चेन्नई टेस्ट: अश्विन-रोहित-अक्षर पटेल के सामने नहीं टिक सका इंग्लैंड

विराट कोहली

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
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टेस्ट क्रिकेट में किसी भी टीम की जीत उसके खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर निर्भर करती है लेकिन अगर पिच चेन्नई की हो तो वहां टॉस जीतना ही मैच जीतने की गारंटी बन जाता है.

भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही चार टेस्ट मैचों की सिरीज़ के दोनों मैच के परिणाम ने तो कम से कम ऐसा सही साबित किया है. भारत ने इंग्लैंड को चेन्नई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में चौथे दिन 317 रन से पराजित कर दिया और सिरीज़ में 1-1 की बराबरी भी हासिल कर ली.

इस जीत के साथ ही भारत ने विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के फ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को भी बरक़रार रखा है जो पहले टेस्ट मैच में 227 रन से हारने के बाद धूमिल हो गई थी.

चेन्नई में दूसरा टेस्ट मैच जीतने से भारत के कप्तान विराट कोहली ने भी राहत की सांस ली होगी क्योंकि वह अपनी कप्तानी में पिछले चार टेस्ट मैच हारे थे. इनमें वह दो टेस्ट मैच न्यूज़ीलैंड, एक टेस्ट मैच ऑस्ट्रेलिया और एक टेस्ट मैच इंग्लैंड से हारे. इन हार से उनकी कप्तानी की क्षमता पर भी सवाल खड़े हुए.

अब बात उन कारणों की जिसकी वजह से भारत ने सिरीज़ में शानदार वापसी की.

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टॉस जीतना महत्वपूर्ण रहा

चेन्नई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में भारत का पलड़ा टॉस जीतते ही भारी हो गया था. इंग्लैंड ने अगर चेन्नई में ही खेले गए पहले टेस्ट मैच को जीता था तो उसमें भी टॉस का बड़ा योगदान था क्योंकि चेन्नई में विकेट स्पिनरों को इतनी अधिक मदद पहुंचाता है कि अच्छे से अच्छे बल्लेबाज़ को भी समझ में नहीं आता कि वह कैसे खेले.

इंग्लैंड ने चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पहली पारी में कप्तान जो रूट के दोहरे शतक की बदौलत 578 रन बनाए.

कुछ ऐसा ही भारत ने दूसरे टेस्ट मैच में किया और टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पहली पारी में 329 रन बनाए जो पहले दिन से ही टूटते विकेट पर इंग्लैंड को दबाव में लाने के लिए काफ़ी थे. भारतीय गेंदबाज़ों के दबदबे के सामने इंग्लैंड की पहली पारी महज़ 134 रन पर सिमट गई.

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इंग्लैंड भले ही फ़ॉलोऑन बचाने में कामयाब रहा लेकिन मैच के दूसरे दिन ही तय हो गया था कि मैच किसके पक्ष में जा रहा है. दूसरी पारी में इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 482 रन का लक्ष्य था लेकिन उसकी पूरी पारी 164 रन पर सिमट गई. वैसे चेन्नई की विकेट की आलोचना भी हुई. इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन इसमें शामिल थे लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्पिनर शेन वॉर्न ने पिच का बचाव करते हुए कहा कि इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने भारत के मुक़ाबले बेहद ख़राब बल्लेबाज़ी की. अच्छी बात यह रही कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने पिच को लेकर बहुत कुछ नहीं कहा.

आर अश्विन ने बनाया मैच को यादगार

वैसे तो भारत की जीत में सलामी बल्लेबाज़ रोहित शर्मा की शतकीय पारी ने बुनियाद रखी लेकिन आर अश्विन ने तो बैट और गेंद के साथ ऐसा हैरतअंगेज़ प्रदर्शन किया जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को हो. उन्होंने इंग्लैंड की पहली पारी में पांच विकेट चटकाए और उसके बाद भारत की दूसरी पारी में शानदार बल्लेबाज़ी करते हुए 106 रन की शतकीय पारी भी खेली. यह आर अश्विन ने अपने टेस्ट करियर में तीसरी बार किया जब उन्होंने शतक जमाने के अलावा पांच विकेट भी हासिल किए.

इससे पहले उन्होंने साल 2011-12 में मुंबई में वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ और साल 2016 में वेस्टइंडीज़ के ही ख़िलाफ़ नोर्थ साउंड में खेलते हुए किया था. इससे पहले उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भी अपने जीवट को दिखाया था और भारत की सिरीज़ जीत में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. अश्विन ने इंग्लैंड की दूसरी पारी में भी तीन विकेट हासिल किए थे. आर अश्विन को उनके शानदार प्रदर्शन का इनाम मैन ऑफ द मैच के रूप में मिला.

आर अश्विन ने चेन्नई में अपनी बेहतरीन बल्लेबाज़ी का श्रेय कोच विक्रम राठौर को दिया. वैसे आर अश्विन ने अपने घरेलू मैदान पर शानदार गेंदबाज़ी करते हुए कैरम बॉल और फ्लोटर का भी ख़ूब इस्तेमाल किया. फ्लोटर बॉल बहुत अधिक स्पिन ना होते हुए सीधी निकल जाती है जो चेन्नई जैसे मिट्टी उड़ाते हुए विकेट पर बहुत ख़तरनाक साबित होती है. मैच के बाद आर अश्विन ने मैदान में मौजूद स्थानीय दर्शकों का उन्हीं की तमिल भाषा में विनम्रतापूर्वक धन्यवाद भी दिया. आर अश्विन की इस मायने में भी तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने अपना शतक बनाने के बाद अपनी गेंदबाज़ी को भी बख़ूबी किया जो मूलत: उनका पहला काम है.

आर अश्विन को लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन मानते हैं कि घरेलू पिचों पर तो वह हमेशा बहुत ख़तरनाक रहे है. पिछले पांच मैच में वह 28 विकेट ले चुके हैं और उन्होंने शतक बनाकर याद दिलाया कि वह बल्लेबाज़ भी हैं.

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रोहित शर्मा ने जीत की बुनियाद रखी

ऑस्ट्रेलिया में खेली गई सिरीज़ में रोहित शर्मा का बल्ला ठीक ठाक चला लेकिन चेन्नई में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में उनकी 161 रन की पारी ने मैच में बड़ा अंतर पैदा किया. उनकी इस पारी को क्रिकेट समीक्षक बहुत बड़ा मान रहे हैं क्योंकि उन्होंने अनियमित उछाल वाले विकेट पर रन बनाने के लिए कुछ अलग से तैयारी की.

रोहित शर्मा ने मोईन अली जैसे अनुभवी स्पिनर से निपटने के लिए स्वीप शॉट का सहारा लिया. इसके अलावा वह बिना किसी दबाव के खेले. रोहित शर्मा को इंग्लैंड के कमज़ोर गेंदबाज़ी आक्रमण से भी मदद मिली जो उन्हें लैग साइड में शॉर्ट पिच गेंद करते रहे. रोहित शर्मा ने अपने ही अंदाज़ में उन्हें बाउंड्री लाइन के बाहर पहुंचाया.

रोहित शर्मा की बल्लेबाज़ी और शतक को लेकर अयाज़ मेमन मानते हैं कि उन्होंने पांच छह ओवर के बाद ही भांप लिया कि विकेट कैसा खेलने वाली है. रोहित शर्मा ने टुक-टुक कर खेलने की जगह आक्रामक बल्लेबाज़ी की.

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अक्षर पटेल ने की नपी तुली गेंदबाज़ी

अपना पहला ही टेस्ट मैच खेल रहे अक्षर पटेल ने इंग्लैंड की दूसरी पारी में पांच विकेट किए. इससे बेहतरीन आग़ाज़ किसी भी क्रिकेटर के लिए और क्या हो सकता है. पहली पारी में भी अक्षर पटेल ने दो विकेट हासिल किए थे जिनमें इंग्लैंड के कप्तान जो रूट का विकेट भी शामिल था.

अक्षर पटेल ने स्वीकार किया कि चेन्नई के विकेट पर कुछ अतिरिक्त करने की ज़रूरत नहीं थी बस गेंद की दिशा सही रखनी थी. अक्षर पटेल को अपनी लम्बाई का भी फ़ायदा मिला और उन्होंने दूसरे गेंदबाज़ों के मुक़ाबले कुछ तेज़ गति से गेंद की. अक्षर पटेल ने किसी भी बल्लेबाज़ को स्वीप शॉट खेलने का मौक़ा नहीं दिया, यहॉ तक कि जो रूट को भी नहीं जो उनकी गेंद पर स्वीप शॉट खेलते हुए पहली पारी में आर अश्विन को आसान सा कैच दे बैठे. जो रूट दूसरी पारी में भी अक्षर पटेल का शिकार बने.

अब अक्षर पटेल अपना अगला मैच अपने ही घरेलू मैदान अहमदाबाद में खेलेंगे जो गुलाबी गेंद वाला डे नाईट टेस्ट मैच होगा. अक्षर पटेल को अपना पहला टेस्ट मैच खेलने के लिए सात साल इंतज़ार करना पड़ा. अक्षर पटेल ने साल 2014 में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ ढाका में एकदिवसीय मैच खेला था. वह 38 एकदिवसीय और 11 टी-20 मैच खेल चुके हैं. अक्षर पटेल ने रविंद्र जडेजा की कमी महसूस होने नहीं दी.

अक्षर पटेल

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अजिंक्य रहाणे ने अपने आलोचकों को जवाब दिया

अपनी शानदार कप्तानी का नमूना ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पेशकर अजिंक्य रहाणे ने दिखाया कि विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य से हारी बाज़ी जीत में बदली जा सकती है, लेकिन भारत में उनकी बल्लेबाज़ी पर सवाल खड़े हो रहे थे.

पहले टेस्ट मैच की दोनों पारियों में भी वह नाकाम रहे थे. दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में उन्होंने 67 रन बनाए और रोहित शर्मा के साथ उन्होंने 162 रन की साझेदारी तब की जब भारत के तीन विकेट केवल 86 रन पर गिर चुके थे. इनमें शुभमन गिल और कप्तान विराट कोहली का तो खाता भी नहीं खुला था.

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ऋषभ पंत पर भरोसा काम आया

दूसरी पारी में जब कप्तान विराट कोहली ने ऋषभ पंत को नम्बर पांच पर बल्लेबाज़ी करने भेजा तो शायद ही किसी को आश्चर्य हुआ हो. विराट कोहली ने उन्हें रनों की रफ़्तार तेज़ करने के लिए भेजा था हॉलाकि वह केवल आठ रन बना सके लेकिन पहली पारी में उन्होंने नाबाद 58 रन बनाकर इंग्लैंड के गेंदबाज़ों के हौसले पस्त कर दिए. इसके अलावा उन्होंने विकेट के पीछे भी शानदार प्रदर्शन किया. ख़ासकर दूसरी पारी में उन्होंने डेनियल लॉरेंस को जैसे स्टंप किया.

आर अश्विन की गेंद लॉरेंस के दोनों पांव के बीच से निकली और इससे पहले कि वह वापस क्रीज़ में लौटते पंत ने गिरते हुए सफ़ाई से गेंद पकड़कर गिल्लियाँ बिखरा दी. चौथे दिन के खेल में यह टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. पंत ने शानदार कैच भी पकड़े. पंत की बल्लेबाज़ी क्षमता को लेकर कुछ क्रिकेट समीक्षक भविष्यवाणी कर रहे हैं कि वह भारत के सबसे कामयाब विकेटकीपर बल्लेबाज़ साबित हो सकते है.

विराट कोहली

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भारत ने चुनी सही टीम

दूसरे टेस्ट मैच में मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव और अक्षर पटेल के साथ जब भारतीय टीम मैदान में उतरी तो टीम के चयन पर उठते सवाल अपने आप समाप्त हो गए. मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव को गेंदबाज़ी करने के जितने भी अवसर मिले उसमें उन्होंने निराश नहीं किया.

कुलदीप यादव ने दूसरी पारी में दो विकेट भी हासिल किए. दूसरी तरफ़ इंग्लैंड की टीम में तेज़ गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड और अनुभवी स्पिनर मोईन अली की वापसी हुई लेकिन वह असरदार साबित नहीं हुए. मोईन अली ने पहली पारी में चार विकेट ज़रूर हासिल किए लेकिन उन्होंने इसके लिए 128 रन दे डाले. जिस विकेट पर इंग्लैंड की पहली पारी 134 और दूसरी पारी 164 रन पर सिमट जाए वहां किसी गेंदबाज़ का इतना महंगा साबित होना ख़ुद बताता है कि उनकी गेंदों की दशा और दिशा कैसी थी.

इसके अलावा इंग्लैंड के किसी भी बल्लेबाज़ ने विकेट पर टिकने की क्षमता नहीं दिखाई. वैसे भारत के कप्तान विराट कोहली ने दूसरी पारी में जिस तरह से 62 रन बनाए उससे वह ख़ुद बेहद संतुष्ट दिखे. उन्होंने कहा कि यह शतक से भी बड़ी पारी है. विराट कोहली की यह बात सच भी है क्योंकि धूल उड़ाते विकेट पर अगर अश्विन और वह शानदार बल्लेबाज़ी कर सकते थे तो इंग्लैंड के बल्लेबाज़ क्यों नहीं. पहले टेस्ट मैच में जहॉ इंग्लैंड की फिल्डिंग भी शानदार थी वहीं दूसरे टेस्ट मैच में वह बेहद ख़राब थी जिसका ख़ामियाज़ा उन्हें हार से भुगतना पड़ा. स्टुअर्ट ब्रॉड को तो दोनों पारी में एक भी विकेट नहीं मिला. जोफ्रा आर्चर का अनफ़िट होकर बाहर होना और जेम्स एंडरसन को टीम में ना खिलाना इंग्लैंड की गेंदबाज़ी को कमज़ोर कर गया.

क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन का मानना है कि जोफ्रा आर्चर और एंडरसन के ना होने से इंग्लैंड का गेंदबाज़ी आक्रमण इसलिए बिगड़ गया क्योंकि आर्चर तेज़ी के साथ साथ गेंद को उछाल भी देते हैं तो एंडरसन बेहतरीन स्विंग कराते है. इसके अलावा इस इंग्लैंड की टीम में ऐसे खिलाड़ी बहुत कम हैं जिनके पास भारत में और भारत जैसी विकेट पर खेलने का अनुभव हो. कुछ हद तक जो रूट, बेन स्टोक्स और मोईन अली के पास तजुर्बा हैं लेकिन बाकी खिलाड़ी तो कटी पतंग जैसे साबित हुए.

अश्विन

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अयाज़ मेमन आगे कहते हैं कि इंग्लैंड की रोटेशन पॉलिसी भी सही नहीं है. जोस बटलर और जॉनी बेयरस्टो जैसे खिलाड़ी क्यो टीम से बाहर हैं समझ से परे है. बटलर पहले मैच में खेले और वापस इंग्लैंड चले गए. इंग्लैंड की बल्लेबाज़ी को लेकर भी अयाज़ मेमन स्तुष्ट नहीं है. उनका मानना है कि पहले ओवर से ही स्पिनर देखकर उनका दम फूल गया.

अब अहमदाबाद में होने वाले तीसरे टेस्ट मैच में दोनों टीमों की रणनीति क्या होगी ख़ासकर यह देखते हुए कि वह डे नाइट टेस्ट मैच होगा ?

अयाज़ मेमन के मुताबिक, 'वैसे तो भारत ने अपने घर में डे नाइट टेस्ट मैच में बांग्लादेश को हराया था लेकिन ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड में वह महज़ 36 रन पर सिमट गए थे. भारत के मुक़ाबले इंग्लैंड के पास डे नाइट टेस्ट मैच का अनुभव अधिक है.'

इन सबके बीच यह भी देखना होगा कि अहमदाबाद का विकेट कैसा है क्योंकि वहॉ एक लाख दर्शकों की क्षमता वाला नया स्टेडियम बना है जहां पहली बार कोई टेस्ट मैच खेला जाएगा. अयाज़ मेमन मानते हैं कि विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप भी दोनों टीमों के सामने है जिसके फ़ाइनल में पहुंचने की दौड़ तीसरे टेस्ट मैच को बेहद दिलचस्प बना सकती है

BBC ISWOTY

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