BBC ISWOTY - अर्चना कामथ: डबल्स टेबल टेनिस की शीर्ष 25 खिलाड़ियों में बनाई जगह

भारत की टेबल टेनिस खिलाड़ी अर्चना गिरीश कामथ मौजूदा समय में दुनिया भर में डबल्स रैंकिंग में 24वें पायदान पर हैं, वहीं मिक्स्ड डबल्स में उनकी रैंकिंग 36वीं है. उन्होंने नौ साल की उम्र में अपना टेबल टेनिस करियर शुरू किया था.
कामथ के माता-पिता बेंगलुरु में नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं. अर्चना के माता-पिता ही टेबल टेनिस कोर्ट में उनके पहले पार्टनर रहे हैं.
हार पर कामथ को रोना नहीं आए ये सोचकर उनके माता-पिता खेल में हार जाते थे. हालांकि अब उनकी बेटी बड़ी होकर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुकी हैं लेकिन अभी भी अर्चना के लिए माता-पिता ही सबसे मज़बूत सहारा बने हुए हैं.
बेटी की मदद के लिए मां ने अपनी नौकरी छोड़ दी है. अब वह प्रैक्टिस और टूर्नामेंट के दौरान बेटी के साथ होती हैं. माता पिता ने अर्चना को खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया, लेकिन कामथ के बड़े भाई ने सबसे पहली उनकी प्रतिभा को पहचाना था.
उन्होंने ही अर्चना को खेल को गंभीरता से लेने की सलाह दी थी. इसके बाद ही अर्चना ने टेबल टेनिस को मकसद के साथ खेलना शुरू किया.
बेहद आक्रामक खिलाड़ी
शुरुआत से ही कामथ ने आक्रामक शैली को विकसित किया और यह उनकी पहचान बन चुकी है. कामथ ने राज्य और देशस्तरीय विभिन्न आयुवर्ग में आक्रामक गेम प्ले के साथ टूर्नामेंट जीतना शुरू किया.
2013 में सब जूनियर नेशनल टूर्नामेंट जीतना उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. अर्चना के मुताबिक इस जीत से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा.

इसके बाद से अर्चना से बेहतर रैंकिंग वाली कई खिलाड़ियों को उनके आक्रामक शॉट्स का सामना करना पड़ा है.
हाल के सालों में, अर्चना ने 2018 की कॉमनवेल्थ खेलों की गोल्ड मेडलिस्ट और भारत की नंबर एक खिलाड़ी मनिका बत्रा को कम से कम दो बार हराया है. इसमें एक जीत 2019 के सीनियर नेशनल गेम्स में मिली, 18 साल की उम्र में अर्चना यहां चैंपियन बनी थीं.
कठिन मेहनत से मिली कामयाबी
कामथ ने इंटरनेशनल सर्किट में अपना डेब्यू 2014 में किया था. उन्होंने 2016 में मोरक्को जूनियर एंड कैडेट ओपन टूर्नामेंट में जूनियर गर्ल्स सिंगल्स का खिताब जीता था. उसी साल स्पेनिश जूनियर एंड कैडेट ओपन में वह सेमीफ़ाइनलिस्ट रहीं.
2018 के ब्यूनस आयर्स में हुए यूथ ओलंपिक में अपने प्रदर्शन को अर्चना सीनियर सिंगल्स कैटेगरी में सबसे बेहतर मानती हैं. हालांकि वह चौथे स्थान पर रही थीं, लेकिन इस दौरान उन्होंने काफी अहम चीज़ें सीखीं.
मिक्स्ड डबल्स में, कामथ ने साथियान गणानाशेखरन के साथ मिलकर कटक में 2019 में खेले गए कॉमनवेल्थ टेबल टेनिस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. अर्चना के मुताबिक साथियान के साथ उनकी जोड़ी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में मज़बूत दावेदारी पेश करने वाली जोड़ी है.
कहां है नज़र
आक्रामक अंदाज़ में टेबल टेनिस खेलने का फ़ायदा कामथ को कई विपक्षियों के सामने मिला है लेकिन इस शैली के चलते उनके चोटिल होने की आशंका बनी रहती है. वह बताती हैं कि खेल भी काफी तेज़ी से बदल रहा है ऐसे में तालमेल बिठाए रखने के लिए चोट से बचना सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इसके लिए वह काफी मेहनत कर रही हैं.
मौजूदा समय में कामथ की सिंगल्स में 135वीं रैंकिंग है. वह रैंकिंग में सुधार के साथ साथ 2024 के पेरिस ओलंपिक में भारत के लिए पदक भी हासिल करना चाहती हैं.
कामथ को कर्नाटक सरकार का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार एकलव्य सम्मान 2014 में मिल चुका है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में कई मेडल और सम्मान उनकी झोली में होंगे.
(यह लेख बीबीसी को ईमेल के ज़रिए अर्चना कामथ के भेजे जवाबों पर आधारित है.)
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