी ऐसी ही थी.

दोनों देशों के बीच 1965 और 1971 के दौरान जब संबंध ख़राब हुए तो 17 सालों तक कोई मुक़ाबला नहीं हुआ. दोनों देशों के बीच राजनयिक बर्फ़ पिघली तो 1978 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया.

भारत और पाकिस्तान के बीच 2003 के वर्ल्ड कप मुक़ाबले के दौरान भारतीय प्रशंसक

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अगले दो दशकों तक भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले होते रहे. 1998 में राजनीति ने फिर खलल डाल दिया. इस बार भारत ने पाकिस्तान पर कश्मीर में हिंसक चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हुए खेलने से इनकार कर दिया. पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया.

कारगिल युद्ध के बाद 2003-4 भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधारने की राजनयिक कोशिशें हुईं और भारत ने पाकिस्तान का इस साल दौरा किया.

अगले चार सालों तक दोनों देश सालाना दौरे करते रहे. फिर नवंबर 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों के बाद ये दौरे बंद हो गए.

इसमें सिर्फ़ एक ही अपवाद 2012-13 में हुए जब पाकिस्तान ने सफ़ेद गेंद से होने वाले पांच मुक़ाबलों की सीरीज़ के लिए भारत का दौरा किया. पाकिस्तान ने ये सीरीज़ 3-2 से जीती. दुनिया की सबसे समृद्ध क्रिकेट टूर्नामेंट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से पाकिस्तानी खिलाड़ी प्रतिबंधित ही रहे.

भारतीय इतिहासकार मुकुल केसवन ने एक निबंध में लिखा है, "क्रिकेट की दुनिया में इस उतार चढ़ाव वाले रिश्ते का कोई समानांतर खोजना बहुत मुश्किल है."

भारतीय खेल लेखक सुरेश मेनन कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट प्रतिद्वंदिता क्रिकेटरों से ज़्यादा समर्थकों के दिलो-दिमाग़ पर हावी रहती है.

भारतीय क्रिकेटर हमेशा ही पाकिस्तानी समर्थकों से मिलने वाले प्यार और सम्मान के बारे में बात करते रहे हैं. 1955 में जब भारत की क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया तो कराची एयरपोर्ट पर स्वागत करने के लिए हज़ारों प्रशंसक जमा थे. जब भी भारतीय क्रिकेटर सामान ख़रीदने के लिए जाते थे, दुकानदार उनसे पैसे लेने से इनकार कर दिया करते थे.

मेनन कहते हैं कि इन सोशल मीडिया पर वो फैन एक दूसरे से युद्ध करते हैं जिन्हें लगता है कि 'क्रिकेट के मैदान पर जीत किसी एक राजनीतिक व्यवस्था, धर्म या राष्ट्र के दूसरे से बेहतर होने का सबूत है.'

अभी भी खेल के सबसे बड़े मुक़ाबलों में से एक और एक अनूठी प्रतिद्वंदिता महाद्वीप की उतार-चढ़ाव वाली राजनीति की बंधक बनी हुई है.

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