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अंतरराष्ट्रीय हॉकी में एक साल बाद लौटा भारत, क्या कमाल होगा?
- Author, मनोज चतुर्वेदी, वरिष्ठ खेल पत्रकार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय हॉकी टीम की जब भी ओलंपिक खेलों को लेकर बात चलती है तो पहला सवाल मन में यह कौंधता है कि क्या हम इस बार पोडियम पर चढ़ने में सक्षम हुए हैं?
इसकी वजह यह है कि 1980 के मास्को ओलंपिक के बाद से हम पदक से नाता नहीं जोड़ सके हैं.
साल 2020 की शुरुआत तक टीम ने पोडियम पर चढ़ने की उम्मीद बंधा दी थी. लेकिन इसके बाद कोरोना के कारण भारतीय टीम की तैयारियों पर ब्रेक लग गया.
अब क़रीब एक साल बाद भारतीय टीम प्रतियोगात्मक अंतरराष्ट्रीय हॉकी में वापसी करने जा रही है.
यह वापसी क्रेफ़ेल्ड में जर्मनी से 28 फ़रवरी को मैच खेलने के साथ होगी.
भारत ने इससे पहले आख़िरी अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच फ़रवरी 2020 में ऑस्ट्रेलिया से खेला था.
यह एफ़आईएच प्रो लीग का मुक़ाबला था.
भारतीय टीम 17 दिवसीय इस यूरोपीय दौरे पर जर्मनी से 28 फ़रवरी और दो मार्च को मैच खेलने के बाद एंटवर्प (बेल्जियम) जाएगी और वहां पर ग्रेट ब्रिटेन के साथ छह और आठ मार्च को दो मैच खेलेगी.
भारत इतिहास की सबसे ऊंची रैंकिंग पर
इस दौरे को अप्रैल-मई में होने वाले एफ़आईएच प्रो लीग मुक़ाबलों और फिर 24 जुलाई से छह अगस्त तक होने वाली ओलंपिक हॉकी की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
टीम के इस दौरे पर रवाना होने के समय भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच ग्राहम रीड ने कहा, "हमें ख़ुशी है कि टीम को यूरोपीय दौरे का मौक़ा मिला है. करीब 12 माह बाद प्रतियोगी मुक़ाबले खेलने पर हमारी निगाहें टिकी हुई हैं.
जर्मनी और ग्रेट ब्रिटेन जैसी दिग्गज टीमों से खेलकर हमें एफ़आईएच प्रो लीग और ओलंपिक की तैयारियों में मदद मिलेगी. वैसे भी विश्व की टॉप दस टीमों से खेलने का हमेशा फ़ायदा होता है."
भारतीय टीम इस समय अपने इतिहास की सबसे ऊंची चौथी रैंकिंग पर है. कोरोना महामारी से लगे झटके से पहले भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों में शानदार प्रदर्शन करके यह रैंकिंग हासिल की है.
रैंकिंग में उससे आगे सिर्फ़ बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड की ही टीमें हैं. कोरोना की वजह से खेलों पर ब्रेक लगने से पहले भारतीय टीम ने एफ़आईएच प्रो लीग में शानदार प्रदर्शन किया था.
भारत ने एफ़आईएच प्रो लीग में पिछले साल शानदार ढंग से शुरुआत करके नीदरलैंड को दोनों मैचों में हरा दिया था. इसके बाद विश्व चैंपियन और विश्व की पहली रैंकिंग की टीम बेल्जियम को एक मैच में हराकर और दूसरे में हारकर यह जताया कि वह भी अब बिग लीग टीमों में शामिल हो गई है.
पर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में जब भारतीय टीम 4-1 से पिछड़ गई तो टीम को लेकर बनी धारणा बदलने लगी. पर इस मैच के आख़िरी क्वार्टर में भारत ने जिस हमलावर खेल का प्रदर्शन करके दो गोल दाग़े, उससे टीम की जान समझ में आ गई.
भारत इस मैच को तो नहीं बचा पाया पर इसका फ़ायदा उसे दूसरे मैच में मिला और इसमें 2-2 से बराबरी रहने के बाद पेनल्टी शूटआउट में विजय प्राप्त करके अपनी ताक़त का अहसास करा दिया.
यह भारत की ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ 2016 के बाद पहली जीत थी.
पूरी तरह संतुलित टीम
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कोच ज़फ़र इक़बाल ने कहा, "मौजूदा भारतीय टीम पूरी तरह से संतुलित है. इस टीम में हमले बनाने वाले खिलाड़ियों के साथ गोल जमाने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ी भी हैं. साथ ही टीम का डिफ़ेंस भी अच्छा है.''
''इस टीम को जर्मनी और ब्रिटेन से खेलकर अच्छा अनुभव मिलेगा, जो कि ओलंपिक में काम आएगा. हमारा डिफेंस रणनीतिक रूप से मज़बूत हुआ है."
ज़फ़र इक़बाल ने कहा, "मौजूदा भारतीय कोच ग्राहम रीड अनुभवी कोच हैं और उन्होंने इस टीम को अच्छे से तैयार किया है. हमारे समय में खिलाड़ी स्थान बदलकर खेलने में दिक्क़त महसूस करते थे. पर मौजूदा टीम को इस तरह तैयार किया गया है कि खिलाड़ी स्थान बदलकर खेलने में जरा भी दिक्क़त महसूस नहीं करते हैं.''
''वैसे भी हमारी टीम इस समय अपनी सर्वश्रेष्ठ चौथी रैंकिंग पर है. इस टीम की तैयारी को देखकर यह तो कहा जा सकता है कि इसमें ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन का माद्दा है. पर ओलंपिक में रैंकिंग के कोई ख़ास मायने नहीं होते हैं. इसलिए देखना होगा कि यह टीम क्या करती है. पर इतना ज़रूर है कि इस टीम से उम्मीदें बहुत हैं."
ख़ामियों पर भी किया है काम
कोराना काल में भारतीय हॉकी टीम ज़्यादातर समय बेंगलुरू के साई केंद्र में ट्रेनिंग करती रही है.
इस दौरान उसे अपनी ख़ामियों पर काम करने का मौक़ा तो मिला है. पर ख़ामियों में कितना सुधार हुआ है, इसका पता तो मुक़ाबला करके ही चल पाएगा.
इस कारण इस दौरे से टीम की सही स्थिति का पता चलेगा. टीम में कुछ ख़ामियां दिखती हैं तो एफ़आईएच प्रो लीग के मुक़ाबलों से पहले उन पर काम करने का मौक़ा रहेगा.
वैसे भारत ने ग्राहम रीड के मुख्य कोच बनने के बाद से अपनी सालों से चली आ रही कमज़ोरियों को काफ़ी हद तक सुधारा है.
विपक्षी टीम के हमले के समय डिफ़ेंस में अक्सर हड़बड़ाहट देखने को मिलती थी, जिससे सामने वाले फ़ॉरवर्डों को गोल जमाने का मौक़ा नहीं भी मिलता था तो वह पेनल्टी कॉर्नर पा जाते थे. लेकिन अब हमारे डिफ़ेंडर पूरे भरोसे के साथ विपक्षी खिलाड़ियों को टैकिल करते नज़र आते हैं.
ओलंपिक से ठीक पहले एफ़आईएच प्रो लीग के मुक़ाबले होने से इसे अच्छी तैयारियां नहीं हो सकतीं.
इस लीग में भारत को 10 और 11 अप्रैल को अर्जेंटीना से, 8 और 9 मई को ग्रेट ब्रिटेन से, 12 और 13 मई को स्पेन से, 18 और 19 मई को जर्मनी से और 29 और 30 मई को न्यूजीलैंड से खेलना है.
ओलंपिक में भी शामिल हैं टीमें
भारत के लिए यह मुक़ाबले इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि इसमें से तीन टीमें भारत के ओलंपिक ग्रुप ए में शामिल हैं.
यह टीमें हैं-अर्जेंटीना, न्यूज़ीलैंड और स्पेन. ग्रुप की चौथी टीम ऑस्ट्रेलिया से भारत पहले ही खेलकर शानदार प्रदर्शन कर चुका है. पाँचवीं टीम मेज़बान जापान है.
ओलंपिक हॉकी के फ़ॉर्मेट के हिसाब से प्रत्येक ग्रुप की टॉप चार टीमों को क्वार्टर फ़ाइनल में स्थान बनाना है.
इस लिहाज़ से देखें तो भारत के क्वार्टर फ़ाइनल में स्थान बनाने में शायद ही दिक्क़त हो, क्योंकि भारत के ग्रुप ए में ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जापान, न्यूज़ीलैंड और स्पेन की टीमें शामिल हैं.
भारत को क्वार्टर फ़ाइनल में स्थान बनाने के लिए सिर्फ़ दो मैच जीतने से ही काम चल जाएगा और यह काम भारत के पिछले प्रदर्शन को देखते हुए ज़्यादा मुश्किल नहीं दिखता है.
असल में इस फ़ॉर्मेट में लीग चरण में बेहतर प्रदर्शन करके ग्रुप में पहले दो स्थानों में शामिल होने से क्वार्टर फ़ाइनल में दूसरे ग्रुप की निचले स्थान वाली टीमों से खेलने को मिलेगा. वैसे भी नॉकआउट चरण की एक जीत पदक की दौड़ में पहुँचा सकती है.
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